सूखी हवाएं, साफ मौसम.. अब और नहीं होगी बारिश, वापस चला मॉनसून! 35 साल का रिकॉर्ड टूटा, 16 साल बाद वक्त से पहले विदाई

Monsoon 2025 Withdrawal: मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि 15 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी पूरी हो जाएगी, और खास बात ये है कि 10 साल में पहली बार मॉनसून तय समय से पहले लौट रहा है.
सूखी हवाएं, साफ मौसम.. अब और नहीं होगी बारिश, वापस चला मॉनसून! 35 साल का रिकॉर्ड टूटा, 16 साल बाद वक्त से पहले विदाई

बारिश सिर्फ पानी की बूंदें नहीं लाती, ये उम्मीद, राहत और एक नई ताजगी भी लेकर आती है. लेकिन, इस बार मॉनसून (Monsoon 2025) का सफर कुछ अलग ही रहा. जिस तरह से इसकी दस्तक ने रिकॉर्ड तोड़े, उसी तरह अब इसकी विदाई भी रिकॉर्ड बना रही है. मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि 15 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी पूरी हो जाएगी, और खास बात ये है कि 10 साल में पहली बार मॉनसून तय समय से पहले लौट रहा है.

इतनी जल्दी क्यों लौटा मॉनसून?

आमतौर पर मॉनसून की विदाई 17 सितंबर के आसपास राजस्थान से शुरू होती है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह खत्म होती है. लेकिन, इस बार 14 सितंबर से ही वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है. यानी मॉनसून ने लगभग 3 दिन पहले ही विदाई की प्रक्रिया शुरू कर दी. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी राज्यों-राजस्थान और गुजरात में अगले 2-3 दिनों में साफ मौसम और सूखी हवाएं मॉनसून को और तेजी से बाहर धकेल देंगी.

रिकॉर्डतोड़ एंट्री: मई में ही आ गया मॉनसून!

अगर इस साल की शुरुआत याद करें तो मॉनसून ने सबको चौंका दिया था.

  • आमतौर पर केरल में मॉनसून 1 जून को दस्तक देता है, लेकिन इस बार 25 मई को ही पहुंच गया.
  • 16 साल बाद ऐसा हुआ जब मॉनसून ने इतनी जल्दी एंट्री की.
  • इतना ही नहीं, मुंबई में भी 35 साल में पहली बार जून से पहले बारिश की दस्तक हुई.

1990 में महाराष्ट्र में मॉनसून ने 20 मई को दस्तक दी थी, और इस बार भी लगभग वैसा ही नजारा रहा.

monsoon 2025 early withdrawal rainfall records climate change impact

क्यों हो रही है ये अनोखी टाइमिंग?

जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉनसून का पैटर्न अब बदल रहा है.

  • ग्लोबल वार्मिंग और एल नीनो जैसी स्थितियां इसका बड़ा कारण मानी जा रही हैं.
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में असामान्य रूप से तेज हवाएं और समुद्र के तापमान में बदलाव ने बारिश को समय से पहले खींच लिया.
  • यही वजह है कि जहां कई राज्यों में जून-जुलाई में बाढ़ जैसे हालात बने, वहीं अगस्त-सितंबर में बारिश सामान्य से कम हो गई.

किसानों पर असर

मॉनसून का समय से पहले लौटना सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि खेती और गांव की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने वाली घटना है.

  • खरीफ की फसलों (धान, सोयाबीन, कपास) को आखिरी चरण में पानी की जरूरत होती है. जल्दी मॉनसून जाने से किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
  • वहीं अच्छी शुरुआती बारिश से भंडारण वाले बांध और तालाब तो भर गए हैं, लेकिन अगर अगले महीने सूखा रहा तो रबी फसल के लिए चिंता बढ़ेगी.

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शहरों का हाल

शहरों में बारिश का पैटर्न इस बार लोगों के लिए रोलर-कोस्टर जैसा रहा.

  • मुंबई, दिल्ली, पुणे जैसे बड़े शहरों में जून-जुलाई की भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया.
  • लेकिन अगस्त-सितंबर आते-आते अचानक बारिश गायब हो गई.
  • यही वजह है कि मॉनसून की वापसी को लेकर अब सबकी नजरें मौसम विभाग पर टिकी हैं.

इतिहास के पन्नों में

  • 1990: महाराष्ट्र में 20 मई को सबसे जल्दी मॉनसून आया.
  • 2009: देश ने मॉनसून की सबसे खराब कमी (ड्राई ईयर) झेली.
  • 2025: 16 साल बाद फिर समय से पहले मॉनसून का आगमन और विदाई दोनों दर्ज हुए.

Conclusion

बारिश का मौसम हर भारतीय के दिल से जुड़ा होता है. खेतों की मिट्टी से लेकर शहरों की सड़कों तक, मॉनसून हमारी जिंदगी को अलग रंग दे देता है. लेकिन इस बार का पैटर्न साफ कह रहा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा. समय से पहले आना और समय से पहले चले जाना- ये जलवायु बदलाव की तरफ इशारा है. किसानों से लेकर आम लोगों तक, सबको इसके साथ तालमेल बिठाना होगा. आने वाले वक्त में ये बदलाव और तेज हो सकते हैं.

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की सामान्य अवधि कितनी होती है?

Ans: जून से सितंबर तक.

Q2. एल नीनो क्या है?

Ans: प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का गर्म होना, जो भारत के मॉनसून को प्रभावित करता है.

Q3. जल्दी मॉनसून लौटने से किसे सबसे ज्यादा असर होता है?

Ans: किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर.

Q4. क्या शहरों में बारिश कम होना भी मॉनसून की विदाई का संकेत है?

Ans: हां, साफ आसमान और नमी में कमी मॉनसून की विदाई का संकेत होता है.

Q5. क्या मॉनसून पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है?

Ans: हां, विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बारिश का पैटर्न लगातार बदल रहा है.

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