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बारिश सिर्फ पानी की बूंदें नहीं लाती, ये उम्मीद, राहत और एक नई ताजगी भी लेकर आती है. लेकिन, इस बार मॉनसून (Monsoon 2025) का सफर कुछ अलग ही रहा. जिस तरह से इसकी दस्तक ने रिकॉर्ड तोड़े, उसी तरह अब इसकी विदाई भी रिकॉर्ड बना रही है. मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि 15 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी पूरी हो जाएगी, और खास बात ये है कि 10 साल में पहली बार मॉनसून तय समय से पहले लौट रहा है.
आमतौर पर मॉनसून की विदाई 17 सितंबर के आसपास राजस्थान से शुरू होती है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह खत्म होती है. लेकिन, इस बार 14 सितंबर से ही वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है. यानी मॉनसून ने लगभग 3 दिन पहले ही विदाई की प्रक्रिया शुरू कर दी. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी राज्यों-राजस्थान और गुजरात में अगले 2-3 दिनों में साफ मौसम और सूखी हवाएं मॉनसून को और तेजी से बाहर धकेल देंगी.
अगर इस साल की शुरुआत याद करें तो मॉनसून ने सबको चौंका दिया था.
1990 में महाराष्ट्र में मॉनसून ने 20 मई को दस्तक दी थी, और इस बार भी लगभग वैसा ही नजारा रहा.

जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉनसून का पैटर्न अब बदल रहा है.
मॉनसून का समय से पहले लौटना सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि खेती और गांव की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने वाली घटना है.

शहरों में बारिश का पैटर्न इस बार लोगों के लिए रोलर-कोस्टर जैसा रहा.
बारिश का मौसम हर भारतीय के दिल से जुड़ा होता है. खेतों की मिट्टी से लेकर शहरों की सड़कों तक, मॉनसून हमारी जिंदगी को अलग रंग दे देता है. लेकिन इस बार का पैटर्न साफ कह रहा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा. समय से पहले आना और समय से पहले चले जाना- ये जलवायु बदलाव की तरफ इशारा है. किसानों से लेकर आम लोगों तक, सबको इसके साथ तालमेल बिठाना होगा. आने वाले वक्त में ये बदलाव और तेज हो सकते हैं.
Ans: जून से सितंबर तक.
Ans: प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का गर्म होना, जो भारत के मॉनसून को प्रभावित करता है.
Ans: किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर.
Ans: हां, साफ आसमान और नमी में कमी मॉनसून की विदाई का संकेत होता है.
Ans: हां, विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बारिश का पैटर्न लगातार बदल रहा है.