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भारत में Consulting और Auditing Firms के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम (Ecosystem) तैयार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. आज शाम 5:30 बजे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में इस मुद्दे को लेकर एक अहम बैठक आयोजित हुई.
इस मीटिंग में कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) यानी MCA के सचिव और पॉलिसी डिवीजन के जॉइंट सेक्रेटरी भी मौजूद रहे. इसमें खास तौर पर उस डिस्कशन पेपर पर बात हुई, जिसे MCA पिछले हफ्ते लेकर आई थी और जिस पर पहले ही कई हितधारकों (Stakeholders) की राय ली जा चुकी है.
MCA ने इस मामले में एक Inter-Ministerial Group (IMG) का गठन किया है. इसकी अध्यक्षता MCA के सचिव कर रहे हैं. इस ग्रुप का मुख्य लक्ष्य है भारत में कंसल्टिंग और ऑडिटिंग कंपनियों का मजबूत ढांचा बनाना. सरकार घरेलू स्तर पर ऐसी फर्म्स तैयार करना चाहती है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों को टक्कर दे सकें. भारतीय स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट सेक्टर को बेहतर ऑडिटिंग और एडवाइजरी सपोर्ट उपलब्ध कराने में इससे मदद मिलेगी.
बैठक का सबसे अहम बिंदु रहा MDP (Multi-Disciplinary Partnership) Firms. इस मॉडल के तहत एक ही फर्म में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ (जैसे अकाउंटिंग, लीगल, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट) मिलकर काम करेंगे. इससे कंपनियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर 360-डिग्री सर्विसेज मिल सकेंगी. MCA का मानना है कि MDP मॉडल भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
MCA ने इस पूरे प्रस्ताव पर जनता, उद्योग जगत और सभी हितधारकों से राय मांगी है. इसके लिए MCA ने अपनी वेबसाइट पर Background Note और e-Consultation Module अपलोड किया है. लोग अपनी राय सीधे पोर्टल (mcagov.in) पर सबमिट कर सकते हैं. इसके अलावा MCA ने एक ईमेल आईडी भी जारी की है: so-pimca@gov.in. सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2025 है.
MCA ने पिछले हफ्ते भी एक बड़ी बैठक की थी, जिसमें कंसल्टिंग और ऑडिटिंग फर्म्स से जुड़े लोगों की राय जानी गई थी. कई लोगों ने कहा कि भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से मुकाबले के लिए नीति और संसाधन दोनों की जरूरत है. कुछ ने सुझाव दिया कि भारतीय फर्म्स को टेक्नोलॉजी और डिजिटल टूल्स अपनाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. वहीं, कुछ ने कहा कि सरकार को विदेशी फर्म्स पर निर्भरता कम करने के लिए इंडियन ब्रांड्स को प्रमोट करना चाहिए.
भारत में कंसल्टिंग और ऑडिटिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी यह बड़े पैमाने पर विदेशी फर्म्स पर निर्भर है. MSME और स्टार्टअप्स को अपनी जरूरत के हिसाब से सस्ती और लोकल सर्विसेज चाहिए. घरेलू फर्म्स के मजबूत होने से रोजगार (Employment) और स्किल डेवलपमेंट (Skill Development) भी बढ़ेगा. इससे भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता (Economic Self-Reliance) को भी मजबूती मिलेगी.
इस मीटिंग के बाद उम्मीद है कि MCA इस पर एक नीति ड्राफ्ट तैयार करेगी. अगर MDP मॉडल लागू होता है तो भारतीय फर्म्स को एक नया स्ट्रक्चर मिलेगा. स्टेकहोल्डर्स के सुझावों के आधार पर इसमें प्रैक्टिकल सुधार भी किए जाएंगे. सरकार की कोशिश है कि अक्टूबर से इस दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जाएं.
PMO में हुई इस बैठक ने साफ कर दिया है कि भारत सरकार कंसल्टिंग और ऑडिटिंग फर्म्स के क्षेत्र में अब गंभीरता से घरेलू इकोसिस्टम खड़ा करने पर काम कर रही है. आने वाले समय में MDP मॉडल भारतीय फर्म्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत देगा. अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि 30 सितंबर तक कितने और किस तरह के सुझाव आते हैं और सरकार उन्हें अपनी पॉलिसी में कैसे शामिल करती है.
A. ऑडिटिंग फर्म कंपनियों के अकाउंट्स और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की जांच करती है.
A. कंसल्टिंग फर्म कंपनियों को मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजी पर सलाह देती है.
A. एक ऐसा मॉडल जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स मिलकर एक ही फर्म से सेवाएं देते हैं.
A. MCA यानी Ministry of Corporate Affairs, भारत सरकार का वह मंत्रालय है जो कंपनियों से जुड़े नियम और नीतियां बनाता है.
A. ताकि अलग-अलग मंत्रालय मिलकर इस मुद्दे पर बेहतर समाधान निकाल सकें.
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