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मंत्रालय के अनुसार, गैर-उज्ज्वला (Non-Ujjwala) ग्राहकों को प्रति सिलेंडर करीब ₹700 और उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹1,000 की सब्सिडी मिल रही है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में हुई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद देश में जारी चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने जोर देकर कहा है कि कीमतों में इस मामूली वृद्धि के बाद भी आम उपभोक्ताओं को रसोई गैस पर एक बहुत बड़ी 'अप्रत्यक्ष सब्सिडी' (Indirect Subsidy) दी जा रही है.
सोमवार को आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार (सऊदी सीपी) के मानकों के हिसाब से एक 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की वास्तविक लागत इस समय ₹1,600 से अधिक बैठती है. लेकिन इसके बावजूद देश के आम उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर महज ₹942 में उपलब्ध कराया जा रहा है.
अतिरिक्त सचिव ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि देश के हर वर्ग के रसोई गैस उपभोक्ता को सरकार किस तरह राहत दे रही है:
गैर-उज्ज्वला (Non-Ujjwala) उपभोक्ता: जो लोग उज्ज्वला योजना के दायरे में नहीं आते हैं, उन्हें भी ₹1,600 वाला सिलेंडर ₹942 में मिल रहा है. यानी सरकार उन्हें प्रति सिलेंडर सीधे तौर पर ₹700 की अप्रत्यक्ष सब्सिडी दे रही है.
उज्ज्वला (Ujjwala) लाभार्थी: उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले गरीब परिवारों को इस छूट के ऊपर ₹300 की अतिरिक्त डायरेक्ट सब्सिडी मिलती है. इस प्रकार उन्हें मिलने वाली कुल राहत ₹1,000 प्रति सिलेंडर हो जाती है. (ध्यान रहे कि उज्ज्वला ग्राहकों के लिए यह ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी सालाना पहले 4 सिलेंडरों तक ही सीमित है, जो कि उनकी औसत वार्षिक खपत के बराबर है).
मंत्रालय ने ₹29 की हालिया बढ़ोतरी को बहुत मामूली बताते हुए कहा कि अगर कोई परिवार साल में 12 सिलेंडर भी इस्तेमाल करता है, तो यह खर्च प्रति दिन केवल ₹1 बैठता है. एक औसत परिवार के सदस्यों के हिसाब से देखें, तो यह बोझ "प्रति दिन प्रति सदस्य महज 20 पैसे" आता है. कंपनियों को हो रहे ₹700 के भारी नुकसान के मुकाबले यह बढ़ोतरी बेहद मामूली है.
प्रेस ब्रीफिंग में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उथल-पुथल के कारण सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर घाटे का भारी दबाव है:
LPG सिलेंडर पर घाटा: कंपनियों को प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर करीब ₹700 की अंडर-रिकवरी (लागत से कम वसूली) हो रही है. इससे पहले सरकार ने इस घाटे की भरपाई के लिए वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान कंपनियों को ₹52,000 करोड़ की सहायता दी थी.
पेट्रोल और डीजल पर नुकसान: स्थिति सिर्फ एलपीजी तक सीमित नहीं है. तेल कंपनियों को वर्तमान में डीजल पर ₹30 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसके चलते पूरे पेट्रोलियम उद्योग को हर दिन ₹600 से ₹700 करोड़ का नुकसान हो रहा है.
मंत्रालय ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रहे तनाव के बावजूद देश में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है.
देश में घरेलू एलपीजी उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाया गया है. वर्ल्ड एलपीजी डे के मौके पर डोमेस्टिक एलपीजी प्रोडक्शन 53 टीएमटी (TMT) प्रति दिन तक पहुंच गया, जो संकट-पूर्व के स्तर से लगभग 60 प्रतिशत अधिक है.
वर्तमान में गैस एजेंसियों पर बुकिंग का बैकलॉग घटकर 4 दिन से भी कम रह गया है. ऑनलाइन गैस बुकिंग 99 प्रतिशत और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन 96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. पिछले चार दिनों में औसतन 42 लाख सिलेंडर रोज बुक हुए और 44 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी की गई.
पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG): देश में पीएनजी कनेक्शनों का आंकड़ा 1.69 करोड़ को पार कर चुका है, जिसमें मार्च 2026 से अब तक 9.16 लाख नए कनेक्शन जोड़े गए हैं.
E85 फ्लेक्स-फ्यूल लॉन्च: विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों के लिए बीती 5 जून को लॉन्च किया गया 'E85 फ्लेक्स-फ्यूल' अब देश के 50 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है. दिसंबर 2027 तक इसे 5,000 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. खास बात यह है कि इसकी कीमत नॉर्मल E20 ईंधन से ₹20 प्रति लीटर सस्ती रखी गई है.
कालाबाजारी पर कड़ा एक्शन: ईंधन की कालाबाजारी और गड़बड़ी रोकने के लिए पिछले चार दिनों में पेट्रोल-डीजल आउटलेट्स पर 1,800 छापे मारे गए और 890 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स की जांच की गई, जिसके बाद कई जगह जुर्माना और एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में आए भारी उछाल का पूरा बोझ आम जनता पर नहीं डाल रही है. तेल कंपनियों द्वारा खुद भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) सहकर और सरकार द्वारा ₹700 से ₹1,000 तक की परोक्ष सब्सिडी देकर देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि, पेट्रोल-डीजल पर कंपनियों को हो रहा ₹600-700 करोड़ का दैनिक नुकसान आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर बना रहेगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर का मानक वजन कितना होता है?
घरेलू रसोई गैस सिलेंडर में नेट गैस का वजन 14.2 किलोग्राम होता है.
Q2 बिना सब्सिडी के एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत कितनी है?
अंतरराष्ट्रीय दरों (सऊदी सीपी) के आधार पर इसकी वास्तविक लागत ₹1,600 से अधिक बैठती है.
Q3 वर्तमान में आम ग्राहकों (Non-Ujjwala) को यह सिलेंडर किस कीमत पर मिल रहा है?
सरकार द्वारा दी जा रही राहत के बाद आम ग्राहकों को यह सिलेंडर ₹942 में मिल रहा है.
Q4 गैर-उज्ज्वला (Non-Ujjwala) उपभोक्ताओं को सरकार कितनी परोक्ष सब्सिडी दे रही है?
इन ग्राहकों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 की अप्रत्यक्ष (Indirect) सब्सिडी मिल रही है.
Q5 उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर कुल कितनी छूट मिलती है?
उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹700 की परोक्ष छूट के साथ ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है, यानी कुल ₹1,000 की राहत मिलती है.