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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया. (Image Source- संसद टीवी)
संसद भवन की कार्यवाही के दौरान बुधवार को केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदन के पटल पर बताया कि दूरसंचार के मामले में भारत अब रुकने वाला नहीं है. एक समय था जब हम 3G के दौर में दुनिया से पीछे छूट गए थे, लेकिन आज कहानी बदल चुकी है.
4G में हम दुनिया के साथ चले, 5G में हमने रफ्तार पकड़ी और अब 6G के मामले में भारत पूरी दुनिया को रास्ता दिखाने के लिए तैयार खड़ा है. यह सिर्फ एक दावा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आंकड़े और सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति है.
सिंधिया ने सदन को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जो 'भारत 6G एलायंस' शुरू किया गया था, वह अब एक विशाल रूप ले चुका है. शुरुआत में इससे सिर्फ 14 संस्थान जुड़े थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है. भारत का लक्ष्य बहुत बड़ा है- हम दुनिया के कुल 6G पेटेंट में लगभग 10% का योगदान देना चाहते हैं.
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आपको जानकर हैरानी होगी कि इस दिशा में भारत पहले ही 4000 पेटेंट दर्ज करा चुका है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का दबदबा बढ़ रहा है. यूबिक्विटस कनेक्टिविटी (Ubiquitous Connectivity) को लेकर भारत ने जो प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे 3GPP और ITU में रखा था, उसे अब स्वीकार कर लिया गया है.
भारत की यह तैयारी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है. संचार मंत्री ने बताया कि भारत 6G एलायंस के भीतर 7 अलग-अलग वर्किंग ग्रुप्स बनाए गए हैं. ये ग्रुप्स स्पेक्ट्रम, डिवाइस टेक्नोलॉजी, कंपोनेंट्स, ग्रीन एवं सस्टेनेबिलिटी, आउटरीच और 6G यूज केस जैसे जरूरी क्षेत्रों पर दिन-रात काम कर रहे हैं.
सबसे खास बात यह है कि मंत्रालय खुद हर तीन महीने में इन ग्रुप्स की प्रोग्रेस रिपोर्ट चेक करता है. इस त्रैमासिक समीक्षा का मकसद यह है कि विकास का काम समय पर पूरा हो और कहीं कोई रुकावट न आए.
तकनीक के साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (ANRF) के जरिए एक बड़ा दांव खेला है. फरवरी 2024 में गठित इस फाउंडेशन का उद्देश्य देश में रिसर्च के माहौल को नई गति देना है.
सिंधिया ने बताया कि साल 2023 से 2028 तक के लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है. इसमें से 14,000 करोड़ रुपये का बजट वित्त मंत्री द्वारा पहले ही घोषित किया जा चुका है. यह फंड भारत के वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
ANRF के तहत सिर्फ पैसा ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि इसे सही दिशा में खर्च करने के लिए 8 महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं. इनमें एडवांस रिसर्च ग्रांट, प्राइम मिनिस्टर अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट और इन्क्लूसिविटी रिसर्च ग्रांट जैसे प्रोग्राम शामिल हैं.
इसके अलावा देश में सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, इनोवेशन हब्स और फेलोशिप कार्यक्रमों के माध्यम से रिसर्च के ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. इन विशिष्ट कार्यक्रमों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है. सरकार का मकसद साफ है- भारत को ग्लोबल रिसर्च हब बनाना.
Q: 6G पेटेंट के मामले में भारत का क्या लक्ष्य है?
A: भारत का लक्ष्य वैश्विक 6G पेटेंट में लगभग 10% की हिस्सेदारी हासिल करना है, जिसमें से 4000 पेटेंट पहले ही किए जा चुके हैं.
Q: भारत 6G एलायंस से कितने संस्थान जुड़ चुके हैं?
A: भारत 6G एलायंस से जुड़े संस्थानों की संख्या अब 14 से बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है.
Q: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के लिए कितना बजट रखा गया है?
A: वर्ष 2023 से 2028 की अवधि के लिए ANRF के तहत ₹50,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
Q: 6G विकास की निगरानी कैसे की जा रही है?
A: 6G एलायंस के अंतर्गत 7 वर्किंग ग्रुप्स कार्य कर रहे हैं, जिनकी प्रगति की समीक्षा मंत्रालय द्वारा हर तीन महीने (तिमाही) में की जाती है.
Q: ANRF के तहत कौन से मुख्य रिसर्च प्रोग्राम शुरू किए गए हैं?
A: इसके तहत एडवांस रिसर्च ग्रांट, सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और फेलोशिप कार्यक्रमों समेत 8 महत्वपूर्ण प्रोग्राम शुरू किए गए हैं.