₹38,000 करोड़! ये है जन औषधि केंद्रों का 'चमत्कार', देश के हर नागरिक की जेब में बचे हजारों रुपए

जन औषधि योजना के तहत अब तक देशभर में 16,912 केंद्र खुल चुके हैं, जिनका उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं सभी को उपलब्ध कराना है. यह योजना 2,000 से अधिक दवाओं और 300 से ज्यादा सर्जिकल उत्पादों को कवर करती है.
₹38,000 करोड़! ये है जन औषधि केंद्रों का 'चमत्कार', देश के हर नागरिक की जेब में बचे हजारों रुपए

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत जून तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोले जा चुके हैं.राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य मंत्री पटेल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य सभी को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना है.

इस योजना के अंतर्गत लगभग 2,110 दवाइयां और 315 सर्जिकल, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं.इसमें सभी प्रमुख चिकित्सीय समूह, जैसे हृदय रोग, कैंसर-रोधी, मधुमेह-रोधी, संक्रमण-रोधी, एलर्जी-रोधी और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल दवाएं और न्यूट्रास्युटिकल्स शामिल हैं.

लैब रीजेंट और वैक्सीन को छोड़कर, आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इस योजना के उत्पाद समूह में शामिल हैं.राज्य मंत्री पटेल ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में, ब्रांडेड दवाओं की कीमतों की तुलना में नागरिकों को लगभग 38,000 करोड़ रुपए की अनुमानित बचत हुई है."

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जन औषधि केंद्र का आंकड़ा

नेशनल हेल्थ अकाउंट अनुमानों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जन औषधि केंद्रों (जेएके) ने वित्त वर्ष 2014-15 में कुल स्वास्थ्य व्यय के 62.6 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2021-22 में 39.4 प्रतिशत तक परिवारों द्वारा अपनी जेब से किए जाने वाले खर्च में भारी कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.उन्होंने बताया सबसे अधिक जन औषधि केंद्र 3,550 उत्तर प्रदेश में हैं, उसके बाद 1,629 केरल, 1,480 कर्नाटक और 1,432 तमिलनाडु में हैं।

राज्य मंत्री ने सरकार के मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने के लक्ष्य की भी जानकारी दी.सरकार ने जन औषधि केंद्र खोलने में फ्रैंचाइजी जैसा मॉडल अपनाया है, जिसमें देश भर के विभिन्न ब्लॉकों और तहसीलों सहित, फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) की वेबसाइट के माध्यम से व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, समितियों, ट्रस्टों, फर्मों, निजी कंपनियों आदि से आवेदन ऑनलाइन आमंत्रित किए जाते हैं.

स्टॉकिंग अधिदेश के तहत, जेएके मालिक अपने द्वारा रखे गए 200 दवाओं के स्टॉक के आधार पर प्रोत्साहन का दावा करने के पात्र हो जाते हैं.राज्य मंत्री पटेल ने कहा, "जेएके में सुचारू आपूर्ति और उत्पाद उपलब्धता के लिए, एक संपूर्ण आईटी-सक्षम सप्लाई चेन सिस्टम स्थापित किया गया है, जिसमें एक केंद्रीय गोदाम, चार क्षेत्रीय गोदाम और देश भर में नियुक्त 39 वितरक शामिल हैं."

राज्य मंत्री ने आगे कहा, "400 फास्ट-मूविंग प्रोडक्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनकी उपलब्धता की नियमित रूप से निगरानी की जाती है. इसके अलावा, 200 दवाओं के लिए न्यूनतम स्टॉकिंग अधिदेश लागू किया गया है, जिसमें स्कीम प्रोडक्ट बास्केट की 100 सबसे अधिक बिकने वाली दवाएं और बाजार में 100 तेजी से बिकने वाली दवाएं शामिल हैं."

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