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विदेश मंत्री एस जयशंकर. (Image Source- X)
राजधानी दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के मंच से आज भारत ने पूरी दुनिया को एक कड़ा और साफ संदेश दे दिया है. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बड़े ही बेबाक अंदाज में कहा कि भारत जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उसे अब रोकना नामुमकिन है. उन्होंने साफ किया कि भारत की यह तरक्की किसी दूसरे देश की कमजोरी या उसकी गलतियों का नतीजा नहीं है, बल्कि यह हमारी खुद की मेहनत, संसाधन और ताकत की पहचान है.
'हार्ट ऑफ द सीज: फ्यूचर ऑफ द इंडियन ओशन' थीम पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने हिंद महासागर के भविष्य और उसमें भारत की भूमिका पर विस्तार से बात की. उनके साथ मंच पर सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका के विदेश मंत्री भी मौजूद थे. जयशंकर का पूरा भाषण इस बात पर टिका था कि भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि हिंद महासागर का असली रक्षक और संचालक बनकर उभर रहा है.
चर्चा के दौरान जब यह सवाल उठा कि आखिर हिंद महासागर ही इकलौता ऐसा महासागर क्यों है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है, तो जयशंकर ने मुस्कुराते हुए बड़ा सटीक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि हम इस महासागर के बिल्कुल बीच में स्थित हैं. यह हमारी पहचान है और हमारा भूगोल ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.
उन्होंने आगे कहा कि अगर हमें हिंद महासागर की एक अलग पहचान बनानी है, तो इसे केवल बातों से नहीं बल्कि काम, संसाधनों और बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए साबित करना होगा. भारत आज यही कर रहा है. हम केवल वादे नहीं कर रहे, बल्कि समुद्र के रास्ते व्यापार और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं.
डॉ. जयशंकर ने हिंद महासागर के पड़ोसी देशों को एक बहुत बड़ा ऑफर भी दे दिया. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और ताकत बढ़ेगी, इसका सीधा फायदा उन देशों को मिलेगा जो हिंद महासागर के क्षेत्र में आते हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "भारत के विकास से हिंद महासागर के सभी देशों को लाभ होगा, लेकिन जो देश हमारे साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें कहीं ज्यादा फायदा मिलेगा."
यह एक तरह से पड़ोसी देशों के लिए खुला निमंत्रण भी था और यह संदेश भी कि भारत एक जिम्मेदार बड़े भाई की तरह सबको साथ लेकर चलने के लिए तैयार है. भारत की ग्रोथ अब रुकने वाली नहीं है और जो इस ग्रोथ की लहर पर सवार होगा, उसकी भी तरक्की तय है.
विदेश मंत्री के भाषण का सबसे दमदार हिस्सा वह था जब उन्होंने भारत के उदय (Rise of India) की दिशा तय की. उन्होंने कहा कि भारत की ऊंचाई इस बात से तय नहीं होगी कि दूसरे देशों ने क्या गलतियां कीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि भारत ने खुद को कितना मजबूत बनाया है. जयशंकर का यह बयान उन लोगों के लिए जवाब था जो भारत की तरक्की को ग्लोबल पॉलिटिक्स के समीकरणों से जोड़कर देखते हैं.
उनका कहना था कि भारत की दिशा एकदम स्पष्ट है और यह उदय 'अनस्टॉपेबल' यानी कि इसे अब थामना मुमकिन नहीं है. भारत आज अपने संसाधनों को सही जगह लगा रहा है और अपने लोगों की क्षमता पर भरोसा कर रहा है.
जयशंकर ने सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका जैसे देशों के साथ तालमेल बिठाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हिंद महासागर का भविष्य आपसी सहयोग पर टिका है. भारत केवल सुरक्षा ही नहीं दे रहा, बल्कि व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स के जरिए इन देशों की अर्थव्यवस्था को भी सहारा दे रहा है.
उनका मानना है कि हिंद महासागर की भावना को बनाए रखने के लिए प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स और काम करने की कमिटमेंट बहुत जरूरी है. भारत आज अपनी नेवी और अपनी डिप्लोमेसी के जरिए इसी विजन को आगे बढ़ा रहा है.