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(Image- IANS)
दुनिया भर में माल की आपूर्ति ठप होने की आशंकाओं और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका के टेक्सास से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर एक जहाज मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया है. बता दें कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से देश में एलपीजी की किल्लत हो गई है.
वहीं, रूस से कच्चा तेल ले जा रहा एक अन्य जहाज भी मंगलुरु पहुंच गया है. यह जहाज बंदरगाह से लगभग 18 समुद्री मील दूर स्थित था. तेल को पाइपलाइन के माध्यम से एमआरपीएल (MRPL) तक पहुंचाने के लिए सिंगल-पॉइंट मूरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा.
इससे पहले, नंदा देवी और शिवालिक जहाज भी एलपीजी लेकर भारत आए थे. नंदा देवी जहाज गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा था और शिवालिक मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था. दोनों जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर बेहद जोखिम भरे रास्ते से गुजरते हुए एलपीजी लेकर आए थे. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री रास्ता बाधित है.
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अमेरिका से मिली मंजूरी के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है. ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई में आई बाधाओं के बाद आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से भारत ने कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोतरी की है.
पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं और डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के समन्वय से स्थिति पर नजर रख रहा है.
सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में 20% की और बढ़ोतरी कर दी है. अब कुल आवंटन बढ़कर 50% हो गया है.
इसमें उन प्रवासी मजदूरों को भी प्राथमिकता दी गई है जो 5kg वाले छोटे सिलेंडर (FTL) का इस्तेमाल करते हैं.
एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी जारी है.
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(IANS इनपुट के साथ)