टेंशन फ्री फ्यूचर! हर 10 में से 6 भारतीय युवा कर रहे बचत को फोकस, रिपोर्ट का दावा-नई पीढ़ी कर रही है स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग

एक ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि हर 10 में से 6 भारतीय युवा अपनी अतिरिक्त आय को बचत और निवेश में लगा रहे हैं.अब युवा केवल खर्च पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि भविष्य सुरक्षित करने के लिए सजग वित्तीय आदतें अपना रहे हैं.
टेंशन फ्री फ्यूचर! हर 10 में से 6 भारतीय युवा कर रहे बचत को फोकस, रिपोर्ट का दावा-नई पीढ़ी कर रही है स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग

आज के टाइम में युवा भारतीय पेशेवर अपने पैसे को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं. एक हालिया सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि भारतीय युवा अब केवल खर्च करने या मौज-मस्ती पर पैसा उड़ाने की बजाय फ्यूचर को सुरक्षित करने के लिए बचत और निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.

सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे

नौकरी (Naukri.com) की ओर से किए गए इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पूरे देशभर के लगभग 20,000 जॉब सीकर्स शामिल हुए इनकी सालाना इनकम करीब 12.75 लाख रुपये तक थी. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 60 प्रतिशत युवा अपनी सरप्लस इनकम को बचत और निवेश में डाल रहे हैं. वहीं करीब 30 प्रतिशत युवा कर्ज चुकाने को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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इसका मतलब यह है कि बड़ी संख्या में भारतीय युवा अपनी वित्तीय आदतों को बदल रहे हैं. पहले जहां “अभी खर्च करो और बाद की बाद में सोचो” वाला रवैया देखा जाता था, वहीं अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदल रहा है.

खर्च करने वालों का छोटा वर्ग

सर्वे के अनुसार, एक छोटा-सा वर्ग अब भी तत्काल उपभोग (immediate consumption) की ओर झुका हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया कि 9 प्रतिशत युवा अपनी अतिरिक्त कमाई लाइफस्टाइल अपग्रेड पर यानी ब्रांडेड कपड़े, गैजेट्स, लग्जरी सामान आदि पर खर्च कर रहे हैं.वहीं 4 प्रतिशत युवा ट्रैवल और घूमने-फिरने को तरजीह दे रहे हैं.

इससे साफ है कि भले ही कुछ लोग शॉर्ट-टर्म खुशी को चुन रहे हों, लेकिन अधिकांश युवा लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा की ओर बढ़ रहे हैं.

सेक्टरवार आंकड़े

सर्वेक्षण में सेक्टरवार बचत के रुझान भी सामने आए।

टेक्नोलॉजी सेक्टर के प्रोफेशनल्स सबसे आगे हैं, वे अपनी सरप्लस इनकम का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा बचत में डाल रहे हैं.
ऑटो और फार्मा सेक्टर के पेशेवर 57 प्रतिशत बचत कर रहे हैं.
वहीं, एफएमसीजी और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में यह आंकड़ा क्रमशः 64 प्रतिशत और 60 प्रतिशत है.

ये आंकड़े दिखाते हैं कि अलग-अलग उद्योगों में काम करने वाले युवाओं का फाइनेंशियल व्यवहार उनकी आय और करियर के स्थिरता स्तर पर भी निर्भर करता है.

पीढ़ीगत बदलाव की झलक

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सर्वे फाइनेंशियल आदतों में एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव को पेश करता है. अब युवा भारतीय प्रोफेशनल्स तत्काल खर्च से ज्यादा दीर्घकालिक सुरक्षा और संपत्ति निर्माण पर जोर दे रहे हैं.पहले नौकरी शुरू करने वाले कई युवा अपनी पहली सैलरी या शुरुआती कमाई का उपयोग शॉपिंग, घूमने या लाइफस्टाइल सुधारने में कर देते थे, लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है। युवा अब छोटी उम्र से ही सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट की अहमियत समझ रहे हैं.

नई नौकरी वालों की सोच

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जो युवा पहली बार नौकरी कर रहे हैं, उनमें से 31 प्रतिशत लोग अपनी अतिरिक्त आय को लाइफस्टाइल अपग्रेड में खर्च करना चाहते हैं.वहीं 14 प्रतिशत नए जॉइनर्स ट्रैवल और घूमने-फिरने पर पैसा लगाना चाहते हैं.

यह आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत में कई युवा खुद को रिवार्ड देने की सोच रखते हैं। लेकिन समय के साथ-साथ उनका झुकाव सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ जाता है।

टैक्स व्यवस्था की जानकारी

रिपोर्ट में एक और अहम तथ्य सामने आया है, जी हां नई टैक्स व्यवस्था को लेकर जागरूकता अभी भी सभी युवाओं में समान नहीं है.

-64 प्रतिशत नए प्रोफेशनल्स को नई टैक्स स्कीम के बारे में पूरी जानकारी है.
-वहीं, 5 साल से ज्यादा अनुभव वाले 57 प्रतिशत प्रोफेशनल्स ने कहा कि वे इसके बारे में अच्छी तरह जानते हैं.
-कुल मिलाकर, 43 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे बदलावों को लेकर या तो अनिश्चित हैं या पूरी तरह अनजान.

इससे यह साफ है कि वित्तीय शिक्षा और टैक्स नॉलेज को लेकर अभी और काम करने की जरूरत है.

क्यों खास है यह रिपोर्ट?

यह रिपोर्ट भारतीय युवाओं की सोच और वित्तीय आदतों में हो रहे बदलाव का साफ सबूत देती है. पहले जहां सेविंग्स को अक्सर बुजुर्गों या अनुभवी लोगों का काम माना जाता था, अब युवा भी इस दिशा में जागरूक हो रहे हैं.

जरूरी बातें

1. हर 10 में से 6 युवा सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं.
2. 30% युवा कर्ज चुकाने में सरप्लस इनकम का उपयोग कर रहे हैं.
3. केवल 9% लोग लाइफस्टाइल और 4% लोग ट्रैवल पर खर्च करना पसंद करते हैं.
4. टेक्नोलॉजी सेक्टर सेविंग्स में सबसे आगे (76%) है.
5. टैक्स नॉलेज को लेकर अभी भी कई युवाओं में कन्फ्यूजन है,

ये रिपोर्ट से यह साबित होता है कि भारतीय युवाओं में फाइनेंशियल समझ और जिम्मेदारी बढ़ रही है. आज का युवा सिर्फ शॉर्ट-टर्म मजे पर नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म सुरक्षा और संपत्ति निर्माण पर ध्यान दे रहा है. बचत और निवेश की यह आदत आने वाले समय में न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को मजबूत बनाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता प्रदान करेगी.

5 FAQs

Q1. बच्चों के लिए निवेश कब शुरू करना चाहिए?
बच्चे की 5 साल की उम्र से निवेश शुरू करना सबसे बेहतर माना जाता है.

Q2. कंपाउंडिंग क्या होती है?
कंपाउंडिंग में निवेश पर मिलने वाला ब्याज भी आगे ब्याज कमाने लगता है, जिससे धन तेजी से बढ़ता है.

Q3. ₹5 लाख का निवेश ₹2.64 करोड़ कैसे बन सकता है?
लंबे समय तक सही रिटर्न दर पर निवेश करने से कंपाउंडिंग के जरिए यह रकम करोड़ों में बदल सकती है.

Q4. बच्चों के लिए शुरुआती निवेश से क्या फायदा है?
बच्चे की पढ़ाई, करियर और शादी जैसे बड़े खर्च आसानी से पूरे किए जा सकते हैं.

Q5. कौन से निवेश विकल्प बच्चों के लिए सही हैं?
SIP, म्यूचुअल फंड, PPF और पोस्ट ऑफिस स्कीम्स बच्चों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं.

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