भारतीय सेना खरीदेगी 300 स्वदेशी 'धनुष' हॉवित्जर, बोफोर्स से भी घातक है ये 'देसी' तोप, दागती है 155mm का गोला

रक्षा मंत्रालय की जल्द होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में 300 स्वदेशी 'धनुष' हॉवित्जर (Dhanush Howitzers) तोपों की खरीद को मंजूरी दी जा सकती है. ये तोपें सेना की 15 रेजिमेंटों को सुसज्जित करेंगी. 'धनुष' को 1980 के दशक की मशहूर बोफोर्स तोप की तकनीक पर आधारित कर भारत में ही विकसित किया गया है. यह 'मेक इन इंडिया' के तहत सेना की मारक क्षमता को दोगुना करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.
भारतीय सेना खरीदेगी 300 स्वदेशी 'धनुष' हॉवित्जर, बोफोर्स से भी घातक है ये 'देसी' तोप, दागती है 155mm का गोला

भारतीय सेना अपनी सीमाओं की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए 'स्वदेशी हथियारों' पर भरोसा जता रही है. इसी कड़ी में एक बड़ी खबर आ रही है. सेना जल्द ही 300 स्वदेशी धनुष हॉवित्जर (Dhanush Howitzers) खरीदने का ऑर्डर देने जा रही है.

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस सौदे को जल्द ही हरी झंडी मिल सकती है. यह न केवल हमारी आर्टिलरी (तोपखाने) को मजबूती देगा, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को भी मजबूत करेगा.

15 रेजिमेंटों को मिलेगा 'धनुष' का साथ

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सेना की योजना इन 300 नई तोपों के जरिए 15 रेजिमेंटों को तैयार करने की है. यह धनुष तोपों के लिए दूसरा सबसे बड़ा ऑर्डर होगा.

पिछला ऑर्डर: कुछ साल पहले सेना ने 114 धनुष तोपों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से कई तोपें पहले ही सेना में शामिल की जा चुकी हैं.

वर्तमान स्थिति: अब तक 4 रेजिमेंटों में ये तोपें तैनात हो चुकी हैं और दो और रेजिमेंटों को जल्द ही ये तोपें मिल जाएंगी.

बोफोर्स का 'अपडेटेड' और स्वदेशी वर्जन

धनुष तोप का डिजाइन 1980 के दशक में खरीदी गई मशहूर बोफोर्स (Bofors) तोप पर आधारित है. हालांकि, इसे भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों (PSUs) ने अत्याधुनिक तकनीक के साथ अपग्रेड किया है.

क्षमता: यह 155 mm 45-कैलिबर की तोप है.

मारक क्षमता: इसमें 'बाई-मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम' (BMCS) फिट किया जा सकता है, जिससे इसकी रेंज यानी दूरी तक मार करने की क्षमता काफी बढ़ जाती है.

गोला-बारूद: यह 155mm का गोला दागती है, जो दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए काफी है.

पोखरण के मैदान में साबित किया लोहा

धनुष तोप ने सेना में शामिल होने से पहले कड़े परीक्षणों का सामना किया है. जून 2018 में राजस्थान के पोखरण में इस तोप ने अपने सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए थे. रेगिस्तान की भीषण गर्मी और दुर्गम इलाकों में भी इसने अपनी सटीकता और मजबूती को साबित किया है.

स्वदेशी तकनीक से क्यों बढ़ेगी ताकत?

धनुष तोपों के निर्माण से भारत को कई रणनीतिक फायदे होंगे:

किफायती: विदेशी तोपों के मुकाबले यह काफी सस्ती है.

आसान रखरखाव: भारत में ही निर्मित होने के कारण इसके स्पेयर पार्ट्स और सर्विसिंग के लिए हमें दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

रोजगार: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बड़ा ऑर्डर मिलने से रक्षा क्षेत्र में रोजगार और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा.

Conclusion

भारतीय सेना का 300 धनुष तोपों का यह ऑर्डर आर्टिलरी के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है. बोफोर्स की विरासत और आधुनिक भारतीय तकनीक के मेल से बनी यह तोप आने वाले समय में हिमालय की चोटियों से लेकर रेगिस्तान के मैदानों तक भारत की ढाल बनेगी.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- धनुष तोप को किसने विकसित किया है?

इसे भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) ने बोफोर्स की 'ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी' (ToT) के आधार पर स्वदेशी रूप से विकसित किया है.

2- एक धनुष तोप कितनी दूर तक गोला दाग सकती है?

BMCS सिस्टम के साथ इसकी रेंज करीब 38 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकती है.

3- कितनी धनुष तोपों का ऑर्डर दिया जा रहा है?

भारतीय सेना जल्द ही 300 अतिरिक्त धनुष तोपों का ऑर्डर देने वाली है.

4- क्या धनुष और बोफोर्स तोप एक ही हैं?

नहीं, धनुष का डिजाइन बोफोर्स पर आधारित है, लेकिन यह बोफोर्स (39-कैलिबर) की तुलना में अधिक उन्नत (45-कैलिबर) और स्वदेशी है.

5- ये 300 तोपें कितनी रेजिमेंटों में तैनात होंगी?

इन 300 तोपों से सेना की 15 आर्टिलरी रेजिमेंटों को लैस किया जाएगा.

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