India-US Trade Deal: ₹47 Lk Cr के अमेरिकी सामान खरीदेगा भारत? शुरू हुई 4 दिन की बड़ी बातचीत, क्या फाइनल होगी ट्रेड डील?

नई दिल्ली में चल रही यह बातचीत सिर्फ एक व्यापारिक बैठक नहीं है. यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य के आर्थिक रिश्तों की दिशा तय कर सकती है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों देश लंबित मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं और क्या अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम मंजूरी मिल पाती है.
India-US Trade Deal: ₹47 Lk Cr के अमेरिकी सामान खरीदेगा भारत? शुरू हुई 4 दिन की बड़ी बातचीत, क्या फाइनल होगी ट्रेड डील?

भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पन जैन कर रहे हैं. (फाइल फोटो)

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है. सोमवार से नई दिल्ली में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चार दिन की उच्चस्तरीय बातचीत शुरू हुई है. इस बैठक का मकसद उस अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को अंतिम रूप देना है, जिसके फ्रेमवर्क पर इसी साल फरवरी में सहमति बनी थी.

अगर यह समझौता तय हो जाता है तो आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं. इतना ही नहीं, भारत की तरफ से अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर यानी लगभग ₹47 लाख करोड़ के उत्पाद खरीदने की दिशा में भी रास्ता साफ हो सकता है.

कौन कर रहा है बातचीत की अगुवाई?

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं. वहीं भारतीय पक्ष की अगुवाई वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पन जैन कर रहे हैं.

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक यह बैठक सिर्फ एक अंतरिम समझौते तक सीमित नहीं है. इसके साथ ही दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं.

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

चार दिन की इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी.

इनमें शामिल हैं:

  • मार्केट एक्सेस
  • नॉन-टैरिफ बैरियर्स
  • कस्टम्स नियम
  • ट्रेड फैसिलिटेशन
  • निवेश को बढ़ावा
  • सप्लाई चेन सुरक्षा
  • आर्थिक सहयोग

दोनों देश चाहते हैं कि व्यापारिक बाधाएं कम हों और निवेश के नए अवसर पैदा हों.

फरवरी में बनी थी डील की नींव

भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण का फ्रेमवर्क तैयार किया था. उस समय दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले भारी टैरिफ को कम किया जाएगा.

फ्रेमवर्क के अनुसार अमेरिका भारत पर लागू कुछ टैरिफ दरों को 50% से घटाकर 18% तक लाने पर सहमत हुआ था. इसके अलावा रूसी तेल खरीदने को लेकर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी हटाने की दिशा में चर्चा हुई थी. लेकिन इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदल गया.

ट्रंप के फैसले ने बदल दिया पूरा समीकरण

20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ रेसिप्रोकल टैरिफ से जुड़े मामले में फैसला सुनाया.

इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10% समान टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इस फैसले ने वैश्विक व्यापार समीकरण बदल दिए और भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते की गणना भी प्रभावित हुई.

यही वजह रही कि फरवरी में प्रस्तावित आगे की वार्ता टालनी पड़ी. बाद में अप्रैल में भारतीय अधिकारियों ने वॉशिंगटन जाकर बातचीत की और अब अमेरिकी टीम नई दिल्ली पहुंची है.

भारत अमेरिका से क्या खरीदेगा?

सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रस्ताव की हो रही है जिसके तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर यानी करीब ₹47 लाख करोड़ के उत्पाद खरीदने की इच्छा जता चुका है.

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ऊर्जा क्षेत्र
  • LNG
  • कच्चा तेल
  • ऊर्जा से जुड़े अन्य उत्पाद
  • एविएशन सेक्टर
  • विमान
  • एयरक्राफ्ट पार्ट्स
  • एविएशन उपकरण
  • टेक्नोलॉजी
  • हाई-टेक मशीनरी
  • एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स
  • डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर उत्पाद
  • अन्य उत्पाद
  • कीमती धातुएं
  • कोकिंग कोल
  • औद्योगिक उपकरण

बदले में अमेरिका भारत से क्या चाहता है?

अमेरिका लंबे समय से भारतीय बाजार में अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए ज्यादा पहुंच चाहता रहा है.

फ्रेमवर्क के तहत भारत ने कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने या हटाने का प्रस्ताव दिया है.

इनमें शामिल हैं:

  • ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs)
  • पशु चारे के लिए रेड सोरघम (लाल ज्वार)
  • ट्री नट्स
  • ताजे और प्रोसेस्ड फल
  • सोयाबीन तेल
  • वाइन और स्पिरिट्स

इन उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिलने से अमेरिकी निर्यातकों को फायदा हो सकता है.

अंतरिम व्यापार समझौता आखिर होता क्या है?

बहुत से लोगों के मन में सवाल है कि अंतरिम व्यापार समझौता आखिर होता क्या है.

दरअसल किसी भी दो देशों के बीच पूर्ण मुक्त व्यापार समझौता (FTA) तैयार होने में कई साल लग सकते हैं. इसमें हजारों उत्पादों और सेवाओं पर विस्तृत बातचीत करनी पड़ती है.

ऐसे में दोनों देश पहले एक सीमित दायरे वाला अस्थायी समझौता करते हैं ताकि कुछ क्षेत्रों में तुरंत राहत और व्यापारिक फायदे मिल सकें.

इसी तरह के अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण समझौते को अंतरिम व्यापार समझौता कहा जाता है.

भारत को क्या फायदा हो सकता है?

अगर यह समझौता सफलतापूर्वक अंतिम रूप ले लेता है तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:

  • भारतीय निर्यात बढ़ सकता है
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिल सकता है
  • निवेश के नए अवसर बन सकते हैं
  • रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है
  • वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है

अगले चार दिन क्यों अहम हैं?

नई दिल्ली में चल रही यह बातचीत सिर्फ एक व्यापारिक बैठक नहीं है. यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य के आर्थिक रिश्तों की दिशा तय कर सकती है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों देश लंबित मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं और क्या अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम मंजूरी मिल पाती है. अगर ऐसा होता है तो यह 2026 की सबसे बड़ी वैश्विक व्यापारिक डील्स में से एक साबित हो सकती है.

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