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भारत और अमेरिका के बीच शुक्रवार को 7,995 करोड़ रुपए का एक बड़ा रक्षा समझौता (Defence Agreement) हुआ है. यह डील भारतीय नौसेना के एमएच-60आर मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों (MH-60R Multi-role Fleet) के रखरखाव और सपोर्ट सिस्टम (Maintenance Support System) को मजबूत करने के लिए की गई है. यह हेलीकॉप्टर आधुनिक तकनीक, एंटी-सबमरीन क्षमता (Anti-Submarine Warfare Capability) और समुद्री मिशनों में बेहतर प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं.
इस समझौते पर हस्ताक्षर अमेरिका के फॉरेन मिलिटरी सेल्स (Foreign Military Sales Program) के तहत किए गए. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर होने से यह साफ हो गया है कि भारत समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) के मोर्चे पर और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह पैकेज हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल उपलब्धता (Operational Availability) और विश्वसनीयता (Reliability) को अगले स्तर तक ले जाएगा.
डिफेंस मिनिस्ट्री ने बताया कि यह पैकेज एक व्यापक सपोर्ट सिस्टम प्रदान करेगा, जिसमें शामिल हैं:
समझौते के तहत देश में नई सुविधाएं स्थापित होंगी:
| सुविधा | उपयोग |
|---|---|
| इंटरमीडिएट लेवल रिपेयर सेंटर | पार्ट्स रिपेयर, डायग्नॉस्टिक |
| पीरियॉडिक मेंटेनेंस इंस्पेक्शन यूनिट | नियमित जांच |
| टेक्निकल सपोर्ट यूनिट | अमेरिकी विशेषज्ञों से प्रशिक्षण |
| सप्लाई चेन सपोर्ट | स्पेयर्स की लगातार उपलब्धता |
ये सभी सुविधाएं भारत को रक्षा क्षेत्र में लंबी अवधि की आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाएंगी.
MH-60R हेलीकॉप्टर दुनिया की सबसे उन्नत मल्टी-रोल मशीनों में से एक है. आइए जानते हैं इसके मुख्य फीचर्स-
इन क्षमताओं की वजह से इसे रोमियो हेलीकॉप्टर भी कहा जाता है.
रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि इस समझौते से भारतीय MSME सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. जानिए कैसे-
यह भारत के "Make in India Defence" मिशन को मजबूत करेगा.
भारत विशाल समुद्री सीमा रखता है. इसलिए MH-60R जैसे हेलीकॉप्टर बेहद जरूरी हैं. इससे कई फायदे होंगे-
यह समझौता भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. 7,995 करोड़ की यह डील न सिर्फ MH-60R हेलीकॉप्टरों की क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि भारत में रिपेयर सुविधाओं को स्थापित कर आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई देगी. इससे नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियां और मजबूत होंगी और MSME सेक्टर के लिए नए अवसर खुलेंगे. कुल मिलाकर यह समझौता भारत की समुद्री शक्ति को भविष्य के लिए सक्षम बनाने वाला फैसला है.
दो देशों के बीच सुरक्षा सहयोग से जुड़ी आधिकारिक डील.
ताकि मशीनें हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार रहें.
मशीन के बदले जाने वाले पुर्जे.
जहाज या उपकरण की जांच और मरम्मत की जगह.
देश की सुरक्षा से जुड़ी सभी नीतियां बनाना.
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