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भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा बैकअप प्लान तैयार किया है.
सूत्रों के मुताबिक, भारत अब करीब 40 देशों से कच्चे तेल और LNG के कंसाइनमेंट मंगाने की तैयारी कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई बाधित होती है तो भी देश में ऊर्जा की कमी न हो.
यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है.
सूची के मुताबिक जिन देशों से कच्चे तेल और LNG के कंसाइनमेंट की बात हो रही है, उनमें शामिल हैं:
अफ्रीका और मिडिल ईस्ट
मिडिल ईस्ट और खाड़ी देश
एशिया-पैसिफिक
अमेरिका महाद्वीप
इसके अलावा कुछ अन्य देशों को भी संभावित सप्लायर के तौर पर सूची में शामिल किया गया है.
अगर होर्मुज रूट प्रभावित होता है तो ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर सकती हैं.
संभावित शिपिंग रूट
1. केप ऑफ गुड होप रूट
अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर भारत तक.
2. स्वेज नहर रूट
यूरोप और अफ्रीका से लाल सागर के रास्ते भारत.
3. ट्रांस-पैसिफिक रूट
ऑस्ट्रेलिया और एशिया-पैसिफिक से LNG टैंकर.
4. अटलांटिक रूट
अमेरिका और लैटिन अमेरिका से भारत तक.
हालांकि इन रूट्स में दूरी ज्यादा होने से फ्रेट कॉस्ट और ट्रांजिट टाइम बढ़ सकता है.
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का अनुमान है कि:
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है.
इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकता है.
अगर 40 देशों से सप्लाई का यह प्लान सक्रिय होता है तो:
- ऊर्जा संकट का खतरा कम होगा
- तेल सप्लाई में विविधता आएगी
- कीमतों पर दबाव कम होगा
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी