होर्मुज रूट पर खतरा, भारत ने खोजा रास्ता दूसरा! प्लान-B में 40 देशों से कच्चा तेल-LNG मंगाने की तैयारी, किधर से आएगी सप्लाई?

सूत्रों के मुताबिक, भारत अब करीब 40 देशों से कच्चे तेल और LNG के कंसाइनमेंट मंगाने की तैयारी कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई बाधित होती है तो भी देश में ऊर्जा की कमी न हो.
होर्मुज रूट पर खतरा, भारत ने खोजा रास्ता दूसरा! प्लान-B में 40 देशों से कच्चा तेल-LNG मंगाने की तैयारी, किधर से आएगी सप्लाई?

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा बैकअप प्लान तैयार किया है.

सूत्रों के मुताबिक, भारत अब करीब 40 देशों से कच्चे तेल और LNG के कंसाइनमेंट मंगाने की तैयारी कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई बाधित होती है तो भी देश में ऊर्जा की कमी न हो.

यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है.

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किन 40 देशों से आ सकती है सप्लाई?

सूची के मुताबिक जिन देशों से कच्चे तेल और LNG के कंसाइनमेंट की बात हो रही है, उनमें शामिल हैं:

अफ्रीका और मिडिल ईस्ट

  • अल्जीरिया
  • अंगोला
  • कांगो (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक)
  • कांगो रिपब्लिक
  • इक्वेटोरियल गिनी
  • घाना
  • लीबिया
  • नाइजीरिया
  • सेनेगल
  • टोगो
  • मिस्र

मिडिल ईस्ट और खाड़ी देश

  • इराक
  • कुवैत
  • ओमान
  • कतर
  • सऊदी अरब
  • यूएई
  • इज़राइल

एशिया-पैसिफिक

  • ऑस्ट्रेलिया
  • ब्रुनेई
  • मलेशिया
  • दक्षिण कोरिया
  • यूरोप
  • बेल्जियम
  • ग्रीस
  • नीदरलैंड
  • नॉर्वे
  • यूके

अमेरिका महाद्वीप

  • अर्जेंटीना
  • ब्राजील
  • कनाडा
  • कोलंबिया
  • इक्वाडोर
  • मैक्सिको
  • पनामा
  • अमेरिका
  • वेनेजुएला

इसके अलावा कुछ अन्य देशों को भी संभावित सप्लायर के तौर पर सूची में शामिल किया गया है.

किस रास्ते भारत तक पहुंचेगा तेल?

अगर होर्मुज रूट प्रभावित होता है तो ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर सकती हैं.

संभावित शिपिंग रूट

1. केप ऑफ गुड होप रूट
अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर भारत तक.

2. स्वेज नहर रूट
यूरोप और अफ्रीका से लाल सागर के रास्ते भारत.

3. ट्रांस-पैसिफिक रूट
ऑस्ट्रेलिया और एशिया-पैसिफिक से LNG टैंकर.

4. अटलांटिक रूट
अमेरिका और लैटिन अमेरिका से भारत तक.

हालांकि इन रूट्स में दूरी ज्यादा होने से फ्रेट कॉस्ट और ट्रांजिट टाइम बढ़ सकता है.

कब तक स्थिर हो सकती है सप्लाई?

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का अनुमान है कि:

  • वैकल्पिक सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट 1-2 हफ्तों में सक्रिय हो सकते हैं
  • LNG टैंकरों को रूट बदलने में 10-15 दिन लग सकते हैं
  • तेल बाजार को स्थिर होने में 3-4 हफ्ते लग सकते हैं

क्यों अहम है होर्मुज?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है.

  • दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है
  • हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है
  • भारत, चीन, जापान जैसे बड़े आयातक इसी रूट पर निर्भर हैं

इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकता है.

भारत के लिए क्या फायदा होगा?

अगर 40 देशों से सप्लाई का यह प्लान सक्रिय होता है तो:

- ऊर्जा संकट का खतरा कम होगा
- तेल सप्लाई में विविधता आएगी
- कीमतों पर दबाव कम होगा
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

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