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भारत ने नेशनल क्वांटम मिशन के जरिए सुपर-पावर बनने की तैयारी कर ली है
भारत अब भविष्य की उस तकनीक पर कब्जा करने के लिए तैयार है, जो दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही है. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को ऐलान किया कि भारत अपने 'नेशनल क्वांटम मिशन' के साथ दुनिया के उन खास देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जो तकनीक के दम पर भविष्य बदलने वाले हैं.
आंध्र प्रदेश में 'अमरावती क्वांटम वैली' की नींव रखते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि क्वांटम टेक्नोलॉजी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक जरूरत बन चुकी है. रक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या फिर इलाज के नए तरीके, हर जगह अब भारत अपना लोहा मनवाएगा.
इस पूरे मिशन के लिए सरकार ने करीब 6,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है. यह कोई छोटा प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इसका जाल 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों तक फैला हुआ है. पूरे काम को व्यवस्थित रखने के लिए इसे चार 'थीमैटिक हब्स' में बांटा गया है:
भारत ने अपने लिए बहुत ही बड़े और स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं. डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, अगले आठ सालों के भीतर भारत 1,000 फिजिकल क्यूबिट्स की ताकत वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित कर लेगा. इसके अलावा, जमीन से जमीन पर चलने वाले सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क बनाए जाएंगे.
सबसे बड़ी उपलब्धि होगी 2,000 किलोमीटर लंबी 'क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन' (QKD) लाइन. यह शहरों के बीच ऐसी सुरक्षित कड़ी जोड़ देगी जिसे हैक करना नामुमकिन जैसा होगा. लंबी दूरी के क्वांटम कम्युनिकेशन के मामले में भी भारत आत्मनिर्भर बनने की राह पर है.
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क्वांटम टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा हमारे देश की सुरक्षा और सेहत को होगा. मंत्री ने जोर देकर कहा कि अगर भारत को अपनी डिफेंस आर्किटेक्चर (रक्षा ढांचा) और कम्युनिकेशन सिस्टम को सुरक्षित रखना है, तो उसे इस क्षेत्र में लीडर बनना ही होगा. हेल्थकेयर सेक्टर में इसके जरिए ऐसी इनोवेशन होंगी जो बीमारियों को पकड़ने और उनके इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल देंगी. यह ग्लोबल लेवल पर भारत की तकनीकी साख को एक नए मुकाम पर ले जाएगा.
अमरावती में हुए इस समारोह में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और आईटी मंत्री नारा लोकेश भी मौजूद थे. डॉ. सिंह ने नायडू के पुराने विजन को याद करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश की तरक्की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डबल इंजन' एप्रोच का सटीक उदाहरण है. केंद्र और राज्य के बीच का यह तालमेल ही विकास को रफ्तार दे रहा है.
उन्होंने विशाखापत्तनम के 'नेशनल सेंटर फॉर ओशन साइंसेज' प्रोजेक्ट का उदाहरण भी दिया. यह प्रोजेक्ट 2006 से अटका हुआ था, लेकिन जैसे ही वर्तमान राज्य सरकार ने कार्यभार संभाला, इसे कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया गया. यह दिखाता है कि जब सरकारें मिलकर काम करती हैं, तो दशकों पुराने काम भी चुटकियों में हो जाते हैं.
इस फाउंडेशन सेरेमनी में सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए. 'अमरावती क्वांटम वैली' का मकसद केवल रिसर्च करना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीक के मामले में दुनिया का सिरमौर बनाना है. यह वैली आने वाले समय में क्वांटम रिसर्च का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगी.