फिक्र न करें- नहीं होगी गैस की कमी; 4 देशों से खरीदी जा सकती है LPG Gas! सामने आए नाम, लेकिन 25 दिन में मिलेगा सिलेंडर

भारत भी अपनी LPG और ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है. ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ सकता है. इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.
फिक्र न करें- नहीं होगी गैस की कमी; 4 देशों से खरीदी जा सकती है LPG Gas! सामने आए नाम, लेकिन 25 दिन में मिलेगा सिलेंडर

खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी LPG आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत अब अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से LPG खरीदने के विकल्प तलाश रहा है. सूत्रों की मानें तो इन 4 देशों ने खुद सरकार को LPG बेचने की पेशकश की है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होती है तो भी देश में रसोई गैस की कमी न हो.

सरकार का साफ कहना है कि किसी भी स्थिति में घरेलू LPG उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी.

क्यों उठाने पड़े ये कदम?

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायरों में से है.

भारत भी अपनी LPG और ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है. ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ सकता है.

इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.

नए LPG सप्लायर की तलाश

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अब खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी LPG आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है.

इन देशों में प्रमुख हैं:

  • अल्जीरिया
  • ऑस्ट्रेलिया
  • कनाडा
  • नॉर्वे

ये सभी देश बड़े गैस उत्पादक हैं और जरूरत पड़ने पर भारत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बन सकते हैं. ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह रणनीति काफी अहम मानी जा रही है.

LPG बुकिंग नियम भी बदले

सरकार ने रसोई गैस की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए बुकिंग नियमों में भी बदलाव किया है. अब LPG सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ ऐसे मामले सामने आए थे जहां लोग पहले 55 दिन में सिलेंडर बुक करते थे, लेकिन अचानक 15-20 दिन में बुकिंग शुरू कर दी. इससे बाजार में आर्टिफिशियल डिमांड और जमाखोरी की आशंका बढ़ने लगी थी. इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.

  • रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश
  • सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे LPG उत्पादन बढ़ाएं.
  • इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि:
  • घरेलू LPG को प्राथमिकता दी जाए
  • कमर्शियल कनेक्शन की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत पहले पूरी की जाए

सरकार का कहना है कि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी.

Essential Commodity Act के तहत आदेश

गैस उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने Essential Commodity Act 1955 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया है.

यह कानून सरकार को कई अहम अधिकार देता है:

  • जरूरी वस्तुओं की सप्लाई नियंत्रित करना
  • जमाखोरी रोकना
  • कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश देना
  • एक्सपोर्ट को सीमित करना

ऊर्जा संकट या युद्ध जैसी स्थिति में यह कानून सरकार को घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की शक्ति देता है.

इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी सरकार ने इसी कानून का इस्तेमाल किया था. उस समय रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि घरेलू जरूरत पूरी किए बिना ईंधन का निर्यात न करें.

कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत?

भारत में LPG सिलेंडर की कीमत सीधे सरकार तय नहीं करती. इसकी बेस कीमत तेल कंपनियां तय करती हैं, लेकिन यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती है.

तेल कंपनियां हर महीने कई फैक्टर्स को देखकर नई कीमत तय करती हैं.

इनमें शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमत
  • डॉलर के मुकाबले रुपये का एक्सचेंज रेट
  • शिपिंग और फ्रेट लागत
  • ट्रांसपोर्टेशन खर्च
  • डीलर कमीशन
  • राज्य और केंद्र के टैक्स

इन सभी को जोड़कर LPG की फाइनल रिटेल कीमत तय होती है.

अगर सिलेंडर पर सरकारी सब्सिडी लागू होती है, तो सरकार कीमत का एक हिस्सा सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है. जबकि नॉन-सब्सिडी सिलेंडर की पूरी कीमत उपभोक्ता को ही चुकानी पड़ती है.

क्यों बढ़ रही है ऊर्जा सुरक्षा की चिंता?

  • विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार अब तेजी से भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित हो रहा है.
  • मिडिल ईस्ट में तनाव, समुद्री मार्गों पर खतरा और सप्लाई चेन में बाधा जैसे कारक ऊर्जा बाजार को अस्थिर बना सकते हैं.
  • ऐसी स्थिति में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए वैकल्पिक सप्लाई स्रोत ढूंढना बेहद जरूरी हो जाता है.

सरकार का फोकस: घरेलू उपभोक्ता पहले

सरकार का कहना है कि ऊर्जा संकट जैसी स्थिति में भी घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी.

इसके लिए सरकार:

  • LPG उत्पादन बढ़ा रही है
  • नए सप्लायर तलाश रही है
  • बुकिंग नियम सख्त कर रही है
  • जमाखोरी रोकने के कदम उठा रही है

सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन उपायों का मकसद साफ है- देश में रसोई गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रखना.

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