&format=webp&quality=medium)
खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी LPG आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत अब अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से LPG खरीदने के विकल्प तलाश रहा है. सूत्रों की मानें तो इन 4 देशों ने खुद सरकार को LPG बेचने की पेशकश की है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होती है तो भी देश में रसोई गैस की कमी न हो.
सरकार का साफ कहना है कि किसी भी स्थिति में घरेलू LPG उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायरों में से है.
भारत भी अपनी LPG और ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है. ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ सकता है.
इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अब खाड़ी क्षेत्र के अलावा अन्य देशों से भी LPG आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
इन देशों में प्रमुख हैं:
ये सभी देश बड़े गैस उत्पादक हैं और जरूरत पड़ने पर भारत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बन सकते हैं. ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह रणनीति काफी अहम मानी जा रही है.
सरकार ने रसोई गैस की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए बुकिंग नियमों में भी बदलाव किया है. अब LPG सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ ऐसे मामले सामने आए थे जहां लोग पहले 55 दिन में सिलेंडर बुक करते थे, लेकिन अचानक 15-20 दिन में बुकिंग शुरू कर दी. इससे बाजार में आर्टिफिशियल डिमांड और जमाखोरी की आशंका बढ़ने लगी थी. इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.
सरकार का कहना है कि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी.
ये भी जरूर पढ़ें: ईरान-इजरायल वॉर के बीच गैस सिलेंडर बुकिंग के बदल गए नियम! मोदी सरकार का बड़ा फैसला
गैस उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने Essential Commodity Act 1955 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया है.
यह कानून सरकार को कई अहम अधिकार देता है:
ऊर्जा संकट या युद्ध जैसी स्थिति में यह कानून सरकार को घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की शक्ति देता है.
इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी सरकार ने इसी कानून का इस्तेमाल किया था. उस समय रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि घरेलू जरूरत पूरी किए बिना ईंधन का निर्यात न करें.
ये भी जरूर पढ़ें: LPG Cylinder Price: महंगा हुआ 14.2Kg वाला रसोई गैस सिलेंडर, रात जब आप सो रहे थे सरकार ने बढ़ा दिए दाम- आज से लागू
भारत में LPG सिलेंडर की कीमत सीधे सरकार तय नहीं करती. इसकी बेस कीमत तेल कंपनियां तय करती हैं, लेकिन यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती है.
तेल कंपनियां हर महीने कई फैक्टर्स को देखकर नई कीमत तय करती हैं.
इनमें शामिल हैं:
इन सभी को जोड़कर LPG की फाइनल रिटेल कीमत तय होती है.
अगर सिलेंडर पर सरकारी सब्सिडी लागू होती है, तो सरकार कीमत का एक हिस्सा सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है. जबकि नॉन-सब्सिडी सिलेंडर की पूरी कीमत उपभोक्ता को ही चुकानी पड़ती है.
सरकार का कहना है कि ऊर्जा संकट जैसी स्थिति में भी घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी.
इसके लिए सरकार:
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन उपायों का मकसद साफ है- देश में रसोई गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रखना.