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IMG की बैठक के बाद सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि पेट्रोलियम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. साथ ही नए ऑल्टरनेट सोर्स और रूट्स पर भी चर्चा जारी है. इतना ही नहीं, IEA, OPEC से भी चर्चा हो रही है. मौजूदा हालात में LPG, LNG, क्रूड खरीद के साथ जहाजों के सुरक्षित ट्रांजिट को लेकर भी देशों से बातचीत की जा रही है.
बैठक में हुई चर्चा के अनुसार भारत ऊर्जा सुरक्षा के मामले में अभी आरामदायक स्थिति में है. क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (पेट्रोल, डीजल आदि) का कुल स्टॉक 50 दिनों का है (क्रूड के 25 दिन + प्रोडक्ट्स के 25 दिन). यह स्टॉक प्रतिदिन अपडेट हो रहा है और कोई तत्काल कमी नहीं नहीं.
भारत IEA और OPEC के साथ वैकल्पिक सप्लाई के लिए बातचीत कर रहा है. सभी सप्लायर्स और ट्रेडिंग एंटिटीज़ के साथ निरंतर बातचीत जारी है, ताकि सप्लाई चेन मजबूत रहे. सरकार अमेरिकी सरकार के इंश्योरेंस प्रपोजल (टैंकर इंश्योरेंस/शिपिंग रिस्क कवर) को समझने की कोशिश कर रही है, खासकर गल्फ क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए.
Petronet LNG ने 3 मार्च 2026 को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है. यह नोटिस QatarEnergy (उनके सप्लायर) और लोकल बायर्स जैसे GAIL (India), Indian Oil Corp (IOCL), और Bharat Petroleum (BPCL) को दिया गया. QatarEnergy ने भी Petronet को पोटेंशियल फोर्स मेजर का नोटिस दिया है और अब फॉर्मली LNG डिलीवरी पर फोर्स मेजर घोषित किया है.
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी गैस का ऑफर भारत को दिया है. UAE और US से भी हाल ही में नया कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ है. देश में LPG और LNG की कोई कमी नहीं. पूरे ग्लोबल गैस का 20 फीसदी सिर्फ कतर हैंडल करता है. भारत अन्य सप्लायर्स के साथ भी बातचीत कर रहा है. भारत अभी 195 MMSCMD गैस इंपोर्ट करता है, जिसमें से सिर्फ 60 MMSCMD गैस कतर से सप्लाई होती है.
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा सप्लाई को किसी एक देश तक सीमित न रखकर बहुत समझदारी का काम किया है. यही वजह है कि कतर जैसे बड़े सप्लायर के 'फोर्स मेजर' घोषित करने के बावजूद भारत के पास ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे मजबूत विकल्प तैयार हैं. 50 दिनों का बैकअप स्टॉक हमें किसी भी अचानक आने वाली समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त समय देता है.
1- क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी होने वाली है?
नहीं, भारत के पास 50 दिनों का पर्याप्त स्टॉक (क्रूड + प्रोडक्ट्स) मौजूद है और सप्लाई चेन को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है.
2- कतर के 'फोर्स मेजर' का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि युद्ध की वजह से कतर की कंपनियां फिलहाल कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक गैस सप्लाई करने में असमर्थ हैं.
3- कतर के अलावा भारत को अब कौन गैस सप्लाई करेगा?
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने गैस का ऑफर दिया है. इसके अलावा यूएई और अमेरिका के साथ भी भारत के नए कॉन्ट्रैक्ट हैं.
4- भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए कतर पर कितना निर्भर है?
भारत की कुल 195 MMSCMD गैस खपत में से कतर केवल 60 MMSCMD सप्लाई करता है, जो कुल इम्पोर्ट का लगभग एक तिहाई है.
5- जहाजों की सुरक्षा के लिए सरकार क्या कर रही है?
सरकार जहाजों के सुरक्षित ट्रांजिट के लिए दूसरे देशों से बात कर रही है और अमेरिका के 'शिपिंग रिस्क कवर' (बीमा) प्रपोजल पर विचार कर रही है.
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