IBC ने बदला Credit Culture; NPA घटे और कंपनियों को बचाने में मिली सफलता, 2047 के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार: जस्टिस राजेश बिंदल

अपने संबोधन के अंत में जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि IBC ने पिछले 10 वर्षों में भारत की आर्थिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और समाधान-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भी यह कानून भारत की वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में अहम योगदान देता रहेगा.
IBC ने बदला Credit Culture; NPA घटे और कंपनियों को बचाने में मिली सफलता, 2047 के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार: जस्टिस राजेश बिंदल

जस्टिस बिंदल ने कहा कि IBC की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने केवल परिसमापन के बजाय Resolution को प्राथमिकता दी. (फोटो: Zeebiz)

नई दिल्ली में आयोजित "IBC & NCLT @10 – Celebrating a Decade of Insolvency Reforms" कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) ने पिछले 10 वर्षों में भारत की दिवाला व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इस कानून ने एक बिखरे हुए और अप्रभावी सिस्टम की जगह समाधान-आधारित ढांचा तैयार किया, जिसका मुख्य उद्देश्य कारोबार को बचाना और आर्थिक मूल्य को संरक्षित रखना है.

उन्होंने कहा कि IBC लागू होने से पहले दिवाला और कर्ज समाधान की प्रक्रिया कई मंचों और कानूनों में बंटी हुई थी, जिससे मामलों के निपटारे में काफी समय लगता था. लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और अब समाधान पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

Resolution पर बढ़ा फोकस

जस्टिस बिंदल ने कहा कि IBC की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने केवल परिसमापन (Liquidation) के बजाय Resolution को प्राथमिकता दी है.

उनके मुताबिक किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि संकटग्रस्त कंपनियों को दोबारा खड़ा किया जाए, बजाय इसके कि उन्हें बंद होने दिया जाए. इसी सोच ने IBC को पुराने सिस्टम से अलग बनाया.

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियों को नया जीवन मिला है, जो कभी गंभीर वित्तीय संकट में थीं.

NPA कम करने में मिली मदद

जस्टिस बिंदल ने कहा कि IBC ने बैंकिंग प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव डाला है. इसके जरिए न केवल रिकवरी के परिणाम बेहतर हुए हैं, बल्कि Non-Performing Assets (NPA) की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिली है.

उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों को यह भरोसा मिला कि डिफॉल्ट की स्थिति में उनके पास एक स्पष्ट और समयबद्ध समाधान तंत्र मौजूद है. इससे पूरे वित्तीय तंत्र में भरोसा मजबूत हुआ है.

Credit Discipline हुआ मजबूत

उन्होंने कहा कि IBC के लागू होने के बाद Credit Discipline में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है.

कर्जदारों और कंपनियों को अब यह स्पष्ट संदेश मिला है कि वित्तीय दायित्वों को नजरअंदाज करना आसान नहीं है. इसी वजह से कर्ज चुकाने और समय पर समाधान निकालने की प्रवृत्ति बढ़ी है.

जस्टिस बिंदल ने कहा कि किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए स्वस्थ Credit Culture बेहद जरूरी होती है और IBC ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

सभी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास का परिणाम

उन्होंने कहा कि IBC की सफलता किसी एक संस्था या संगठन की उपलब्धि नहीं है. इसके पीछे न्यायपालिका, नियामक संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों, दिवाला पेशेवरों, उद्योग जगत और सरकार के सामूहिक प्रयास हैं. सभी हितधारकों ने मिलकर पिछले 10 वर्षों में इस ढांचे को मजबूत बनाने का काम किया है.

विकसित भारत 2047 के लिए मजबूत Insolvency System जरूरी

जस्टिस बिंदल ने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना है, तो Insolvency Ecosystem को और मजबूत करना होगा. उन्होंने संस्थागत क्षमता बढ़ाने, तकनीक के अधिक उपयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार और समयबद्ध समाधान व्यवस्था पर विशेष जोर दिया. उनके मुताबिक वित्तीय संकट की शुरुआती पहचान और समय रहते समाधान की व्यवस्था भविष्य में और महत्वपूर्ण होती जाएगी.

डेटा और तकनीक की भूमिका बढ़ेगी

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में डेटा आधारित निर्णय, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय Insolvency Framework को और प्रभावी बनाएंगे.

जस्टिस बिंदल के अनुसार, वित्तीय संकट का समाधान जितना जल्दी होगा, अर्थव्यवस्था पर उसका नकारात्मक असर उतना ही कम होगा. इसलिए भविष्य में तकनीक और डेटा का इस्तेमाल बढ़ाना आवश्यक है.

अगले दशक से बड़ी उम्मीदें

अपने संबोधन के अंत में जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि IBC ने पिछले 10 वर्षों में भारत की आर्थिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और समाधान-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भी यह कानून भारत की वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में अहम योगदान देता रहेगा.

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