रामगंगा के तट पर पीतल को तराशते हाथों ने आज पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना ने मुरादाबाद के सदियों पुराने शिल्प को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां कभी आम कारीगर जाने का सपना देखता था. आज यह शहर न केवल 32,725 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के साथ प्रदेश की आर्थिक रीढ़ बन चुका है, बल्कि 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर वैश्विक बाज़ार पर राज कर रहा है.
मुरादाबाद से हैदराबाद तक बजा चिरंजीलाल की नक्काशी का डंका
इस बदलाव की सबसे प्रेरक मिसाल हैं 74 वर्षीय चिरंजीलाल यादव. जिन्होंने 55 वर्षों तक पीतल पर की जाने वाली कारीगरी को जिंदा रखा. एक दौर था जब उन्हें समाज में 'मामूली कारीगर' कहकर हीन भावना से देखा जाता था और वह ठेकेदारों के रहमो करम पर थे.
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6.58 लाख घरों का जल रहा चूल्हा
- योगी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना ने आज 6.58 लाख से अधिक लोगों के घर का चूल्हा इस गौरवशाली कला से जला दिया.
- जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के सहयोग से चिरंजीलाल आज एक सम्मानित ब्रांड बन चुके हैं. उनके उत्पादों को जीआई टैग मिला, जिससे महीने में बिकने वाले 10-12 उत्पाद अब 30 के पार पहुंच गए हैं.
- मुरादाबाद से लेकर नोएडा, दिल्ली और हैदराबाद की प्रदर्शनियों तक उनकी नक्काशी का डंका बज रहा है. स्टेट व नेशनल अवॉर्ड के साथ-साथ चिरंजीलाल जी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है.
- चिरंजीलाल आज 40 कारीगरों को रोजगार दे रहे हैं और 400 लोगों को प्रशिक्षित कर चुके हैं. चिरंजीलाल का अब एक ही लक्ष्य है- युवाओं की झिझक दूर करना.
- चिरंजीलाल कहते हैं कि विश्वकर्मा योजना के तहत मिल रहे 5 लाख तक के लोन, टूलकिट और मार्केटिंग के सहारे युवा इस कला को अपनाकर स्वावलंबी बन सकते हैं.
जब पीएम ने जर्मन चांसलर को सौंपा दिलशाद का 'जादुई मटका'
मुरादाबाद के शिल्प की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 में जर्मनी दौरे के दौरान वहां के चांसलर को जो नक्काशीदार मटका भेंट किया था, उसे पद्मश्री दिलशाद हुसैन ने ही तैयार किया था.
ब्रांडिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग
- दिलशाद बताते हैं कि ODOP योजना से जुड़ने से पहले वे महज एक कारीगर थे, लेकिन योजना के तहत मिली ब्रांडिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग ने उनकी दुनिया बदल दी.
- पहले जहां उनके मटके महीने में बामुश्किल 3-4 बिकते थे, आज मांग 30-40 तक पहुंच गई है. उनकी आमदनी में 3 गुना इजाफा हुआ है और वे दिल्ली, आगरा, लखनऊ से लेकर विदेशों में भी अपना डंका बजा रहे हैं.
- दिलशाद अब खुद 500 कारीगरों को रोजगार दे रहे हैं और 700 से अधिक युवाओं को इस कला में प्रशिक्षित कर चुके हैं.
आंकड़ों में मुरादाबाद की औद्योगिक क्रांति
मुरादाबाद का औद्योगिक ढांचा आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है. जिले में कुल 94,267 MSME इकाइयां पूरी ऊर्जा के साथ संचालित हो रही हैं. यह उद्योग 6,58,893 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है.
10 हजार करोड़ के पार पहुंचा निर्यात
- सरकार के प्रयासों से यहां का निर्यात अब 10 हजार करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि मुरादाबाद का उत्पाद गुणवत्ता में दुनिया के किसी भी देश से कम नहीं है.
- जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से उद्यमियों को टूलकिट, आधुनिक डिजाइनिंग की ट्रेनिंग और 'निवेश मित्र' पोर्टल जैसी सुविधाओं ने व्यापार करना बेहद सरल बना दिया है.
मास्टर प्लान वर्ष 2031 और भविष्य का ग्लोबल हब
मुरादाबाद अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक 'वाइब्रेंट इकोनॉमिक हब' बनने की ओर अग्रसर है. मास्टर प्लान 2031 के तहत यहां हस्तशिल्प ग्राम और मेगा MSME पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
छोटे कारीगरों की राह हुई आसान
- ओडीओपी-सीएफसी (साझा सुविधा केंद्र) योजना ने छोटे कारीगरों की राह आसान कर दी है, जिससे उन्हें महंगे उपकरणों के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ता.
- साथ ही, ZED)प्रमाणीकरण और हॉलमार्किंग जैसी सुविधाओं ने विदेशी खरीदारों का भरोसा जीता है. सरकार का लक्ष्य अब अमेरिका पर निर्भरता कम कर यूरोप और एशियाई देशों में 'मुरादाबाद मेटल क्राफ्ट' की सीधी पैठ बनाना है.
कारीगरों के लिए सुरक्षा और सम्मान का नया दौर
चिरंजीलाल यादव व दिलशाद हुसैन जैसे अनुभवी उद्यमियों के सहयोग से प्रशासन ने कारीगरों के कल्याण के लिए भी बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत 50 वर्ष से अधिक उम्र के अनुभवी शिल्पकारों को जोड़ा जा रहा है. गणतंत्र दिवस पर आयोजित उदीषा महोत्सव जैसे आयोजनों में शिल्पकारों को अपने स्टॉल लगाने के लिए मंच दिया जा रहा है, जिससे उनकी सीधी मुलाकात बड़े खरीदारों से हो रही है. कौशल विकास स्कीम के तहत हर वर्ष हजारों नए युवाओं को पीतल कला से जोड़कर इस विरासत को सुरक्षित किया जा रहा है.
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