8,000 करोड़ के लॉस में है ये राज्य! मंत्रियों-विधायकों और पुलिस अधिकारियों तक की सैलरी पर लटकी तलवार

हिमाचल प्रदेश सरकार को 8000 करोड़ का बड़ा वित्तीय घाटा हुआ है. सीएम सुक्खू ने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में 6 महीने के लिए कटौती का ऐलान किया है. जानें क्या है पूरा मामला.
8,000 करोड़ के लॉस में है ये राज्य! मंत्रियों-विधायकों और पुलिस अधिकारियों तक की सैलरी पर लटकी तलवार

हिमाचल प्रदेश इस वक्त एक ऐसे आर्थिक भंवर में फंस गया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. राज्य सरकार पर 8000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम घाटे का साया मंडरा रहा है. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सामने आकर कड़े फैसले लेने पड़े हैं. शनिवार को साल 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अब वक्त हाथ पर हाथ धरकर बैठने का नहीं, बल्कि कड़े कदम उठाने का है.

इसका सबसे बड़ा असर राज्य के रसूखदार लोगों की जेब पर पड़ने वाला है. अगले छह महीनों तक मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में बड़ी कटौती होने जा रही है. मुख्यमंत्री ने खुद मिसाल पेश करते हुए अपनी आधी सैलरी छोड़ने का ऐलान किया है.

क्यों खाली हो गया प्रदेश का खजाना

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हिमाचल की माली हालत बिगड़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार का एक फैसला बताया जा रहा है. 1 अप्रैल से केंद्र ने 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (RDG) देना बंद कर दिया है. साल 1952 के बाद यह पहली बार है जब हिमाचल प्रदेश को इस केंद्रीय सहायता के बिना अपना काम चलाना पड़ेगा.

मुख्यमंत्री सुक्खू के मुताबिक, सिर्फ इस एक ग्रांट के रुकने से राज्य को हर साल 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सीधा नुकसान होगा. इसके अलावा जीएसटी रेशनलाइजेशन की वजह से भी करीब 25,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया गया है.

मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस कप्तान तक सबकी सैलरी में कटौती

जब खजाना खाली होने लगा, तो मुख्यमंत्री ने सबसे पहले 'अपनों' पर ही कैंची चलाई. उन्होंने ऐलान किया है कि अगले छह महीनों तक खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखा जाएगा. कटौती का गणित कुछ इस तरह है-

  • मुख्यमंत्री: अपनी सैलरी में 50% की भारी कटौती करेंगे.
  • मंत्री: कैबिनेट मंत्रियों की सैलरी में 30% की कमी की जाएगी.
  • विधायक: सभी विधायकों की 20% सैलरी छह महीने के लिए टाल दी गई है.
  • बड़े अफसर: मुख्य सचिव, डीजीपी और सचिव स्तर के अधिकारियों की सैलरी भी 30% रोकी जाएगी.
  • पुलिस विभाग: एडीजीपी से लेकर डीआईजी तक 30% और एसपी स्तर के अफसरों की 20% सैलरी रोकी जाएगी.

वहीं, कर्मचारियों के मिलने वाले 3% सैलरी इंक्रीमेंट को भी छह महीने के लिए टाल दिया गया है. हालांकि, ग्रुप-डी के कर्मचारियों को इस दौरान बढ़ोतरी नहीं मिलेगी.

सिर्फ छह महीने का मांगा है साथ

मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ किया कि वह यह सब चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के लिए कर रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के हर वर्ग से छह महीने का सहयोग मांगा है. सुक्खू ने भरोसा दिलाया कि जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, रोकी गई सैलरी और बकाया राशि लोगों को वापस कर दी जाएगी. उनका कहना है कि हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक कड़वा लेकिन जरूरी घूंट है. सरकार अब लोकलुभावन वादों के बजाय वित्तीय स्थिरता पर ध्यान देगी.

केंद्र पर लगाया अनदेखी का आरोप

मुख्यमंत्री ने इस संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि हिमाचल को 'ग्रीन बोनस' मिलना चाहिए था, लेकिन इसके उलट जो मदद मिल रही थी, उसे भी छीन लिया गया. इसके अलावा बीबीएमबी और जीएसटी मुआवजे के रूप में लगभग 7000 करोड़ रुपये के बकाया का मुद्दा भी उठाया गया है. राज्य पर बढ़ता कर्ज का बोझ और केंद्रीय मदद में कटौती ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

FAQs

Q1: हिमाचल प्रदेश सरकार को कितने करोड़ का घाटा हो रहा है?
A1: केंद्र सरकार द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद किए जाने के कारण राज्य को सालाना 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है.

Q2: मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सैलरी में कितनी कटौती की गई है?
A2: मुख्यमंत्री की सैलरी में 50%, मंत्रियों की सैलरी में 30% और विधायकों की सैलरी में 20% की कटौती (छह महीने के लिए टालना) की गई है.

Q3: बड़े अधिकारियों और पुलिस विभाग पर इस फैसले का क्या असर होगा?
A3: मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों की सैलरी 30% और एसपी स्तर के अधिकारियों की 20% सैलरी छह महीने के लिए टाल दी गई है.

Q4: क्या कर्मचारियों के इंक्रीमेंट पर भी रोक लगाई गई है?
A4: हां, कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित 3% सैलरी इंक्रीमेंट को छह महीने के लिए टाल दिया गया है.

Q5: क्या यह सैलरी कटौती हमेशा के लिए है?
A5: नहीं, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह केवल छह महीने के लिए एक अस्थाई व्यवस्था है और स्थिति सुधरते ही यह पैसा वापस कर दिया जाएगा.

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