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IMD के मुताबिक केरलम पहुंचने के बाद मॉनसून को उत्तर भारत तक पहुंचने में 4-6 हफ्ते लग सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो/AI)
मई अभी खत्म नहीं हुआ... लेकिन गर्मी जून जैसा कहर बरपा रही है. अगर आपको लग रहा है कि इस बार मई कुछ ज्यादा ही तप रहा है, तो यह सिर्फ एहसास नहीं, हकीकत है. भारत इस समय दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हो चुका है. धरती के 50 सबसे गर्म शहरों में ज्यादातर भारत के हैं.
उत्तर प्रदेश का बांदा 47.6°C, मध्य प्रदेश का खजुराहो 47.4°C और महाराष्ट्र का वर्धा 47.1°C तक पहुंच चुका है. दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, यूपी, एमपी और गुजरात लगातार Heatwave की चपेट में हैं.
अब सबसे बड़ा डर यह है:
“अगर मई इतना खौल रहा है, तो जून में क्या होगा?” और इसी सवाल के साथ लोग यह भी जानना चाहते हैं:
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पिछले कुछ दिनों में:
भीषण गर्मी की चपेट में रहे हैं.
कई इलाकों में तापमान:
42°C से 47°C के बीच पहुंच चुका है.
IMD के मुताबिक, अगर किसी इलाके का तापमान सामान्य से 4.5°C ज्यादा हो तो Heatwave मानी जाती है और अगर तापमान सामान्य से 6.4°C ज्यादा पहुंच जाए तो उसे Severe Heatwave कहा जाता है. यानी सिर्फ 45°C पहुंचना जरूरी नहीं. कई बार सामान्य से बहुत ज्यादा deviation भी Heatwave बना देता है.
भारत के सबसे गर्म शहर
| शहर | तापमान |
| बांदा (UP) | 47.6°C |
| खजुराहो (MP) | 47.4°C |
| वर्धा (Maharashtra) | 47.1°C |
| दिल्ली के कई हिस्से | 45°C+ |
| राजस्थान के इलाके | 46°C के आसपास |

यही सबसे बड़ा सवाल है.
इस बार गर्मी सिर्फ “सामान्य मई” वाली गर्मी नहीं है. मौसम वैज्ञानिक इसके पीछे कई बड़े कारण बता रहे हैं.
वजह नंबर-1: अप्रैल की बारिश ने बाद में गर्मी बढ़ा दी
अप्रैल की शुरुआत में कई राज्यों में:
देखने को मिली थीं.
इसके पीछे था: Western Disturbance
यह भूमध्यसागर की तरफ से आने वाला मौसम सिस्टम होता है, जो उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करता है. लेकिन इसके बाद मौसम तेजी से पलटा.
वजह नंबर-2: Jet Stream ने गर्म हवा को ‘फंसा’ दिया
ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं को Jet Stream कहा जाता है.
इस बार:
इसके बाद जमीन के ऊपर High Pressure Zone बन गया. इससे गर्म हवा ऊपर नहीं जा पाई और धरती लगातार तपती चली गई. इसी process को वैज्ञानिक “Subsidence” कहते हैं.
वजह नंबर-3: Heat Dome ने गर्मी को ‘कैद’ कर लिया
यह इस साल की सबसे बड़ी मौसम कहानी बनती जा रही है.
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यह जमीन से करीब 5 किमी ऊपर बनने वाला High Pressure सिस्टम होता है, जो किसी ढक्कन की तरह काम करता है.
यानी:
एक बार Heat Dome बन जाए, तो वह हफ्तों तक बना रह सकता है.
Heat Dome कैसे काम करता है?
| सामान्य स्थिति | Heat Dome की स्थिति |
| गर्म हवा ऊपर उठती है | गर्म हवा नीचे फंस जाती है |
| बादल बनते हैं | आसमान साफ रहता है |
| बारिश की संभावना | बारिश रुक जाती है |
| गर्मी निकलती रहती है | गर्मी जमा होती जाती है |

फिलहाल यही सबसे बड़ा मौसम अपडेट है.
पहले उम्मीद थी कि मॉनसून 26 मई तक केरलम पहुंच सकता है. लेकिन IMD ने साफ किया है कि 26 मई को मॉनसून केरल में officially enter नहीं करेगा. हालांकि, हल्की बारिश जारी रह सकती है
मॉनसून सिर्फ बारिश से तय नहीं होता. इसके लिए जरूरी हैं:
इस बार अरब सागर में हवाएं पूरी तरह स्टेबल नहीं हैं. मॉनसूनी cloud band पूरी तरह organize नहीं हुआ. इसलिए IMD अभी official onset घोषित नहीं कर रहा.
IMD के मुताबिक:
में Heatwave अगले कई दिन जारी रह सकती है.
पूर्वोत्तर भारत
में भारी बारिश का अलर्ट है.
दक्षिण भारत
में Pre-Monsoon Activity बढ़ सकती है.
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यही करोड़ों लोगों का सवाल है. IMD के मुताबिक केरलम पहुंचने के बाद मॉनसून को उत्तर भारत तक पहुंचने में 4-6 हफ्ते लग सकते हैं. यानी दिल्ली, यूपी, राजस्थान और एमपी को जून के चौथे हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है.
फिलहाल मौसम एजेंसियां El Nino की आशंका पर नजर रख रही हैं. El Nino वह स्थिति है जब प्रशांत महासागर का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है. वैश्विक मौसम पैटर्न बदल जाते हैं और भारतीय मॉनसून कमजोर पड़ सकता है.
NOAA के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 के बीच El Nino बनने की संभावना 70% से ज्यादा है. अगर स्थिति और मजबूत हुई, तो “Super El Nino” जैसे हालात बन सकते हैं.
2015-16 में:
इसीलिए इस बार वैज्ञानिक ज्यादा सतर्क हैं.
अगर आप उत्तर भारत में हैं तो अगले 2-3 हफ्ते बेहद मुश्किल हो सकते हैं. Heatstroke और dehydration का खतरा बढ़ेगा. अगर आप किसान हैं तो मॉनसून टाइमिंग पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा. खरीफ प्लानिंग प्रभावित हो सकती है. अगर आप शहर में रहते हैं तो बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती है. पानी का संकट बढ़ सकता है.
इस समय सबसे बड़ी चिंता यही है कि “Heatwave लंबी खिंचती दिख रही है, जबकि मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है.” यानी गर्मी ज्यादा, राहत देर से और ऊपर से कमजोर बारिश का खतरा. इन तीनों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है.
मई 2026 सिर्फ एक गर्म महीना नहीं, बल्कि क्लाइमेट प्रेशर की बड़ी चेतावनी बनता दिख रहा है. Heatwave, Heat Dome, delayed monsoon और El Nino जैसे फैक्टर्स मिलकर इस बार मौसम को बेहद असामान्य बना रहे हैं. अब पूरे देश की नजर सिर्फ एक चीज पर है आखिर मॉनसून कब रफ्तार पकड़ेगा और इस तपती धरती को राहत कब मिलेगी?