Middle East Crisis: एनर्जी सप्लाई के लिए सरकार क्या कदम उठा रही, केंद्रीय मंत्री ने संसद में दी जानकारी

सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं और फिलहाल देश में किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं है. मंत्री ने बताया कि सरकार की ओर से कौन-से कदम उठाए जा रहे हैं.
Middle East Crisis: एनर्जी सप्लाई के लिए सरकार क्या कदम उठा रही, केंद्रीय मंत्री ने संसद में दी जानकारी

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत की एनर्जी सप्लाई को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल, गैस और LPG की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है.

सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं और फिलहाल देश में किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं है. मंत्री ने बताया कि सरकार की ओर से कौन-से कदम उठाए जा रहे हैं.

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हॉर्मुज स्ट्रेट संकट का असर

मंत्री ने बताया कि करीब 13 दिन पहले ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट का रास्ता बाधित हो गया था. यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20% कच्चा तेल, 20% प्राकृतिक गैस और 20% LPG की सप्लाई होती है.

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि इस मार्ग पर व्यावसायिक जहाजरानी लगभग बंद हो गई. भारत इस संघर्ष का हिस्सा नहीं है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों का असर हर देश की तरह भारत पर भी पड़ता है.

कच्चे तेल की सप्लाई सुरक्षित

सरकार के मुताबिक भारत ने समय रहते अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाया है. पहले भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 45% हिस्सा हॉर्मुज मार्ग से आता था. अब वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाकर लगभग 70% तक कर दी गई है, जो संकट से पहले करीब 55% थी.

आज भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 2006-07 में यह संख्या सिर्फ 27 थी. यह रणनीतिक विविधीकरण भारत को ऐसे संकटों में भी विकल्प देता है. देश की रिफाइनरियां फिलहाल उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कई मामलों में 100% से भी ज्यादा क्षमता पर उत्पादन हो रहा है.

पेट्रोल-डीजल और ATF की कोई कमी नहीं

सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और फ्यूल ऑयल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है. देशभर के पेट्रोल पंपों और रिटेल आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के चल रही है.

इसके अलावा राज्यों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन भी दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध रहे.

प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर

प्राकृतिक गैस की सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया गया है. भारत रोजाना लगभग 90 MMSCMD प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन करता है.

पहले खाड़ी देशों से करीब 30 MMSCMD अतिरिक्त गैस आयात होती थी, जो अब प्रभावित हुई है. इसके बाद सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश लागू किया है.

इस व्यवस्था के तहत:

  • घरों में पाइप्ड गैस और वाहनों के लिए CNG की सप्लाई 100% जारी है
  • औद्योगिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों के औसत का 80% गैस मिलेगा
  • उर्वरक संयंत्रों को लगभग 70% गैस सप्लाई दी जाएगी
  • रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स में सीमित कटौती की गई है
  • सरकार का कहना है कि वैकल्पिक LNG कार्गो के जरिए गैस की कमी को काफी हद तक पूरा कर लिया गया है.

LPG सप्लाई बढ़ाने के लिए बड़े कदम

भारत पहले अपनी LPG जरूरतों का करीब 60% हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता था और 40% घरेलू उत्पादन से पूरा होता था. अब सरकार ने आयात स्रोतों में भी विविधता लाई है. अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी LPG कार्गो मंगाए जा रहे हैं.

सरकार ने 8 मार्च 2026 को LPG नियंत्रण आदेश जारी किया, जिसके तहत रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया. इसके परिणामस्वरूप पिछले 5 दिनों में LPG उत्पादन में करीब 28% की बढ़ोतरी हुई है.

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि देश के 33 करोड़ से ज्यादा परिवारों की रसोई गैस सप्लाई सबसे बड़ी प्राथमिकता है. खासतौर पर गरीब और कमजोर वर्ग को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है.

LPG सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी करीब 2.5 दिन है, जो संकट से पहले के स्तर के बराबर है. हालांकि कुछ जगहों पर घबराहट में ज्यादा बुकिंग की खबरें आई हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि यह असली कमी नहीं बल्कि उपभोक्ता चिंता की वजह से हो रहा है.

कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम

सरकार ने व्यावसायिक LPG सिलेंडर की बिक्री को भी नियंत्रित किया है ताकि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकी जा सके. इसके लिए तीन तेल विपणन कंपनियों IOC, HPCL और BPCL के अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है.

इस समिति ने राज्यों और होटल-रेस्टोरेंट संगठनों से बातचीत कर वास्तविक जरूरत का आकलन किया है. फिलहाल औसत मासिक व्यावसायिक जरूरत का करीब 20% हिस्सा नियंत्रित तरीके से आवंटित किया जा रहा है.

वैकल्पिक ईंधन के विकल्प भी सक्रिय

LPG और गैस पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन विकल्प भी शुरू किए हैं. खुदरा दुकानों और PDS चैनलों के जरिए केरोसिन उपलब्ध कराया जा रहा है.

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इसके अलावा पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि एक महीने तक होटल और रेस्तरां सेक्टर को बायोमास, RDF पेलेट्स, कोयला और केरोसिन जैसे विकल्प इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है.

उपभोक्ताओं पर कीमतों का कम असर

सरकार ने बताया कि वैश्विक बाजार में LPG की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमत करीब 913 रुपए है, जबकि बाजार आधारित कीमत करीब 987 रुपए हो सकती थी.

सरकार ने इस अंतर का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया है. PM उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रभावी अतिरिक्त लागत 1 रुपये प्रतिदिन से भी कम है.

राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही सरकार

सरकार ने सभी राज्यों के साथ मिलकर इस स्थिति को संभालने के लिए समन्वय शुरू किया है. कई राज्यों में निगरानी समितियां बनाई जा रही हैं और जमाखोरी रोकने के लिए छापेमारी भी की जा रही है.

अफवाहों से बचने की अपील

इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि यह अफवाह फैलाने का समय नहीं है. भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रहा है, लेकिन सरकार की तैयारी और रणनीति मजबूत है.

उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की सप्लाई जारी है, गैस प्राथमिकता वाले सेक्टर को मिल रही है, LPG उत्पादन बढ़ाया गया है और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखा गया है. भारत को इस चुनौती के समय एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए.

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