सरकार लाएगी ₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना, आयात पर लगाम की तैयारी

Coal Gasification: देश में कोल गैसीकरण को ऐसे समय पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जब मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण एलएनजी, उर्वरक और उर्वरक कच्चे माल की सप्लाई चेन में बाधा बनी हुई है.
सरकार लाएगी ₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना, आयात पर लगाम की तैयारी

 (File Image)

केंद्र सरकार भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा इंसेंटिव पैकेज लाने की तैयारी में है. ₹35,000 करोड़ से ज्यादा के संभावित खर्च वाली यह योजना जनवरी 2024 में शुरू हुए ₹8,500 करोड़ के प्रोग्राम का विस्तार होगी. इसका मुख्य उद्देश्य कोयले को गैस में बदलकर यूरिया, अमोनिया और एलएनजी (LNG) जैसे उत्पादों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. सरकार ने साल 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है.

देश में कोल गैसीकरण को ऐसे समय पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जब मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण एलएनजी, उर्वरक और उर्वरक कच्चे माल की सप्लाई चेन में बाधा बनी हुई है.

चयनित आवेदकों को LoA जारी

Add Zee Business as a Preferred Source

इस वर्ष फरवरी में कोयला मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई 8,500 करोड़ रुपए की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना की श्रेणी II के तहत चयनित आवेदकों को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी कर दिए हैं.

योजना की श्रेणी II के तहत, प्राइवेट कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को प्रति परियोजना 1,000 करोड़ रुपए या कैपेक्स का 15%, जो भी कम हो, आवंटित किया गया है.

इस कंपनियों को दिए गए वित्तीय प्रोत्साहन

ओडिशा के अंगुल में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की 2 मिमीपीए कोयला गैसीकरण परियोजना को 569.05 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है. 3,793 करोड़ रुपए की इस परियोजना में कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयले को डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) में परिवर्तित किया जाएगा.

न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है. 6,976 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य प्रति वर्ष 0.33 मिलियन मीट्रिक टन अमोनियम नाइट्रेट और 0.1 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है.

इसी प्रकार, ग्रेटा एनर्जी लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती जिले के एमआईडीसी में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 414.01 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है.

कोयला गैसीकरण पहल का उद्देश्य कोयला गैसीकरण में तकनीकी प्रगति को गति देना, कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और अधिक टिकाऊ ऊर्जा परिदृश्य की नींव रखना है.

Zee Business Hindi Live TV यहां देखें

क्यों जरूरी है यह योजना?

कोयला गैसीकरण क्या है?

  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को पूरी तरह जलाने के बजाय उसे रसायनों और गर्मी के जरिए सिनगैस में बदला जाता है, जिसका उपयोग ईंधन या खाद बनाने में होता है.

सरकार इस पर इतना पैसा क्यों खर्च कर रही है?

  • वैश्विक अस्थिरता के कारण उर्वरक और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है. घरेलू कोयले का उपयोग करके ये चीजें बनाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय दबाव से मुक्ति मिलेगी.

इस योजना का लक्ष्य क्या है?

  • राष्ट्रीय लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करना है.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)