ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और एक्सपोर्ट्स के लिए बड़ा फैसला, DGFT ने Norms Committees में किए अहम सुधार, जानें क्या?

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड, फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत एडवांस अथॉराइजेशन (AA) और ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट अथॉराइजेशन (DFIA) स्कीम को लागू करता है.
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और एक्सपोर्ट्स के लिए बड़ा फैसला, DGFT ने Norms Committees में किए अहम सुधार, जानें क्या?

एक्सपोर्ट्स को राहत (फाइल फोटो)

देश में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के लिए कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने बड़ा कदम उठाया है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के तहत आने वाली नॉर्म्स कमिटी (Norms Committees) के कामकाज में सुधार के लिए कई अहम रिफॉर्म्स लागू किए गए हैं. इन सुधारों का मकसद मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना, पारदर्शिता बढ़ाना और एक्सपोर्टर्स, खासतौर पर MSMEs के लिए सिस्टम को ज्यादा आसान और भरोसेमंद बनाना है.

क्या है एडवांस अथॉराइजेशन और DFIA स्कीम

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड, फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत एडवांस अथॉराइजेशन (AA) और ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट अथॉराइजेशन (DFIA) स्कीम को लागू करता है.

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  • इन स्कीम के तहत एक्सपोर्ट प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स को ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति मिलती है
  • आमतौर पर यह मंजूरी स्टैंडर्ड इनपुट आउटपुट नॉर्म्स (SION) के आधार पर दी जाती है
  • जहां SION उपलब्ध नहीं होता, वहां कंपनियां खुद के डिक्लेयर किए गए नॉर्म्स देती हैं, जिन्हें बाद में जांचा जाता है

Norms Committees की भूमिका

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के तहत फिलहाल 7 Norms Committees काम कर रही हैं. ये सातों कमिटियां अलग-अलग सेक्टर्स के लिए बनाई गई हैं. इनमें टेक्निकल एक्सपर्ट्स और अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होते हैं और SION तय करना, ad-hoc नॉर्म्स बनाना और मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाना इनकी जिम्मेदारी है.

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क्या थी समस्या

अब तक इन कमेटियों का कामकाज सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित हो रहा था. यहां जानें -

  • फरवरी 2026 तक सिर्फ 12 टेक्निकल मेंबर्स
  • इनमें से केवल 5 सरकारी अधिकारी
  • एक ही सदस्य पर कई जिम्मेदारियां
  • लंबित मामलों (pendency) में लगातार बढ़ोतरी

क्या सुधार किए गए

सरकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं:

1. गवर्नेंस और प्रोसेस मजबूत

  • हर 15 दिन में तय शेड्यूल पर मीटिंग
  • पुराने मामलों को प्राथमिकता
  • समय पर मीटिंग मिनट्स फाइनल
  • लंबित मामलों की मॉनिटरिंग

2. टेक्निकल क्षमता बढ़ाई गई

  • अलग-अलग मंत्रालयों से नए टेक्निकल एक्सपर्ट्स जोड़े गए
  • कुल टेक्निकल मेंबर्स 12 से बढ़कर 22 हुए

3. स्पेशल डिस्पोजल ड्राइव

  • लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए अभियान
  • तय शेड्यूल पर केस निपटान
  • पारदर्शिता के लिए क्रॉनोलॉजिकल ऑर्डर में केस निपटाए गए

क्या रहा असर

इन सुधारों के बाद सिस्टम में सुधार देखने को मिला है.

  • जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 तक 38 मीटिंग्स
  • कुल 3,925 मामलों पर विचार
  • 1,770 मामलों का निपटान

एक्सपोर्टर्स को क्या फायदा

इन रिफॉर्म्स से एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है:

  • मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी
  • ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटेगी
  • सिस्टम ज्यादा पारदर्शी और प्रेडिक्टेबल बनेगा
  • MSMEs को खास राहत मिलेगी

कुल मिलाकर, ये कदम भारत की एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और ट्रेड ग्रोथ को सपोर्ट करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 DGFT ने क्या नया बदलाव किया है?

Norms Committees के कामकाज को तेज और पारदर्शी बनाया गया है.

Q2 Advance Authorisation स्कीम क्या है?

इसमें एक्सपोर्ट के लिए इनपुट्स ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट किए जा सकते हैं.

Q3 कितने टेक्निकल मेंबर्स अब हैं?

अब कुल 22 टेक्निकल मेंबर्स हैं.

Q4 सुधार का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

मंजूरी प्रक्रिया तेज और आसान होगी.

Q5 किन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा?

MSMEs और एक्सपोर्टर्स को.

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