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एक्सपोर्ट्स को राहत (फाइल फोटो)
देश में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के लिए कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने बड़ा कदम उठाया है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के तहत आने वाली नॉर्म्स कमिटी (Norms Committees) के कामकाज में सुधार के लिए कई अहम रिफॉर्म्स लागू किए गए हैं. इन सुधारों का मकसद मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना, पारदर्शिता बढ़ाना और एक्सपोर्टर्स, खासतौर पर MSMEs के लिए सिस्टम को ज्यादा आसान और भरोसेमंद बनाना है.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड, फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत एडवांस अथॉराइजेशन (AA) और ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट अथॉराइजेशन (DFIA) स्कीम को लागू करता है.
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डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के तहत फिलहाल 7 Norms Committees काम कर रही हैं. ये सातों कमिटियां अलग-अलग सेक्टर्स के लिए बनाई गई हैं. इनमें टेक्निकल एक्सपर्ट्स और अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होते हैं और SION तय करना, ad-hoc नॉर्म्स बनाना और मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाना इनकी जिम्मेदारी है.
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अब तक इन कमेटियों का कामकाज सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित हो रहा था. यहां जानें -
सरकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं:
1. गवर्नेंस और प्रोसेस मजबूत
2. टेक्निकल क्षमता बढ़ाई गई
3. स्पेशल डिस्पोजल ड्राइव
इन सुधारों के बाद सिस्टम में सुधार देखने को मिला है.
इन रिफॉर्म्स से एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है:
कुल मिलाकर, ये कदम भारत की एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और ट्रेड ग्रोथ को सपोर्ट करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 DGFT ने क्या नया बदलाव किया है?
Norms Committees के कामकाज को तेज और पारदर्शी बनाया गया है.
Q2 Advance Authorisation स्कीम क्या है?
इसमें एक्सपोर्ट के लिए इनपुट्स ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट किए जा सकते हैं.
Q3 कितने टेक्निकल मेंबर्स अब हैं?
अब कुल 22 टेक्निकल मेंबर्स हैं.
Q4 सुधार का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
मंजूरी प्रक्रिया तेज और आसान होगी.
Q5 किन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा?
MSMEs और एक्सपोर्टर्स को.