&format=webp&quality=medium)
Tax on Mobile Data Usage: केंद्र सरकार मोबाइल डेटा उपयोग पर टैक्स लगाने की संभावना पर विचार कर रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि जनवरी में इसे लेकर एक मीटिंग हुई थी. इस प्रस्ताव का उद्देश्य टेलीकॉम सेक्टर से सरकारी राजस्व बढ़ाना और डेटा उपयोग को जिम्मेदार बनाना बताया जा रहा है.
इस संबंध में 7 जनवरी को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री Narendra Modi ने की. बैठक में Department of Telecommunications (DoT) को डेटा उपयोग पर टैक्स लगाने के संभावित मॉडल का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया.
बैठक में टेलीकॉम विभाग को निर्देश दिया गया कि वह 30 सितंबर तक मोबाइल डेटा टैक्स का एक संभावित मॉडल तैयार करे. सरकार का कहना है कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए जिससे सकारात्मक डेटा उपयोग को बढ़ावा मिले और खासकर बच्चों में बढ़ती डिजिटल एडिक्शन जैसी समस्याओं को कम किया जा सके.
भारत में मोबाइल इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष FY25 में देश में कुल 229 बिलियन GB मोबाइल डेटा का इस्तेमाल हुआ है. अगर सरकार ₹1 प्रति GB डेटा टैक्स लागू करती है, तो अनुमान है कि इससे सरकार को करीब ₹22,900 करोड़ सालाना अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है.
फिलहाल मोबाइल सेवाओं पर पहले से ही टैक्स लागू है. मोबाइल रिचार्ज और टेलीकॉम सेवाओं पर 18% GST लगाया जाता है. ऐसे में अगर डेटा उपयोग पर अलग से टैक्स लागू होता है तो उपभोक्ताओं के लिए इंटरनेट सेवाएं महंगी हो सकती हैं.
इस प्रस्ताव को लेकर कुछ एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जताई है. उनका मानना है कि डेटा टैक्स लागू होने से इंटरनेट उपयोग करने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है. डिजिटल सेवाओं और इनोवेशन की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. स्टार्टअप और डिजिटल इकोनॉमी पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल यह केवल अध्ययन का विषय है और अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा.
सरकार टेलीकॉम सेक्टर से राजस्व बढ़ाने के लिए सिर्फ डेटा टैक्स ही नहीं बल्कि अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है. इसमें स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस पर निर्भरता कम करने के नए मॉडल तलाशने की कोशिश भी शामिल है.
LIVE TV:
बैठक में सरकारी टेलीकॉम कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) की स्थिति पर भी चर्चा हुई. सरकार ने कंपनी की वर्कफोर्स की समीक्षा करने और डेपुटेशन पर गए कर्मचारियों को वापस बुलाने के विकल्पों पर विचार किया. साथ ही, SIM कार्ड जारी करने के लिए आधार आधारित वेरिफिकेशन को और सख्ती से लागू करने का सुझाव भी दिया गया.
इस समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री मौजूद रहे. इनमें प्रमुख रूप से केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia, राज्य मंत्री Chandra Sekhar Pemmasani, कैबिनेट सचिव T. V. Somanathan, NITI Aayog के CEO B. V. R. Subrahmanyam सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)