&format=webp&quality=medium)
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एडिबल ऑयल के लिए नए नियम जारी किए हैं. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
खाने के तेल (एडिबल ऑयल) खरीदने वाले देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद अहम और राहत भरी खबर आई है. बाजार में अलग-अलग ब्रांड्स की तरफ से मनमाने साइज के पैकेट बनाकर तेल बेचने और ग्राहकों को भ्रमित करने के खेल पर अब सरकार ने लगाम लगा दी है. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत नेट क्वांटिटी (शुद्ध मात्रा) और स्टैंडर्ड पैकेट साइज तय करने के लिए अपने पुराने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) में बड़ा संशोधन किया है.
यह ऐतिहासिक फैसला देश के खाने के तेल की इंडस्ट्री के प्रमुख संगठनों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है, जो भारत के लगभग 90 प्रतिशत एडिबल ऑयल सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं. बाजार में अलग-अलग साइज के पैकेट होने के कारण अभी तक उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग ब्रांड्स के तेल की कीमतों की तुलना करना और सही फैसला लेना काफी मुश्किल होता था.
नए नियमों के मुताबिक, सरकार ने पाम ऑयल, सोयाबीन तेल, सनफ्लावर ऑयल, सरसों का तेल, मूंगफली तेल, तिल का तेल, राइस ब्रान ऑयल, कॉटनसीड ऑयल और कॉर्न ऑयल जैसे सभी प्रमुख खाद्य तेलों और ब्लेंडेड (मिश्रित) तेलों के लिए पैकेट का साइज फिक्स कर दिया है. अब बाजार में सिर्फ निम्नलिखित स्टैंडर्ड साइज ही बेचे जा सकेंगे:
छोटे पैकेट: 200 मिलीलीटर/ग्राम और 500 मिलीलीटर/ग्राम
मध्यम पैकेट: 1 लीटर/किलोग्राम, 2 लीटर/किलोग्राम, 3 लीटर/किलोग्राम, 4 लीटर/किलोग्राम और 5 लीटर/किलोग्राम
बड़े पैकेट/कंटेनर: 15 लीटर/किलोग्राम और 20 लीटर/किलोग्राम
इन निश्चित आकारों के कारण ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांड्स के तेल की कीमतों और उनकी वैल्यू (वैल्यू फॉर मनी) को परखना बेहद आसान हो जाएगा.
आम जनता और गरीब वर्ग की जेब का ख्याल रखते हुए सरकार ने छोटे उपभोक्ताओं के विकल्पों को सुरक्षित रखा है. 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम मात्रा वाले छोटे पाउच या पैकेट को इस मानकीकरण (Standardisation) के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि बाजार में सस्ते और छोटे पैक हमेशा की तरह मिलते रहें. इसके अलावा, कम मात्रा में इस्तेमाल होने वाले कुछ माइनर खाद्य तेलों को भी इस अनिवार्य साइज नियम से छूट दी गई है.
अक्सर देखा गया है कि तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण तेल के वॉल्यूम (लीटर) और वजन (किलोग्राम) में अंतर आ जाता है, जिसका फायदा कंपनियां उठाती हैं. इस पारदर्शिता की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने नियम बनाया है कि अगर पैकेट पर तेल की मात्रा लीटर (l) या मिलीलीटर (ml) में दिखाई गई है, तो कंपनी को उसके बराबर का शुद्ध वजन (Equivalent Weight) भी पैकेट पर साफ-साफ लिखना होगा. यह नियम 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011' के तहत सख्ती से लागू किया जाएगा.
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने साफ किया है कि यह नया नियम भारत में बनने वाले घरेलू खाद्य तेलों के साथ-साथ विदेशों से आयात (Import) किए जाने वाले खाद्य तेलों पर भी समान रूप से लागू होगा. तेल निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को इन बदलावों को अपने पैकेजिंग सिस्टम में ढालने के लिए 3 महीने का ट्रांजिशन पीरियड (बदलाव का समय) दिया गया है. हालांकि, जो कंपनियां इस नियम को तुरंत अपनाना चाहती हैं, वे आज से ही इसे लागू कर सकती हैं.
सरकार का यह कदम मिलावट, भ्रामक पैकेजिंग और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने की दिशा में एक बड़ा सुधार है. स्टैंडर्ड पैकेट साइज आने से न केवल आम उपभोक्ताओं को जागरूक होकर खरीदारी करने में मदद मिलेगी, बल्कि खाद्य तेल उद्योग में भी पैकेजिंग को लेकर एकरूपता आएगी. इससे कंपनियों के बीच स्वस्थ और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और बाजार पूरी तरह से पारदर्शी बन सकेगा.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)