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भारत सरकार ने 25 ऑफशोर वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VDA SPs) को नोटिस जारी किया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि वह बिना मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act- PMLA) के नियमों का पालन किए भारतीय यूजर्स को सेवाएं दे रही थीं. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने साफ कहा है कि इस तरह की गतिविधियां गैरकानूनी हैं और जनता को इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए.
किन-किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
नोटिस पाने वाली कंपनियों में क्रिप्टो इंडस्ट्री की कई बड़ी फर्म हैं. इनमें शामिल हैं:
फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) ने इन कंपनियों को PMLA की धारा 13 के तहत नोटिस दिया है. आरोप है कि ये कंपनियां भारत में ऑपरेट कर रही थीं, लेकिन FIU-IND के साथ रजिस्टर्ड नहीं थीं. ऐसे में इन पर रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड रखने जैसी कानूनी जिम्मेदारियों से बचने का आरोप है.
वित्त मंत्रालय ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि क्रिप्टो प्रोडक्ट्स (Crypto Products) और NFT (Non-Fungible Tokens) पूरी तरह अनरेग्युलेटेड हैं और इनमें बड़ा रिस्क है. निवेशक अगर नुकसान झेलते हैं तो उन्हें किसी तरह का कानूनी सहारा नहीं मिलेगा.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 50 वर्चुअल डिजिटल असेट सर्विस प्रोवाइडर्स FIU-IND के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं. लेकिन समय-समय पर ऐसी कई ऑफशोर कंपनियां पकड़ में आती हैं जो भारतीय यूजर्स को टारगेट करती हैं, लेकिन खुद को रजिस्टर्ड नहीं करातीं.
मार्च 2023 से VDA सर्विस प्रोवाइडर्स को एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग रोकथाम (AML-CFT Framework) के दायरे में लाया गया था. इसमें एक्सचेंज, ट्रांसफर, स्टोरेज और कंट्रोल जैसी गतिविधियां शामिल हैं. इसके तहत चाहे कंपनी भारत में हो या विदेश में, अगर वह भारतीय ग्राहकों को सेवा देती है तो उसे FIU-IND के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है.
सरकार का यह कदम क्रिप्टो मार्केट को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है. ऑफशोर कंपनियों पर नोटिस भेजकर सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब बिना रजिस्टर्ड हुए कोई भी फर्म भारत में क्रिप्टो कारोबार नहीं कर सकती. निवेशकों को भी यह समझना होगा कि बिना रेग्युलेशन वाले प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाना भारी नुकसान का सौदा हो सकता है.
क्रिप्टो डिजिटल करेंसी होती है जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है.
यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए बनाया गया कानून है.
यह संस्था मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी करती है.
NFTs अनरेग्युलेटेड हैं और इनमें बड़ा रिस्क हो सकता है.
यह मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग रोकने का कानूनी ढांचा है.
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