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सरकार ने चाय मैन्यूफैक्चर्स के लिए नए गाइडलाइंस जारी किया है. (Source: Pixabay)
Tea Import: सरकार ने गुरुवार को देश में चाय व्यापारियों को बिक्री चालान में आयातित वस्तु की उत्पत्ति का उल्लेख करने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य देश में लो-क्वालिटी वाले चाय के आयात को रोकना है.
सरकार का यह फैसला कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा घोषित उन उपायों का हिस्सा है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत में घटिया चाय का इम्पोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन नहीं हो. सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.
सरकार के इस नोटिफिकेशन के अनुसार दार्जिलिंग चाय के मैन्यूफैक्चर्स को बाहरी GI क्षेत्र से हरी पत्ती नहीं खरीदने का निर्देश दिया गया है.
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सरकार ने चाय खरीदारों को दार्जिलिंग, कांगड़ा, असम (रूढ़िवादी), या नीलगिरि (रूढ़िवादी) की चाय के साथ आयातित चाय (Imported tea) को ब्लेंड नहीं करने का भी निर्देश दिया गया है.
मंत्रालय ने कहा, "सभी चाय इम्पोर्ट करने वालों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि आयातित चाय (Imported Tea) की उत्पत्ति का उल्लेख उनके सभी बिक्री चालानों (Sales Invoice) में किया गया है और आयातित चाय को भारतीय मूल की चाय के रूप में पेश नहीं किया गया है."
इसमें कहा गया है कि चाय के सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स को घरेलू खपत (domestic consumption of tea) के लिए भारतीय मूल की चाय के साथ सस्ती और घटिया गुणवत्ता वाली आयातित चाय नहीं मिलाने का निर्देश दिया गया है.
इस संबंध में चाय बोर्ड द्वारा चाय विपणन नियंत्रण आदेश, 2003 और चाय (वितरण एवं निर्यात) नियंत्रण आदेश, 2005 के तहत दार्जिलिंग GI की सुरक्षा के लिए चार सर्कुलर जारी किए गए हैं.
एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले कृषि, प्राकृतिक या निर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान) के लिए एक GI टैग का उपयोग किया जाता है. दार्जिलिंग चाय, तिरुपति लड्डू, कांगड़ा पेंटिंग, नागपुर ऑरेंज और कश्मीर पश्मीना भारत में रजिस्टर्ड GI में से हैं.