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भारत सरकार का जेम (GeM) पोर्टल अब केवल घरेलू खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेगा. मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और विदेशी निवेश के बढ़ते प्रस्तावों को देखते हुए सरकार ने इस पोर्टल को 'ग्लोबल टेंडरिंग' के लिए अपग्रेड कर दिया है. इस बड़े बदलाव का मकसद भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों को भारतीय सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बनाना है.
GeM पोर्टल के नए अवतार की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-करेंसी (Multi-Currency) क्षमता है. अब तक यहां व्यापार केवल भारतीय रुपये में होता था, लेकिन अब पोर्टल पर अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं में भी खरीद संभव हो सकेगी. यह कदम विशेष रूप से उन ग्लोबल टेंडर्स के लिए उठाया गया है जहां विदेशी कंपनियों की भागीदारी अनिवार्य है.
हालांकि, सरकार ने यहां एक स्पष्ट रेखा खींची है. ग्लोबल टेंडर केवल उन्हीं उत्पादों के लिए जारी किए जाएंगे जो मौजूदा वक्त में भारत में नहीं बनते हैं. इससे घरेलू उद्योगों को सुरक्षा मिलेगी और तकनीकी रूप से उन्नत उत्पादों के लिए विदेशी निवेश आकर्षित होगा.
ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में GeM का कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 5.03 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है. अगर इसकी तुलना पिछले साल के 5.43 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से करें, तो इसमें 7.4% की गिरावट देखी गई है.
CPSE ऑर्डर्स में कमी: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) द्वारा दिए जाने वाले ऑर्डर की वैल्यू में कमी आना इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.
कोयला मंत्रालय का प्रदर्शन: कोयला मंत्रालय का कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू हमेशा GeM के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहता है. पिछले साल कुल GMV में कोयला मंत्रालय की हिस्सेदारी 39% थी, जो इस साल गिरकर मात्र 20% रह गई है.
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भले ही कुल टर्नओवर में थोड़ी कमी आई हो, लेकिन छोटे उद्योगों (MSMEs) के लिए पोर्टल पर खास ध्यान दिया गया है. MSMEs के लिए पोर्टल पर एक अलग 'रन वे' (Runway) तैयार किया गया है, ताकि वह बिना किसी बड़ी बाधा के सरकारी टेंडर्स में हिस्सा ले सकें.
इसके अलावा, नए अपग्रेड में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो भारत द्वारा हस्ताक्षरित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को लागू करने में मदद करेंगे. इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री करना आसान होगा और सरकारी खरीद की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली बनेगी.
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GeM पोर्टल का ग्लोबल टेंडरिंग के लिए तैयार होना यह दर्शाता है कि भारत अब अपनी सरकारी खरीद को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना चाहता है. हालांकि, कोयला मंत्रालय और CPSEs के घटते ऑर्डर चिंता का विषय हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश के नए प्रावधान आने वाले समय में आंकड़ों को फिर से ऊंचाई पर ले जा सकते हैं.
1- क्या अब GeM पोर्टल पर डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा में भुगतान हो सकेगा?
हां, नए अपडेट के बाद पोर्टल पर रुपये के अलावा अन्य विदेशी मुद्राओं में भी खरीद संभव होगी.
2- ग्लोबल टेंडर किन उत्पादों के लिए निकाले जाएंगे?
ग्लोबल टेंडर सिर्फ उन प्रोडक्ट्स के लिए होंगे जिनका उत्पादन फिलहाल भारत में नहीं होता है.
3- इस साल GeM के टर्नओवर (GMV) में कितनी गिरावट आई है?
पिछले साल के मुकाबले इस साल GMV में 7.4% की कमी आई है और यह 5.03 लाख करोड़ रुपये रहा.
4- कोयला मंत्रालय की हिस्सेदारी में क्या बदलाव आया है?
कोयला मंत्रालय की हिस्सेदारी पिछले साल के 39% से घटकर इस साल कुल GMV का 20% रह गई है.
5- MSMEs के लिए GeM पोर्टल पर क्या खास सुविधा है?
MSMEs के लिए पोर्टल पर एक अलग 'रन वे' बनाया गया है, ताकि छोटे उद्यमी आसानी से जुड़ सकें.
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