डीजल की कीमतें से बढ़ा ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव, 20 मई से फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर लागू, जानें कैसे पड़ेगा असर

AITWA ने बढ़ती डीजल कीमतों और वैश्विक संकट के बीच 20 मई 2026 से फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर लागू करने की घोषणा की है. संगठन का कहना है कि डीजल, टायर, टोल और DEF की बढ़ती लागत के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भारी दबाव है. नया FAF सिस्टम फ्रेट रेट को डीजल कीमतों के अनुसार एडजस्ट करेगा.
डीजल की कीमतें से बढ़ा ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव, 20 मई से फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर लागू, जानें कैसे पड़ेगा असर

जानिए क्या है फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर, इसका कैसे पड़ेगा असर (फाइल फोटो)

भारत में लगातार बढ़ती डीजल कीमतों और वैश्विक संकट के असर से रोड ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री पर बड़ा दबाव बन गया है. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन यानी AITWA ने कहा है कि मौजूदा हालात सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव से अलग हैं और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए बढ़ती लागत को संभालना मुश्किल होता जा रहा है.

AITWA ने 20 मई 2026 से फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर यानी FAF लागू करने की घोषणा की है. संगठन का कहना है कि यह कदम ट्रांसपोर्ट कंपनियों और उद्योगों के बीच बार-बार होने वाली किराया बढ़ोतरी की बातचीत को कम करने और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव को पारदर्शी तरीके से संभालने के लिए उठाया गया है.

क्यों बढ़ा ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव

AITWA के अनुसार हाल के दिनों में डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. 15 मई 2026 से लागू नई कीमतों के बाद ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स की लागत में बड़ा इजाफा हुआ है.

संगठन ने इसके पीछे कई वैश्विक कारण बताए हैं:

  • पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसी स्थिति
  • स्ट्रैट ऑफ हॉर्मूज के आसपास सप्लाई बाधाएं
  • भारतीय रुपयए पर दबाव
  • कच्चे तेल के आयात की बढ़ती लागत

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री की दूसरी लागतें भी बढ़ी हैं.

इन खर्चों में भी हुआ बड़ा इजाफा

AITWA के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में कई जरूरी खर्च तेजी से बढ़े हैं:

खर्चबढ़ोतरी
DEF/AdBlueकीमत लगभग दोगुनी
टायर कीमतकरीब 5% बढ़ोतरी
टोल चार्ज1 अप्रैल से बढ़े
डीजल की कमीऑपरेशन लागत बढ़ी

संगठन का कहना है कि डीजल की कमी के कारण ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे देरी और अतिरिक्त मैनपावर खर्च बढ़ रहा है.

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क्या है फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर?

  • AITWA ने कहा कि डीजल ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन की कुल लागत का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा होता है. ऐसे में ईंधन कीमतों में बदलाव का सीधा असर फ्रेट चार्ज पर पड़ता है.
  • इसी वजह से संगठन ने फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर लागू करने का फैसला लिया है. यह एक ऐसा सिस्टम होगा जो डीजल की मौजूदा कीमतों के हिसाब से फ्रेट रेट में बदलाव करेगा.
  • AITWA ने साफ किया कि FAF कोई अतिरिक्त मुनाफा कमाने का तरीका नहीं है. इसका मकसद केवल बढ़ी हुई ईंधन लागत की भरपाई करना है.

इंडस्ट्री और व्यापार जगत से सहयोग की अपील

AITWA ने व्यापार और उद्योग जगत से अपील की है कि वे मौजूदा हालात को असाधारण वैश्विक परिस्थिति के रूप में देखें और फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर को स्वीकार करें.

संगठन ने कहा कि रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ है और अगर लागत का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर पड़ सकता है.

आगे क्या होगा असर

ऐसा माना जा रहा है कि अगर डीजल की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं तो माल ढुलाई महंगी हो सकती है. इसका असर FMCG, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और रिटेल सेक्टर पर भी देखने को मिल सकता है.

हालांकि AITWA का कहना है कि फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर से ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ग्राहकों दोनों को पहले से स्पष्ट लागत संरचना मिल सकेगी.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 AITWA ने फ्यूल एडजेस्टमेंट फैक्टर कब लागू किया?

AITWA ने 20 मई 2026 से फ्यूल एडजेस्टमेंट फैक्टर लागू करने की घोषणा की है.

Q2 फ्यूल एडजेस्टमेंट फैक्टर क्या है?

यह एक ऐसा सिस्टम है जिसमें डीजल कीमतों के आधार पर फ्रेट चार्ज में बदलाव किया जाएगा.

Q3 ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर लागत क्यों बढ़ रही है?

डीजल कीमतों में बढ़ोतरी, टोल चार्ज, टायर कीमत और DEF/AdBlue महंगा होने से लागत बढ़ रही है.

Q4 क्या फ्यूल एडजेस्टमेंट फैक्टर स्थायी होगा?

AITWA के अनुसार FAF डीजल कीमतों से जुड़ा रहेगा और कीमतें कम होने पर इसमें बदलाव होगा.

Q5 इसका असर किन सेक्टरों पर पड़ सकता है?

इसका असर लॉजिस्टिक्स, FMCG, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और रिटेल सेक्टर पर पड़ सकता है.

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