श्रमिकों के लिए 'हेल्थ गारंटी' शुरू: जानिए किन कामगारों का हर साल होगा मुफ्त चेक-अप, अब नहीं छुप सकेंगी बीमारियां!

केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री मनसुख मांडविया ने देश के करोड़ों श्रमिकों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है. नए लेबर कोड के तहत अब 40 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेक-अप की गारंटी दी गई है. इस गारंटी का जमीन पर कार्यान्वयन (Implementation) आज से देशभर में शुरू हो गया है.
श्रमिकों के लिए 'हेल्थ गारंटी' शुरू: जानिए किन कामगारों का हर साल होगा मुफ्त चेक-अप, अब नहीं छुप सकेंगी बीमारियां!

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने आज से 40 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिक भाइयों-बहनों के लिए साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेक-अप की सुविधा शुरू कर दी है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

देश के विकास की नींव रखने वाले श्रमिकों के जीवन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. नए लेबर कोड के प्रावधानों को अब धरातल पर उतारते हुए 40 साल से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए 'एनुअल हेल्थ चेक-अप' की सुविधा को अनिवार्य और सुलभ बना दिया गया है. इस गारंटी को पूरे देश में आज यानी 7 मई 2026 से ही लागू कर दिया गया है.

गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान

अक्सर देखा गया है कि श्रमिक अपने काम की व्यस्तता और आर्थिक तंगी के कारण स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हैं. 40 की उम्र के बाद कैंसर, हर्ट अटैक और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इस योजना के जरिए बीमारियों की शुरुआती पहचान (Early Detection) हो सकेगी, जिससे समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा.

ESIC अस्पतालों का नेटवर्क

इस गारंटी को लागू करने की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के अस्पतालों को सौंपी गई है. देशभर में फैले ईएसआईसी अस्पतालों के विशाल नेटवर्क के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पात्र श्रमिक तक यह सुविधा पहुंचे.

मंत्री की अपील

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने देशभर के श्रमिक भाइयों और बहनों से भावुक अपील करते हुए कहा कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है. उन्होंने सभी पात्र श्रमिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी ईएसआईसी अस्पताल में जाएं, अपॉइंटमेंट लें और अपनी व्यापक स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं.

Conclusion

यह पहल केवल एक स्वास्थ्य जांच नहीं है, बल्कि देश के कार्यबल (Workforce) को सामाजिक और शारीरिक सुरक्षा प्रदान करने का एक मजबूत जरिया है. जब श्रमिक स्वस्थ होगा, तभी देश की अर्थव्यवस्था भी स्वस्थ और गतिशील रहेगी. सरकार का यह कदम 'स्वस्थ श्रमिक, समृद्ध भारत' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

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