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डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त 2025 से भारत के एक्सपोर्ट पर 25% टैरिफ और सेकेंडरी सैंक्शन लगाने का ऐलान कर दिया है. इस पर FICCI (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले से निराशा हुई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम सिर्फ एक अस्थायी फैसला होगा और दोनों देशों के बीच जल्द कोई स्थायी व्यापार समझौता (Trade Deal) होगा.
हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से मजबूत साझेदारी रही है. दोनों देश टेक्नोलॉजी, डिफेंस, एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. ऐसे में इस तरह का कदम इन रिश्तों पर नकारात्मक असर डाल सकता है. उन्होंने भरोसा जताया कि जो बातचीत अभी चल रही है, उसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे और जल्द ही दोनों देशों के बीच एक फायदेमंद ट्रेड डील सामने आएगी.
भारत और अमेरिका के बीच इस साल की शुरुआत से ही BTA यानी Bilateral Trade Agreement पर बातचीत चल रही है. सूत्रों के मुताबिक अमेरिका की कुछ मांगें भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ थीं, जिस कारण भारत सरकार ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया. अब अगस्त के दूसरे हफ्ते में अमेरिका की टीम भारत दौरे पर आ रही है, ताकि इन मुद्दों पर आगे की बातचीत हो सके. उम्मीद है कि सितंबर या अक्टूबर 2025 तक बातचीत पूरी हो जाएगी.
अमेरिका भारत के लिए एक बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है– चाहे वो प्रोडक्ट्स हों या सर्विस सेक्टर. लेकिन भारत सरकार जल्दबाजी में कोई डील करने के पक्ष में नहीं है. देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि भारत बातचीत में अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा. लक्ष्य यह है कि एक ऐसा समझौता किया जाए जो लंबे समय तक फायदा दे, न कि केवल तात्कालिक राहत.
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत खुद अमेरिका के लिए एक बड़ा बाजार है. अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां भारत की मांग, स्किल्ड टैलेंट और तेजी से बढ़ते कंज़्यूमर बेस का फायदा उठा रही हैं. इसलिए अगर अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाता है, तो उससे अमेरिका की कंपनियों पर भी असर पड़ेगा. भारत का मानना है कि दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरत है और इसी सोच के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना जरूरी है.
अब सबकी निगाहें अगस्त के अंत में होने वाली भारत-अमेरिका ट्रेड मीटिंग पर टिकी हैं. अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में जाती है, तो सितंबर-अक्टूबर तक एक स्थायी व्यापार समझौता सामने आ सकता है. भारत इस डील को लेकर गंभीर है, लेकिन अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है.