जब भी खेती का मौसम पास आता है, तो किसान भाइयों के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि कहीं खाद की किल्लत न हो जाए. खासकर जब दुनिया के हालात तनावपूर्ण हों और समुद्री रास्तों में हलचल मची हो, तो यह चिंता और बढ़ जाती है. लेकिन आज की खबर आपको राहत की सांस लेने का मौका देगी.
सरकार ने यह पक्का कर दिया है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होने वाली है. भारत ने अपनी तैयारी इतनी मजबूत रखी है कि बाहर चाहे जो भी भू-राजनीतिक उथल-पुथल चल रही हो, हमारे खेतों तक खाद पहुंचने में कोई बाधा नहीं आएगी.
उर्वरक भंडार का बढ़ता हुआ आंकड़ा
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- पिछले साल हमारे पास 129.85 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार था.
- इस बार यह आंकड़ा 36.5 फीसदी बढ़कर 177.31 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.
- सरकार की एडवांस स्टॉकिंग रणनीति ने एक मजबूत बफर स्टॉक तैयार करने में मदद की है.
- खाद की खपत कम होने वाले महीनों का फायदा उठाकर यह बड़ा स्टॉक जमा किया गया है.
- अब हमारे पास जरूरत से ज्यादा खाद सुरक्षित है, जो किसानों के लिए बड़ी सुरक्षा है.
प्रमुख खाद का स्टॉक और उसकी स्थिति
- डीएपी (DAP) का स्टॉक फिलहाल 25.13 लाख मीट्रिक टन है.
- एनपीके (NPK) खाद का भंडार 55.87 लाख मीट्रिक टन पर खड़ा है.
- यूरिया (Urea) की स्थिति सबसे मजबूत है, जिसका स्टॉक 59.30 लाख मीट्रिक टन है.
- यह आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार ने खरीफ सीजन के लिए कितनी बारीकी से काम किया है.
- खाद के इन प्रकारों की उपलब्धता सुनिश्चित करना किसानों के लिए सबसे जरूरी काम था.
आयात और अंतरराष्ट्रीय समझौते का सुरक्षा कवच
- खाद की निर्बाध सप्लाई के लिए फरवरी 2026 तक ही 98 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का आयात कर लिया गया है.
- अगले तीन महीनों में 17 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद और मंगवाने की व्यवस्था पक्की हो चुकी है.
- भारतीय कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ लंबी अवधि के लिए समझौते किए हैं.
- इन समझौतों से न सिर्फ खाद की सप्लाई बनी रहेगी, बल्कि कीमतों में भी उतार-चढ़ाव कम होगा.
- सरकार ने खाद बनाने वाली कंपनियों को साफ कह दिया है कि उन्हें गैस की आपूर्ति सबसे पहले मिलेगी.
रियल-टाइम मॉनिटरिंग और किसानों का हित
- उर्वरक विभाग और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर पूरी स्थिति पर हर पल नजर बनाए हुए हैं.
- आयात हो या खाद की ढुलाई, कहीं भी कोई बाधा न आए, इसकी जिम्मेदारी इन विभागों की है.
- खाद कंपनियों ने प्लांट की मेंटेनेंस का काम मार्च में ही पहले निपटाने का फैसला किया है.
- इसका उद्देश्य यह है कि ऐन मौके पर उत्पादन में कोई रुकावट न आए.
- सरकार का एक ही मंत्र है कि किसी भी परिस्थिति में किसान के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
काम की बात
खेती किसानी के लिए खाद रीढ़ की हड्डी होती है, और सरकार ने इस रीढ़ को मजबूत रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. चाहे वैश्विक संकट हो या व्यापार की मुश्किलें, भारत का खाद भंडार पूरी तरह सुरक्षित है. अब किसान भाई बेफिक्र होकर अपने खरीफ सीजन की तैयारी कर सकते हैं, क्योंकि उनके खेतों के लिए खाद का इंतजाम पूरी तरह से तैयार है.