प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने हरियाणा सरकार के फिक्स्ड डिपॉजिट फ्रॉड में कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह को अरेस्ट किया है. 145 करोड़ रुपए के इस घोटाले में ईडी की यह अहम गिरफ्तारी 1 जून 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19 (1) के तहत की गई है. ईडी ने इस गंभीर मामले की जांच खास तौर से एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), पंचकूला, हरियाणा द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी.
BNS की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज
ईडी की यह एफआईआर कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act), 1988 की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज किया था.
145 करोड़ रुपए के फंड का गबन
- FIR से ही यह बड़ा खुलासा हुआ था कि अज्ञात बैंक अधिकारियों ने एक बहुत ही गहरी और सुनियोजित आपराधिक साजिश रचकर पंचकूला नगर निगम के 145 करोड़ रुपए के भारी-भरकम फंड का गबन किया है.
- मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की जांच में साफ तौर से सामने आया है कि नगर निगम के अधिकारियों, बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सरकारी पैसों की हेराफेरी करने के लिए बेहद करीबी आपराधिक गठजोड़ बनाया था.
- प्रथम दृष्टया जांच से पता चला है कि कोटक महिंद्रा बैंक के कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव और तत्कालीन डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने, पंचकूला नगर निगम के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है.
नगर निगम के नाम पर खोले थे फर्जी बैंक खाते
ईडी के मुताबिक, दिलीप कुमार राघव, पुष्पेंद्र सिंह और विकास कौशिक ने फर्जी और जाली ऑथराइजेशन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पंचकूला नगर निगम के नाम पर दो फर्जी बैंक खाते खोले हैं.
अनाधिकृत और अवैध खातों में किया ट्रांसफर
- पंचकूला नगर निगम के जो फंड उनके असली और वैध खातों में जमा थे, उन्हें फर्जी फंड माइग्रेशन ऑथराइजेशन लेटर का इस्तेमाल करते हुए इन अनधिकृत और अवैध खातों में ट्रांसफर किया गया है.
- सभी जाली लेटर्स पूरी तरह से पंचकूला नगर निगम के नाम पर ही बनाए गए थे. नगर निगम के नाम पर खोले गए इन अवैध बैंक खातों में जो पैसा ट्रांसफर किया गया, उसे बाद में आगे की हेराफेरी के लिए रजत डाहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार जैसे फाइनेंसर्स को भेजा गया.
- ईडी की जांच में भी यह बात सामने आई है कि सभी फाइनेंसर सीधे तौर पर मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र सिंह के नियंत्रण और निर्देशों के तहत काम कर रहे थे.
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फंड की हेराफेरी के लिए इन फंडों का इस्तेमाल
ईडी के मुताबिक, पंचकूला नगर निगम के ज्यादातर फंड की हेराफरी करने के लिए खास तौर से रजत डाहरा और स्वाति तोमर के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था, ये दोनों खाते भी पूरी तरह से पुष्पेंद्र सिंह के ही कंट्रोल में थे.
प्रीति ठाकुर तक पहुंचाया पैसा
- फाइनेंसर्स द्वारा पंचकूला नगर निगम के नाम पर बनाए गए फर्जी खातों से अवैध तौर से प्राप्त किए गए इस सरकारी पैसे को वापस पुष्पेंद्र सिंह और उनकी वाइफ प्रीति ठाकुर तक भी पहुंचाया गया.
- पुष्पेंद्र सिंह के सीधे निर्देशों पर इन पैसों को रियल एस्टेट फर्म और दूसरे प्राइवेट व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था.
- गिरफ्तारी के बाद, PMLA पंचकूला के स्पेशल जज की अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी पुष्पेंद्र सिंह को 9 दिनों के लिए ईडी की रिमांड में भेज दिया है.
- आरोपी 9 जून 2026 तक ईडी की कस्टडी में रहेगा. जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस मामले में अभी आगे की जांच प्रगति पर है.