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युगांडा से भारत लौटे एक व्यक्ति में इबोला के हल्के लक्षण (जैसे शरीर में दर्द) देखे गए (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और खबरों में 'इबोला वायरस' की चर्चा फिर से शुरू हो गई है. इसकी वजह है बेंगलुरु में सामने आया एक संदिग्ध मामला. जी हां युगांडा से बेंगलुरु लौटे एक इंसान में इबोला के लक्षण दिखाई दिए हैं. लेकिन ये पूरी तरह से क्लियर नहीं है कि वो बीमारी से ग्रस्ति ही है. तो ऐसे में क्या हमें घबराने की जरूरत है? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अभी क्या स्थिति है और आपको क्या जानने की जरूरत है.
हाल ही में युगांडा से भारत लौटे एक व्यक्ति में इबोला के हल्के लक्षण (जैसे शरीर में दर्द) देखे गए. एहतियात के तौर पर, सरकार ने कोई रिस्क नहीं लिया और उन्हें तुरंत बेंगलुरु के एक सरकारी अस्पताल में 'आइसोलेशन' (अलग कमरे) में रखा गया है.
आपको बता दें कि इस व्यक्ति की हालत अभी स्थिर है और उन्हें सिर्फ हल्का बदन दर्द है. उनके सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं. असल में रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन अभी तक भारत में इबोला का एक भी कन्फर्म केस नहीं है.
हेल्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हाल ही में रिपोर्ट किए गए इबोला वायरस बीमारी के फैलने को देखते हुए, इबोला वायरस बीमारी की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है. बहुत सावधानी बरतते हुए, युगांडा से हाल ही में ट्रैवल करने वाले एक व्यक्ति, जिसने शरीर में दर्द के हल्के लक्षण बताए थे, को बेंगलुरु में सरकारी एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल में ऑब्जर्वेशन और आगे की जांच के लिए आइसोलेशन में रखा गया है.
शरीर में हल्के दर्द के अलावा वह व्यक्ति अभी तक ठीक है.एक सैंपल लिया गया है और लैब टेस्टिंग के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, टेस्ट के नतीजों का इंतजार है,
हेल्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय, संबंधित राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर, कड़ी निगरानी रख रहा है और WHO की गाइडलाइंस के अनुसार सभी जरूरी पब्लिक हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है.अभी, भारत में इबोला वायरस बीमारी का कोई मामला कन्फर्म नहीं हुआ है.
सरकार सतर्क और तैयार है, और सभी तय एंट्री पॉइंट्स और पूरे पब्लिक हेल्थ सिस्टम में स्क्रीनिंग और निगरानी के तरीके जारी हैं. वहीं, नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराएं नहीं, गलत जानकारी न फैलाएं और जानकारी के लिए सिर्फ़ ऑफिशियल सोर्स पर ही भरोसा करें.
अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इस समय इबोला का 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन फैल रहा है. यह स्ट्रेन काफी गंभीर माना जाता है क्योंकि इसमें मरीजों के बचने की संभावना कम होती है (हाई मोर्टालिटी रेट).
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फिलहाल इस खास स्ट्रेन के लिए कोई पक्की वैक्सीन या इलाज मौजूद नहीं है.तो इसीलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.
इबोला के लक्षण शुरुआत में आम फ्लू जैसे लग सकते हैं, इसलिए कंफ्यूजन हो सकता है
अगर कोई व्यक्ति प्रभावित देशों से लौटा है और उसे ये लक्षण दिखें, तो सावधान हो जाना चाहिए-
सबसे जरूरी बात पैनिक न करें. इबोला हवा से नहीं फैलता, यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों (जैसे पसीना, खून या लार) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. फिलहाल भारत में डरने जैसी कोई स्थिति नहीं है. जी हां सरकार पूरी तरह सतर्क है और बेंगलुरु वाला मामला भी अभी सिर्फ 'संदिग्ध' है, कन्फर्म नहीं. तो इसलिए सतर्क रहें, सुरक्षित रहें.
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