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बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में यह भारत का एक बड़ा कदम है. फोटो क्रेडिट- पीआईबी
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब (उत्पादन केंद्र) बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले डीपीआईआईटी (DPIIT-उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) ने आज (23 मई 2026) 'भव्य योजना' (BHAVYA Scheme) को लागू करने के लिए दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी कर दिए हैं.
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में निवेश के लिए पूरी तरह तैयार (Investment-Ready) और विश्व स्तरीय इंडस्ट्रियल पार्क बनाना है. इस योजना को 'मेक इन इंडिया' और 'पीएम गति शक्ति' के सपनों को सच करने के लिए तैयार किया गया है. आइए इस पूरी योजना की हर छोटी-बड़ी बात को समझते हैं.
इस योजना के स्वरूप और नियमों को नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
कुल बजट और समय सीमा: इस केंद्रीय योजना के लिए कुल ₹33,660 करोड़ का वित्तीय बजट तय किया गया है. इसके तहत साल 2026-27 से 2031-32 के बीच (6 सालों में) पूरे देश में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे.
पहला चरण (Phase 1): शुरुआत में पहले चरण के तहत 50 इंडस्ट्रियल पार्कों को चुना जाएगा. इनका चुनाव राज्यों के बीच एक निष्पक्ष कम्पटीशन (Challenge-Based Competitive Selection) के आधार पर होगा.
जमीन की जरूरी सीमा (Land Requirement): सामान्य राज्यों (मैदानी इलाकों) के लिए पार्क का आकार कम से कम 100 एकड़ होना जरूरी है. पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर (North-East) के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और छोटे राज्यों के लिए यह सीमा कम से कम 25 एकड़ रखी गई है. योजना के तहत 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकता है.
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां आने वाले निवेशकों और कंपनियों को फैक्ट्री शुरू करने के लिए कोई कागजी या बुनियादी ढांचा खुद नहीं बनाना होगा. यहां सब कुछ पहले से तैयार (Plug-and-Play) मिलेगा. इन पार्कों में ये वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं दी जाएंगी:
राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को बहुत कड़े और पारदर्शी पैमानों पर परखा जाएगा. पार्कों का चुनाव करते समय देखा जाएगा कि वहां मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (सड़क, रेल और पोर्ट से जुड़ाव) कैसी है, जमीन कितनी उपयुक्त है, डिजिटल गवर्नेंस की क्या तैयारी है और लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना यह प्रोजेक्ट कैसे चलेगा. इसमें नए (Greenfield) और पुराने लेकिन पात्र (Brownfield) दोनों तरह के पार्कों को शामिल किया जा सकता है.
भव्य योजना के तहत बनने वाले हर एक इंडस्ट्रियल पार्क को चलाने और संभालने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक विशेष कंपनी बनाई जाएगी, जिसे स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) कहा जाता है. यह एसपीवी ही पार्क की प्लानिंग, विकास, मैनेजमेंट, नए निवेशकों को जमीन सौंपने और भविष्य में पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख के लिए जिम्मेदार होगी. सरकार इस एसपीवी में अपनी तरफ से इक्विटी (पूंजी) के रूप में वित्तीय मदद देगी, जो कि एसपीवी को ट्रांसफर की गई जमीन की वैल्यू और काम के माइलस्टोन (लक्ष्यों) को पूरा करने पर निर्भर करेगी.
इस योजना में देश के बड़े प्राइवेट डेवलपर्स (निजी कंपनियों) को भी शामिल होने का पूरा मौका दिया गया है. वे भी प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक एसपीवी के जरिए इन पार्कों को विकसित कर सकते हैं, बशर्ते वे पारदर्शिता और जवाबदेही के कड़े सरकारी नियमों का पालन करें. इसके अलावा, भव्य योजना को केंद्र और राज्य सरकार की अन्य बड़ी योजनाओं (जैसे लॉजिस्टिक्स, स्किलिंग और रिन्यूएबल एनर्जी मिशन) के साथ जोड़ा (Convergence) जाएगा ताकि पैसों और संसाधनों की बचत हो सके.
योजना में काम तेजी से हो और कोई भ्रष्टाचार न हो, इसके लिए एक बहुत मजबूत निगरानी तंत्र बनाया गया है:
'भव्य योजना' के इन नियमों का जारी होना भारत के औद्योगिक इतिहास में एक बहुत बड़ा कदम है. इससे विदेशी कंपनियों को भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए एक ऐसा बेंचमार्क इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा जो चीन या वियतनाम को कड़ी टक्कर दे सकता है. जब देश में 100 नए औद्योगिक शहर जैसे पार्क बनकर तैयार होंगे, तो इससे न केवल हमारी घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए और शानदार अवसर पैदा होंगे.
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