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ट्रंप का टैरिफ को लेकर जारी फरमान पूरी दुनिया को परेशान कर रहा है. इसका असर मुल्क की ग्रोथ के साथ वहां के शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. इसका शिकार भारत से लेकर चीन और यूरोप के देश हैं. ट्रंप का एक फैसला कभी बाजार में रैली भर दे रहा तो कभी निवेशकों की जेबें ढ़ीली करने का काम कर रहा है. ऐसे में Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की इकॉनमी पर भरोसा जताया है. जबकि अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ संबंधी सख्त रुख और चीन-अमेरिका की कमजोर होती अर्थव्यवस्थाएं चिंता का विषय हैं, फिर भी Jefferies भारत को "Overweight" रेटिंग दे रहा है यानी निवेश के लिहाज से बेहतर मान रहा है. आइए इसे 5 पॉइंट्स में समझते हैं.
1. भारत की कम निर्भरता अमेरिका और चीन पर
भारत की ग्रोथ अमेरिका और चीन की मांग पर उतनी निर्भर नहीं है जितनी बाकी उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं. इससे भारत को इन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सुस्ती का सीधा असर कम झेलना पड़ता है.
भारत पर ट्रेड टैरिफ यानी आयात-निर्यात पर लगाए जाने वाले टैक्स का असर बाकी देशों की तुलना में कम होता है, जिससे व्यापारिक माहौल अपेक्षाकृत स्थिर रहता है.
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3. तेल की कीमतें और फायदा
तेल की कीमतें अभी नियंत्रण में हैं और भारत एक बड़ा तेल आयातक है, इसलिए इससे भारत को फायदा मिल रहा है – खासकर पावर और पेट्रोलियम सेक्टर को.
4. विदेशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी अन्य बाजारों की तुलना में कम है, जिससे बाहरी उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव सीमित रहता है.
5. RBI का प्रो-ग्रोथ स्टैंड
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति विकास को प्राथमिकता दे रही है, जिससे ब्याज दरें और लिक्विडिटी का माहौल निवेश के लिए अनुकूल बना हुआ है.