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भारत ने पिछले कुछ सालों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं. इसी प्रयास का एक बड़ा उदाहरण धनुष होवित्जर (Dhanush Howitzer) है. यह 155mm × 45 कैलिबर की स्वदेशी लंबी दूरी की तोप है, जिसे पहले ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) और अब एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) द्वारा बनाया जाता है. यह तोप भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने के लिए विकसित की गई है और अब सेना में शामिल भी की जा चुकी है.
हाल ही में भारतीय सेना ने 300 धनुष तोपों को खरीदने का ऑर्डर दिया है, जिनके जरिए 15 रेजिमेंटों को तैयार करने की योजना है. इस आधुनिक तोप में लंबी रेंज, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमैटिक टार्गेटिंग और कई आधुनिक तकनीकें शामिल हैं. आइए जानते हैं Dhanush Howitzer की प्रमुख खासियतें.
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धनुष एक 155mm × 45 कैलिबर की टोइड आर्टिलरी गन है, जिसे लंबी दूरी तक भारी फायरपावर देने के लिए डिजाइन किया गया है. यह भारत की पहली स्वदेशी लंबी दूरी की आर्टिलरी तोपों में से एक है. इसका निर्माण भारतीय सेना की आधुनिक आर्टिलरी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है. इसका 45 कैलिबर बैरल पारंपरिक 39 कैलिबर बोफोर्स गन से लंबा है, जिससे इसकी मारक क्षमता और दूरी दोनों बढ़ जाती हैं.
धनुष की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता है. यह सामान्य परिस्थितियों में करीब 36–38 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेद सकती है, जो पुराने बोफोर्स गन की 27-30 किलोमीटर की तुलना में काफी ज्यादा है. लंबी दूरी से हमला करने की यह क्षमता सेना को दुश्मन के ठिकानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने का बड़ा फायदा देती है.
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धनुष में आधुनिक डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है. इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, ऑन-बोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर और आधुनिक फायरिंग कंट्रोल तकनीक शामिल है. यह सिस्टम लक्ष्य की दूरी, दिशा और अन्य बैलिस्टिक डेटा की गणना करता है, जिससे फायरिंग अधिक सटीक और तेज हो जाती है.
इस तोप में ऑटो-लेइंग और ऑटो-अलाइनमेंट फीचर दिया गया है. इसका मतलब है कि यह गन खुद को लक्ष्य की दिशा में सेट कर सकती है. इससे फायरिंग के समय इंसानी गलती कम हो जाती है और प्रतिक्रिया समय भी घट जाता है, जो युद्ध के दौरान बेहद महत्वपूर्ण होता है.
धनुष की एक बड़ी खासियत यह है कि यह सभी NATO मानक 155mm गोला-बारूद के साथ इस्तेमाल की जा सकती है. इससे सेना को अलग-अलग परिस्थितियों में अलग तरह के गोले इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी आसान हो जाता है.
धनुष तोप की फायरिंग गति भी काफी तेज है. इसमें तीन अलग-अलग फायरिंग मोड हैं:
Burst Mode: 15 सेकंड में 3 राउंड
Intense Mode: 3 मिनट में 15 राउंड
Sustained Mode: 1 घंटे में 60 राउंड
यह तेज फायरिंग क्षमता युद्ध के समय दुश्मन के ठिकानों पर लगातार हमला करने में मदद करती है.
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धनुष में दिन और रात दोनों समय फायरिंग करने की क्षमता है. इसमें आधुनिक लक्ष्य पहचान प्रणाली और थर्मल साइट जैसी तकनीकें शामिल हैं. इससे सेना किसी भी समय और किसी भी मौसम में दुश्मन पर हमला कर सकती है.
इस तोप में दुनिया के सबसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटिंग सिस्टम में से एक का इस्तेमाल किया गया है. इससे टार्गेटिंग, बैलिस्टिक कैलकुलेशन और फायर कंट्रोल काफी तेज और सटीक हो जाता है. यह तकनीक इसे अपने वर्ग की सबसे उन्नत तोपों में शामिल करती है.
धनुष को ऑपरेट करने के लिए आमतौर पर 6 से 8 सैनिकों की टीम की जरूरत होती है. इसमें गोला-बारूद लोड करना, फायरिंग सेट करना और लक्ष्य निर्धारण जैसे काम शामिल होते हैं.
इस तोप में स्क्रू-टाइप ब्रीच सिस्टम और उन्नत रीकॉइल सिस्टम लगाया गया है. ये सिस्टम फायरिंग के दौरान झटके को नियंत्रित करते हैं और लगातार फायरिंग के दौरान गन को स्थिर बनाए रखते हैं.
धनुष में इलेक्ट्रिकली ऑपरेटेड अम्यूनिशन हैंडलिंग सिस्टम दिया गया है. यह गोला-बारूद लोड करने की प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाता है.
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धनुष को भारत में विकसित किया गया है और यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल का बड़ा उदाहरण माना जाता है. इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ी है और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हुई है.
धनुष हॉवित्जर भारतीय आर्टिलरी की रीढ़ बनने के लिए तैयार है. इसकी आधुनिक तकनीक, तेज मारक क्षमता और 'मेड इन इंडिया' टैग इसे गर्व का विषय बनाता है. 15 रेजिमेंटों में इसकी तैनाती के बाद भारतीय सेना की आर्टिलरी पावर दुनिया की सबसे घातक सेनाओं में शुमार हो जाएगी.
1- धनुष तोप की अधिकतम मारक क्षमता कितनी है?
धनुष तोप 36 से 38 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को सटीकता से भेद सकती है.
2- इसे कौन सी कंपनी बना रही है?
इसे पहले OFB बनाता था, अब इसका निर्माण एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) कर रहा है.
3- धनुष और बोफोर्स में मुख्य अंतर क्या है?
धनुष की रेंज बोफोर्स से 10 किमी ज्यादा है. साथ ही धनुष में डिजिटल फायर कंट्रोल और ऑटो-लेइंग जैसे आधुनिक फीचर्स हैं जो बोफोर्स में नहीं थे.
4- इसे चलाने के लिए कितने सैनिकों की जरूरत होती है?
धनुष तोप को संचालित (Operate) करने के लिए आमतौर पर 6 से 8 सैनिकों के क्रू की जरूरत होती है.
5- फायरिंग के दौरान सटीकता के लिए इसमें क्या खास है?
इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और ऑन-बोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर है, जो ऑटोमैटिक तरीके से टारगेट सेट करते हैं.
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