Barak-8 Vs Shtil-1: क्यों 'फायर एंड फॉरगेट' मिसाइल के रहते हुए भी भारत ने चुनी रूसी तकनीक? जानें इनसाइड स्टोरी

भारतीय नौसेना ने रूस के साथ ₹2,182 करोड़ ($236M) का एक बड़ा रक्षा सौदा किया है, जिसके तहत युद्धपोतों के लिए VL-Shtil (Shtil-1) मिसाइल सिस्टम खरीदा जाएगा. यह फैसला तब लिया गया है जब भारत के पास पहले से ही इजरायल के साथ मिलकर बनाया गया आधुनिक Barak-8 (MR-SAM) सिस्टम मौजूद है. अब सवाल ये है कि भारतीय नौसेना ने ऐसा क्यों किया?
Barak-8 Vs Shtil-1: क्यों 'फायर एंड फॉरगेट' मिसाइल के रहते हुए भी भारत ने चुनी रूसी तकनीक? जानें इनसाइड स्टोरी

रक्षा मंत्रालय (MoD) ने हाल ही में रूस के साथ ₹2182 करोड़ ($236 मिलियन) का एक बड़ा समझौता किया है. इस समझौते के तहत हमारी नौसेना के युद्धपोतों के लिए रूस से वर्टिकल लॉन्च श्तिल (VL-Shtil) मिसाइलें खरीदी जाएंगी.

हैरानी की बात यह है कि हमारे पास पहले से ही इजरायल के साथ मिलकर बनाई गई बेहतरीन Barak-8 (MR-SAM) मिसाइल मौजूद है, जो तकनीकी रूप से काफी एडवांस मानी जाती है. तो फिर नौसेना ने रूसी मिसाइलों पर इतना पैसा क्यों खर्च किया? चलिए, इस खबर की एक-एक परत खोलते हैं और इसे आसान भाषा में समझते हैं.

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पहले समझिए क्या है यह पूरी डील?

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कुल ₹5,083 करोड़ के दो बड़े सौदों पर साइन किए हैं.

  • पहला सौदा ALH Mk-III (MR) हेलीकॉप्टरों के लिए है.
  • दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण सौदा VL-Shtil मिसाइलों के लिए रूस की कंपनी JSC Rosoboronexport के साथ किया गया है.

इस ₹2,182 करोड़ के सौदे में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि उन्हें युद्धपोत पर तैनात करने के लिए जरूरी 'मिसाइल होल्डिंग फ्रेम्स' भी शामिल हैं. इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन युद्धपोतों (Warships) की सुरक्षा को कई गुना बढ़ाना है.

'Shtil-1' मिसाइल सिस्टम क्या है?

अगर आसान भाषा में कहें, तो 'श्तिल-1' एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो समुद्र में हमारे जहाजों को दुश्मन के हवाई हमलों से बचाता है. इसे रूस की मशहूर कंपनी अल्माज-आंते (Almaz-Antey) ने बनाया है.

मिसाइल का नाम: इसमें 9M317ME मिसाइल का इस्तेमाल होता है. यह जमीन पर मार करने वाले मशहूर Buk-M2 एयर डिफेंस सिस्टम का ही नौसैनिक वर्जन (Naval Variant) है.

बनावट: यह एक सिंगल-स्टेज सॉलिड-फ्यूल मिसाइल है. इसके पंख (Fins) मुड़ सकते हैं, जिससे यह युद्धपोत के छोटे से डिब्बे (Canister) में भी फिट हो जाती है.

SARH तकनीक: क्यों है यह खास?

मिसाइलों की दुनिया में दो तरह की तकनीकें सबसे ज्यादा चलती हैं- एक होती है ARH (Active Radar Homing) जो 'दागो और भूल जाओ' (Fire and Forget) के सिद्धांत पर काम करती है. वहीं दूसरी होती है SARH (Semi-Active Radar Homing). श्तिल-1 में SARH तकनीक का इस्तेमाल होता है.

अब आप सोचेंगे कि 'दागो और भूल जाओ' वाली तकनीक बेहतर होनी चाहिए, तो फिर भारत ने पुरानी तकनीक क्यों चुनी? इसके पीछे गहरी इंजीनियरिंग और आर्थिक कारण हैं:

कम लागत: एक युद्धपोत को अपनी सुरक्षा के लिए 24 से 36 मिसाइलें ले जानी पड़ती हैं. ARH मिसाइलों के अंदर अपना खुद का छोटा रडार लगा होता है, जो उन्हें बहुत महंगा बना देता है. इसके मुकाबले SARH मिसाइलों का सीकर (Seeker) काफी सस्ता और सरल होता है. थोक में खरीदने पर इससे करोड़ों रुपये की बचत होती है.

अधिक ताकत: SARH मिसाइल खुद के रडार पर निर्भर नहीं होती. जहाज पर लगा हुआ शक्तिशाली रडार (जैसे MR-90 Orekh) दुश्मन के टारगेट पर रोशनी (Illumination) डालता है और मिसाइल उस रोशनी का पीछा करती है. क्योंकि जहाज का रडार मिसाइल के छोटे रडार से कई गुना ज्यादा ताकतवर होता है, इसलिए दुश्मन का पता लगाना और उसे ट्रैक करना आसान होता है.

जैमिंग का डर नहीं: दुश्मन के विमान अक्सर मिसाइलों को गुमराह करने के लिए जैमर्स का इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि SARH मिसाइल का सीकर 'पैसिव' होता है (यानी वह सिर्फ सुनता है, कुछ भेजता नहीं), इसलिए उसे सीधे जैम करना मुश्किल है. दुश्मन को जहाज के उस विशालकाय रडार को जैम करना पड़ेगा, जो लगभग नामुमकिन होता है.

श्तिल-1 की मारक क्षमता

यह मिसाइल सिस्टम समुद्र में किसी 'अभेद्य दीवार' की तरह काम करता है. इसकी कुछ प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:

फायरिंग की रफ्तार: यह सिस्टम हर 2 से 3 सेकंड में एक मिसाइल दाग सकता है. यानी अगर दुश्मन एक साथ कई मिसाइलों से हमला (Saturation Attack) करे, तो भी यह जवाब देने के लिए तैयार रहता है.

रेंज (दूरी): यह 3.5 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन को मार गिराने की ताकत रखता है.

ऊंचाई: यह समुद्र की सतह से मात्र 5 मीटर ऊपर उड़ती हुई मिसाइलों (Sea-skimmers) से लेकर 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों तक को तबाह कर सकता है.

मल्टी-टार्गेटिंग: एक बार में यह सिस्टम 12 टारगेट को ट्रैक कर उन पर हमला कर सकता है.

पुरानी श्तिल बनाम नई श्तिल-1

पहले हमारे जहाजों पर पुरानी 'उरगान' (Uragan) प्रणाली होती थी, जिसमें एक रेल लॉन्चर होता था जो घूमकर मिसाइल छोड़ता था. नई श्तिल-1 में कई खासियतें हैं-

1. यह वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) है. यानी मिसाइल सीधे ऊपर की तरफ निकलती है.

2. इसमें लॉन्चर को दुश्मन की तरफ घुमाने की जरूरत नहीं होती. यह 360 डिग्री यानी किसी भी दिशा से आ रहे खतरे को सेकंडों में भांप लेती है.

3. यह जहाज के डेक के नीचे फिट होती है, जिससे जहाज का वजन और बनावट संतुलित रहते हैं.

किन युद्धपोतों को मिलेगा यह 'कवच'?

भारतीय नौसेना अपने कई पुराने और नए जहाजों को इस सिस्टम से लैस कर रही है:

तलवार क्लास फ्रिगेट (Talwar-class): INS तलवार, त्रिशूल, तबर, तेग, तरकश और त्रिकंड. इन पर पहले पुराने रेल लॉन्चर थे, अब उन्हें श्तिल-1 (VLS) से बदला जा रहा है.

दिल्ली क्लास डिस्ट्रॉयर (Delhi-class): INS दिल्ली, मैसूर और मुंबई. इनके मिड-लाइफ रिफिट (Mid-life refit) के दौरान श्तिल-1 लगाया जाएगा और साथ ही नए Fregat-M2EM रडार भी दिए जाएंगे.

शिवालिक क्लास फ्रिगेट (Shivalik-class): INS शिवालिक, सतपुड़ा और सह्याद्रि. इन अत्याधुनिक जहाजों को भी अब श्तिल-1 से और ज्यादा सुरक्षित बनाया जा रहा है.

Shtil-1 VS Barak-8: दोनों में क्या अंतर

अब आते हैं उस बड़े सवाल पर- इन दोनों में से कौन बेहतर है? सच तो यह है कि ये दोनों एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि 'साथी' हैं.

फीचरShtil-1 (रूस)Barak-8 / MR-SAM (इजरायल-भारत)
तकनीकSARH (सेमी-एक्टिव)ARH (एक्टिव – फायर एंड फॉरगेट)
रेंज50 किलोमीटर70+ किलोमीटर
इंजनसिंगल-स्टेज, सिंगल-पल्सड्यूल-पल्स (ज्यादा फुर्तीली)
कीमतकाफी कम (सस्ती)बहुत ज्यादा (महंगी)
मुख्य कामफ्रिगेट्स और छोटे जहाजों की सुरक्षाबड़े और महत्वपूर्ण युद्धपोतों की सुरक्षा
जैमिंग रेजिस्टेंसबहुत ज्यादा (जहाज के रडार की वजह से)अच्छी, लेकिन जैमर्स के प्रति संवेदनशील

सरल शब्दों में तुलना: Barak-8 एक 'प्रीमियम स्मार्टफोन' की तरह है, जिसमें हर तरह के एडवांस फीचर्स हैं, लेकिन वह बहुत महंगा है. वहीं, Shtil-1 एक 'भरोसेमंद वर्कहॉर्स' की तरह है, जो सस्ता है, टिकाऊ है और अपना काम बखूबी जानता है.

भारत ने यह सौदा क्यों किया?

भारत ने यह फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है:

लेयर्ड डिफेंस (Layered Defence): समुद्र में सुरक्षा की कई परतें होती हैं. अगर कोई मिसाइल Barak-8 (70 किमी) से बच निकलती है, तो उसे Shtil-1 (50 किमी) से मार गिराया जा सकता है.

सप्लाई चेन: रूस के साथ हमारे दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं. हमारे कई जहाजों का ढांचा रूसी है, इसलिए उनमें रूसी मिसाइल सिस्टम फिट करना आसान और किफायती होता है.

लागत का संतुलन: हर छोटे जहाज पर अरबों रुपये की इजरायली मिसाइलें लगाना आर्थिक रूप से सही नहीं है. Shtil-1 कम पैसे में वह सुरक्षा प्रदान कर देता है, जिसकी एक फ्रिगेट को जरूरत होती है.

विश्वसनीयता: 'बक' (Buk) परिवार की यह मिसाइल दुनिया भर के युद्धों में खुद को साबित कर चुकी है.

Conclusion

भारतीय नौसेना का यह कदम अपनी ताकत को संतुलित करने का एक शानदार उदाहरण है. एक तरफ हमारे पास इजरायल की हाई-टेक 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक है, तो दूसरी तरफ रूस की 'मजबूत और सस्ती' रडार होमिंग तकनीक. Shtil-1 मिसाइलें हमारे उन युद्धपोतों को नई जिंदगी देंगी जो थोड़े पुराने हो रहे थे, और नए जहाजों को एक ऐसा सुरक्षा कवच देंगी जिसे भेद पाना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा. ₹2,182 करोड़ का यह निवेश भारत की समुद्री सीमाओं को 'अभेद्य' बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- क्या Shtil-1 मिसाइल Barak-8 से पुरानी है?

तकनीकी रूप से SARH एक पुरानी तकनीक है, लेकिन Shtil-1 इसका सबसे आधुनिक वर्जन है जो आज के दौर के खतरों से लड़ने में सक्षम है.

2- भारत इजरायल के बजाय रूस से मिसाइल क्यों खरीद रहा है?

भारत दोनों से खरीद रहा है. रूस की मिसाइलें सस्ती और पुराने जहाजों के लिए ज्यादा फिट हैं, जबकि इजरायल की मिसाइलें बड़े और नए मिशनों के लिए हैं.

3- वर्टिकल लॉन्च (VLS) का क्या फायदा है?

VLS से मिसाइल किसी भी दिशा में तुरंत दागी जा सकती है और लॉन्चर को घुमाने में लगने वाला समय बच जाता है.

4- Shtil-1 कितनी दूरी तक मार कर सकती है?

यह 3.5 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर की दूरी तक के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है.

5- क्या यह मिसाइल ड्रोन को भी गिरा सकती है?

हां, यह सुपरसोनिक विमानों, हेलीकॉप्टरों, मिसाइलों और यहां तक कि छोटे ड्रोन्स को भी मार गिराने में सक्षम है.

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