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देश में लग्ज़री फर्नीचर के आयात को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़े कस्टम फ्रॉड का खुलासा किया है. इसमें करीब 30 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की चोरी का मामला पकड़ा गया है.
जांच में पता चला है कि कुछ बड़े कारोबारी, दुबई और सिंगापुर में बनी फर्जी कंपनियों और डमी आयातकों के जरिए महंगे ब्रांडेड फर्नीचर को सस्ते, बिना ब्रांड वाले सामान के रूप में दिखाकर देश में मंगा रहे थे.
DRI को मिली पुख्ता जानकारी के बाद कई ठिकानों पर छापेमारी की गई. इसमें गोदाम, ऑफिस, फ्रेट फॉरवर्डर, कस्टम एजेंट और अन्य जुड़े लोगों के ऑफिस शामिल थे. जांच में सामने आया कि असली खरीदार सीधे इटली और यूरोप की कंपनियों से ब्रांडेड फर्नीचर मंगा रहे थे. लेकिन इस फर्नीचर को सिंगापुर की एक कंपनी के जरिए फर्जी बिल पर "नो ब्रांड" दिखाकर भारत में सस्ते दामों पर क्लियर कराया जा रहा था.
कस्टम विभाग को धोखा देने के लिए डमी IEC होल्डर और लोकल एजेंट बनाए गए थे, जो कागजों में आयात कर रहे थे. कस्टम क्लीयर होने के बाद वही फर्नीचर असली खरीदार को भेजा जाता था. इस पूरे खेल में फर्जी बिल, शेल कंपनियां और एक पूरी चेन शामिल थी.
DRI ने इस घोटाले में शामिल असली मालिक, डमी आयातक और लोकल बिचौलिए को 21 और 22 जुलाई को गिरफ्तार किया है. ये तीनों लोग मिलकर पूरे फ्रॉड को अंजाम दे रहे थे. इससे पहले मई 2025 में भी DRI ने ऐसा ही एक मामला पकड़ा था जिसमें 20 करोड़ रुपये की ड्यूटी चोरी हुई थी और तीन लोग गिरफ्तार किए गए थे.
DRI का कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाते हैं और ईमानदार आयातकों और देशी निर्माताओं के लिए असमान बाजार तैयार करते हैं. अब DRI इस नेटवर्क के पीछे छिपे मास्टरमाइंड्स, फर्जी कंपनियों और पैसों के लेनदेन की गहराई से जांच कर रहा है. सरकार की नजर अब उन सभी घोटालों पर है जो अंतरराष्ट्रीय लेवल पर डिजाइन किए जा रहे हैं, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं.