&format=webp&quality=medium)
पेट्रोल-सीएनजी पंपों पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
देश में पेट्रोल पंपों और फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) ने लीगल मेट्रोलॉजी (Government Approved Test Centre) नियम, 2013 में संशोधन किया है, जिससे देश में वजन और माप प्रणाली की जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके.
ज़ी बिजनेस के रिपोर्ट अंबरीश पांडेय ने बताया कि संशोधित नियमों के तहत अब GATCs को 5 नए फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम की जांच और री-वेरिफिकेशन की मंजूरी दी गई है. इनमें शामिल हैं-
सरकार का मानना है कि इससे फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम की जांच सेवाएं ज्यादा तेज और प्रभावी होंगी. साथ ही देश में क्लीन फ्यूल्स के बढ़ते इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा.
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
इन पांच नई श्रेणियों को जोड़ने के बाद अब GATCs कुल 23 तरह के वजन और माप उपकरणों की जांच और री-वेरिफिकेशन कर सकेंगे. सरकार का कहना है कि इससे देश का लीगल मेट्रोलॉजी इकोसिस्मट और मजबूत होगा और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी.
सीएनजी (CNG), एलएनजी (LNG) और हाइड्रोजन डिस्पेंसर्स को जीएटीसी (GATC) फ्रेमवर्क के दायरे में शामिल करने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश भर में क्लीन फ्यूल का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. इस कदम से ग्राहकों को ईंधन की सटीक डिलीवरी सुनिश्चित करने और लेनदेन में अधिक पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी.
सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र (GATCs) ऐसे स्वीकृत संस्थान हैं, जिनके पास लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम और नियमों के तहत निर्दिष्ट वजन और माप के वेरिफिकेशन और री-वेरिफिकेशन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विशेषज्ञता मौजूद है.
इस व्यवस्था में योग्य निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को शामिल करके, GATC फ्रेमवर्क देश की सत्यापन क्षमता को बढ़ाने और वेरिफिकेशन सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद करता है.
संशोधित नियमों के तहत अब राज्य सरकारें अपनी जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त उपकरणों को GATC जांच दायरे में शामिल कर सकेंगी. इसके अलावा प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए ज्वाइंट सेक्रेटरी और उससे ऊपर के अधिकारियों को भी नियमों के तहत जरूरी शक्तियां दी गई हैं.
सरकार का मानना है कि इससे मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और सिस्टम ज्यादा प्रभावी बन सकेगा.
नए नियमों के तहत पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर्स की जांच फीस ₹5,000 प्रति नोजल तय की गई है. वहीं CNG, LPG, LNG और Hydrogen डिस्पेंसर्स के लिए ₹10,000 प्रति नोजल फीस निर्धारित की गई है.
| सत्यापन शुल्क (₹) | |
| पेट्रोल/ डीजल डिस्पेंसर | ₹5,000.00 प्रत्येक नोजल |
| सीएनजी डिस्पेंसर | ₹10,000.00 प्रत्येक नोजल |
| एलपीजी डिस्पेंसर | ₹10,000.00 प्रत्येक नोजल |
| एलएनजी डिस्पेंसर | ₹10,000.00 प्रत्येक नोजल |
| हाइड्रोजन डिस्पेंसर | ₹10,000.00 प्रत्येक नोजल |
सरकार का कहना है कि इन सुधारों से राज्य लीगल मेट्रोलॉजी विभाग निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे. यह पहल टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस, व्यापार में पारदर्शिता और आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) विजन को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
इसके साथ ही भारत का मेट्रोलॉजी सिस्टम अब इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (OIML) की वैश्विक सिफारिशों और मानकों के अनुरूप और मजबूत होगा.
मैजूदा कैटेगरी
1. जल मीटर
2. स्फिग्मोमैनोमीटर
3. क्लिनिकल थर्मामीटर
4. स्वचालित रेल वेब्रिज
5. टेप मापक यंत्र
6. सटीकता वर्ग III (150 किग्रा तक) के गैर-स्वचालित तौल यंत्र
7. सटीकता वर्ग IIII के गैर-स्वचालित तौल यंत्र
8. लोड सेल
9. बीम स्केल
10. काउंटर मशीन
11. सभी श्रेणियों के बाट
12. गैस मीटर
13. ऊर्जा मीटर
14. नमी मीटर
15. वाहनों के लिए गति मीटर
16. श्वास विश्लेषक
17. बहुआयामी मापक यंत्र
18. प्रवाह मीटर
नए जोड़े गए कैटेगरी
19. पेट्रोल/डीजल डिस्पेंसर
20. सीएनजी डिस्पेंसर
21. एलपीजी डिस्पेंसर
22. एलएनजी डिस्पेंसर
23. हाइडोजन डिस्पेंसर
सरकार के इस फैसले से पेट्रोल, डीजल और CNG समेत सभी फ्यूल डिस्पेंसर्स में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है. नियमित जांच और सख्त वेरिफिकेशन से ग्राहकों को सही मात्रा में तेल मिल सकेगा और कम तेल देने जैसी शिकायतों पर लगाम लगेगी. साथ ही क्लीन फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलने से देश की ग्रीन एनर्जी और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)