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दिल्ली सरकार ने लोगों को दी बड़ी राहत! (ANI)
दिल्ली में घर बनाने या दोबारा बनवाने वालों के लिए राहत भरी खबर आई है. दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज को लेकर नियम बदल दिए हैं. अब लोगों से पहले की तरह पूरे प्रिमाइसेस के हिसाब से पैसा नहीं लिया जाएगा.
सरकार का कहना है कि अब शुल्क सिर्फ उतनी ही जरूरत के हिसाब से लगेगा जितना पानी वास्तव में चाहिए होगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि नए नियमों से लोगों पर बेवजह का आर्थिक बोझ कम होगा और प्रक्रिया भी आसान बनेगी.
पहले पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज पूरे मकान या प्रिमाइसेस को देखकर तय किया जाता था. इससे कई लोगों को जरूरत से ज्यादा पैसा देना पड़ता था. लेकिन अब सरकार ने तरीका बदल दिया है. अब चार्ज इस बात पर तय होगा कि उस प्रॉपर्टी में पानी की असली जरूरत कितनी है. यानी जितनी जरूरत, उतना ही चार्ज. इससे लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
सरकार ने पुनर्निर्माण को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है. अगर कोई व्यक्ति अपना पुराना मकान तोड़कर नया बनाता है और पानी की जरूरत पहले जितनी ही रहती है, तो उससे दोबारा इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज नहीं लिया जाएगा. पहले कई लोगों को पुराने मकान की जगह नया निर्माण कराने पर फिर से शुल्क देना पड़ता था. अब नए नियम के बाद ऐसी स्थिति में राहत मिलेगी.
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दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि खुले क्षेत्र और नॉन-एफएआर एरिया को अब चार्ज की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा. यानी जिन हिस्सों का पानी की जरूरत से सीधा संबंध नहीं है, उन पर अलग से शुल्क नहीं लगेगा. इस फैसले से कई प्रॉपर्टी मालिकों का खर्च कम हो सकता है.
सरकार ने अलग-अलग कैटेगरी की कॉलोनियों को राहत देने का भी फैसला लिया है. ई और एफ कैटेगरी की कॉलोनियों में आईएफसी चार्ज पर 50 प्रतिशत तक छूट मिलेगी. वहीं जी और एच कैटेगरी की कॉलोनियों को 70 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी. इससे उन इलाकों में रहने वाले लोगों को सीधा फायदा मिलेगा.
सरकार ने कहा है कि यह नियम सिर्फ 200 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर लागू होगा. यानी छोटे प्लॉट और छोटे मकान वाले लोग इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे. इस फैसले को आम लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए भी प्रक्रिया आसान करने की बात कही है. अब वहां पंजीकृत आर्किटेक्ट द्वारा पास किए गए नक्शों को मान्यता दी जाएगी. सरकार का कहना है कि इससे लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और काम जल्दी हो सकेगा.