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पूसा में दिखाई गई पराली पर कैमिकल डाल कर खाद बनाने की तकनीक (फोटो- दिल्ली सरकार)
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली में अब पराली से खेत में ही खाद बना दी जाएगी. इसके लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली के किसानों को मुफ्त में आधुनिक तकनीक और मशीन उपलब्ध कराने का ऐलान किया है.
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा की तरफ से पराली से खेत में खाद बनाने की विकसित की गई तकनीक (बॉयो डी-कंपोजर) का डेमोस्ट्रेशन देखा. उन्होंने इस मौके पर दिल्ली के किसानों को ये तकनीक मुफ्त में उपलब्ध कराने की बात कही. उन्होंने कहा कि यह तकनीक सफल होती है, तो पराली जलाने से होने वाले धुंए की समस्या से दिल्ली के लोगों को राहत मिलेगी.
इस मौके पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने कहा कि हर साल पंजाब में 20 मिलियन टन पराली होती है, जिसमें से पिछले साल 9 मिलियन टन पराली जलाई गई. हरियाणा में 7 मिलियन में से 1.23 मिलियन टन पराली जलाई गई. इससे दिल्ली के लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि केंद्र और दिल्ली के आसपास के राज्यों की सरकारों से बात कर पराली से खाद बनाने की इस्तेमाल से प्रदूषण पर लगाम लगाने का प्रयास करेंगे.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री के मुताबिक दिल्ली के अंदर खासतौर पर सर्दियों के समय में प्रदूषण की समस्या काफी बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने एक योजना बनाई है, जिसमें पराली न जलाने के लिए किसानों को कुछ मदद दी जाती है, सरकार ने मिले पैसे से मशीन खरीदी जाती है, जिसमें आधा पैसा किसानों को देना पड़ता है और आधा पैसा सरकार देती है. पूरा ने एक तकनीक विकसित की है जिसके तहत डी-कंपोजर के जरिए खेत में ही पराली पर केमिकल का छिड़काव किया जाएगा और वहीं पर पराली खाद बन जाएगा. पराली पर कैमिकल के छिड़काव में जो भी खर्चा आए, वह सरकार उठाएगी. इससे किसानों पर कोई बोझ भी नहीं पड़ेगा और पराली की समस्या का समाधान भी हो जाएगा.
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पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल दिल्ली में सफल रहता है तो हम पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों से भी इसे इस्तेमाल करने के लिए कहेंगे. बहुत से किसानों को इस तकनीक का फायदा मिलेगा.