दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, जल-सीवर फीस में कटौती, धार्मिक संस्थानों को 50% छूट

दिल्ली सरकार ने जल और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में बड़ी राहत दी है. धार्मिक संस्थानों और ZLD सिस्टम अपनाने वाले संस्थानों को 50% तक की छूट मिलेगी. नई नीति के तहत रिहायशी और औद्योगिक संपत्तियों के शुल्क में भी भारी कमी की गई है.
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, जल-सीवर फीस में कटौती, धार्मिक संस्थानों को 50% छूट

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला (फोटो - PTI)

दिल्ली सरकार ने सीवर और जल इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है. नई व्यवस्था के तहत धार्मिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण अनुकूल सिस्टम अपनाने वाले संस्थानों को बड़ी राहत दी जाएगी.

सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य लोगों को पारदर्शी, आसान और सुविधाजनक व्यवस्था देना है ताकि नागरिक बिना किसी परेशानी के अपना शुल्क जमा कर सकें.

धार्मिक संस्थानों को 50% अतिरिक्त छूट

नई नीति के तहत आयकर अधिनियम की धारा 12AB के अंतर्गत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को सीवर और जल इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क पर 50 फीसदी अतिरिक्त छूट दी जाएगी. इससे मंदिर, गुरुद्वारे, ट्रस्ट, आश्रम और अन्य धार्मिक-सामाजिक संस्थानों को सीधा फायदा मिलेगा.

सरकार का मानना है कि इससे ऐसे संस्थानों पर वित्तीय बोझ कम होगा और वे अपनी सेवाओं को बेहतर तरीके से चला सकेंगे.

ZLD सिस्टम अपनाने वालों को भी राहत

दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है. जिन संस्थागत और व्यावसायिक संपत्तियों में ‘जीरो सीवरेज डिस्चार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर’ यानी जीरो सीवरेज डिस्चार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा उपलब्ध होगी, उन्हें भी सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी.

हालांकि इसके लिए यह जरूरी होगा कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज एसटीपी केंद्रीय और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार स्थापित और संचालित हो.

सरकार ने साफ किया है कि अगर यह प्लांट बंद या निष्क्रिय पाया गया तो दी गई छूट तुरंत वापस ले ली जाएगी. इसके अलावा प्रतिदिन 0.05 फीसदी का जुर्माना भी लगाया जाएगा.

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नई नीति के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में भारी कटौती की गई है. उदाहरण के तौर पर 300 FAR, चार मंजिला इमारत और 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट के लिए ए और बी कैटेगरी में पहले करीब ₹13.18 लाख शुल्क देना पड़ता था. अब यह घटकर ₹5.40 लाख रह जाएगा.

इसी तरह ई और एफ कैटेगरी में यह शुल्क घटकर ₹2.70 लाख और जी व एच कैटेगरी में ₹1.62 लाख रह जाएगा.

उद्योगों को भी बड़ी राहत

औद्योगिक संपत्तियों को भी इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी. 1000 वर्ग मीटर, 150 FAR और चार मंजिला इमारत वाली इंडस्ट्री के लिए ए और बी कैटेगरी में पहले लगभग ₹57.67 लाख शुल्क लगता था, जो अब घटकर ₹8.91 लाख रह जाएगा.

वहीं ई और एफ कैटेगरी के लिए यह शुल्क ₹4.50 लाख और जी व एच कैटेगरी के लिए ₹2.67 लाख कर दिया गया है.

क्या है सरकार का उद्देश्य?

दिल्ली सरकार का कहना है कि नई नीति का मुख्य उद्देश्य सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी, सरल और राहतभरा बनाना है. साथ ही सरकार पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम को बढ़ावा देना चाहती है.

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