दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होगा MSP

गेहूं का एमएसपी 1840 रुपये प्रति क्विंटल और धान (ग्रेड-1) का एमएसपी 1770 प्रति क्विंटल है. जबकि इनकी लागत क्रमश: 1744 और 1778 रुपये आती है.
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होगा MSP

दिल्ली सराकर ने एमएसपी तय करने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है (फोटो-Zeebiz)

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने किसानों के हित में एमएस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार ने कहा है कि किसानों की फसल का न्यूनत समर्थन मूल्य स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा. दिल्ली के विकास मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि एक फसल तैयार होने में बीज, खाद, पानी के अलावा परिवहन खर्च, मजदूरी, किसान परिवार की मेहनत और जमीन का किराया भी शामिल होता है, लेकिन सरकार एमएसपी तय करते समय केवल खाद, बीज और मजदूरी का आकलन करती है. इससे किसान को उसकी फसल की लागत भी नहीं मिल पाती है.

विकास मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली में करीब 20,000 किसान हैं. अभी तक की सरकारों ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारशों को लेकर गंभीरता से कदम नहीं उठाए हैं. दिल्ली सरकार ने राज्य के किसानों के हित में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी तय करने का फैसला किया है. उन्होंने मीडिया को बताया कि कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए बीते साल 4 दिसंबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. गेहूं व धान की फसल के उत्पादन लागत के आकलन के लिए यह कमेटी बनाई गई थी. अब कमेटी ने दिल्ली के किसानों के लिए एमएसपी के संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली सरकार समिति की रिपोर्ट को सुझावों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा जाएगा. एक बार एमएसपी को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सरकार किसानों के साथ बैठकें करेगी, उनके विचार जानेगी और उसके बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.

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दिल्ली के किसानों की लागत ज्यादा
गोपाल राय ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दैनिक मजदूरी भत्ता, परिवहन खर्चे, फसल की कटाई-छटाई का खर्च, सिंचाई जैसे खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं. इसलिए यहां के किसानों की फसल की उत्पादन लागत का आकलन दिल्ली महानगर के मुताबिक किया जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि उत्पादन लगात तय करने के लिए बनाई कमेटी की सिफारिशों में एक हेक्टेयर में गेहूं और चावल की फसल की लागत निकाली थी. जिसमें एक हेक्टेयर गेहूं की उत्पादन लागत 78,501 रुपये और चावल की लागत 86,247 रुपये बैठती है.

कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक एक हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन 45 क्विंटल तथा चावल का उत्पादन 48.5 क्विंटल होता है. इस तरह एक क्विंटल गेहूं की उत्पादन लागत 1744 रुपये और चावल की लागत 1778 रुपये आती है.

कितना होता है फायदा
इस समय गेहूं का एमएसपी 1840 रुपये प्रति क्विंटल और धान (ग्रेड-1) का एमएसपी 1770 प्रति क्विंटल है. जबकि इनकी लागत क्रमश: 1744 और 1778 रुपये आती है. इस तरह एक किसान को गेहूं में केवल 96 रुपये प्रति क्विंटल की बचत होती है और धान में 8 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा होता है. अगर इसमें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए तो लागत का डेढ़ गुना एमएसपी 2616 (गेहूं) और 2667 (धान) प्रति क्विंटल होता है.

2004 में हुआ था किसान आयोग का गठन
बता दें कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक तथा देश में हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले डॉ. एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में 18 नवम्बर, 2004 को राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया था. किसान आयोग ने 4 अक्टूबर, 2006 को भारत सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में किसान आयोग किसान कल्याण कार्यक्रमों को संबोधित करने की आवश्यकताओं पर बल दिया था. आयोग ने न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन की भारित औसत से कम से कम 50 फीसदी अधिक यानी डेढ़ गुना अधिक करने की सिफारिश की थी.

केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी), देश के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का आकलन करती है और फसलों का एमएसपी की वार्षिक अधिसूचना जारी करता है. स्वामीनाथन आयोग ने एमएसपी तय करने के लिए तीन फार्मूले ए-2, ए-2एफएल और सी-2 तय किए थे.

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