$150 के पार जाने को तैयार क्रूड! EMI कम होने का सपना टूटेगा? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रेट कट में हो सकती है देरी

Crude Oil Price: ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है. ऐसे हालात में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है, जिससे EMI कम होने का इंतजार और लंबा हो सकता है.
$150 के पार जाने को तैयार क्रूड! EMI कम होने का सपना टूटेगा? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रेट कट में हो सकती है देरी

ग्लोबल क्रू़ड ऑयल की कीमतें शॉर्ट-टर्म में 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं. (Image source- AI)

Crude Oil Price: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग से कच्चे तेल कीमतों में तेज उछाल का असर अब आपकी ईएमआई (EMI) पर भी पड़ सकता है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है. ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है. ऐसे हालात में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है, जिससे EMI कम होने का इंतजार और लंबा हो सकता है.

नियर टर्म में 120 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल

कोटक सिक्योरिटीज की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट कायनात चैनवाला ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि ग्लोबल क्रू़ड ऑयल की कीमतें शॉर्ट-टर्म में 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और अगर युद्ध एक महीने से ज्यादा चलता है और पश्चिम एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन बना रहता है, तो ये कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं.

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चैनवाला ने कहा, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें डब्ल्यूटीआई (WTI) के लिए 85-120 डॉलर और ब्रेंट के लिए 90-125 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में रहने की संभावना है. अगर संघर्ष और बढ़ता है और सप्लाई में रुकावटें कई हफ्तों तक बनी रहती हैं, तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं और शायद 150 डॉलकर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. लेकिन शॉर्ट-टर्म के लिए 120 डॉलर की संभावना ज्यादा है.

रोजाना लगभग 10-12 मिलियन बैरल का नुकसान

उन्होंने कच्चे तेल के बाजारों को ऊपर ले जाने में सप्लाई में रुकावटों की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में चल रही उथल-पुथल और हॉर्मुज की स्थिति के कारण पहले ही रोजाना लगभग 10-12 मिलियन बैरल का नुकसान हो चुका है. यह एक बड़ी बाधा है, न कि कोई काल्पनिक जोखिम.

इस साल की शुरुआत में, बाजार को प्रतिदिन 40-50 लाख बैरल की अतिरिक्त आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन मौजूदा नुकसान उस अतिरिक्त आपूर्ति की भरपाई कर रहे हैं और बाजार को घाटे की ओर धकेल रहे हैं.

शॉर्ट टर्म टारगेट$120 प्रति बैरल
लॉन्ग टर्म$150 प्रति बैरल
आपूर्ति में कमी10-12 मिलियन बैरल प्रति दिन
MCX पर भाव₹10,500 - ₹11,000
रणनीतिक भंडार (IEA)400 मिलियन बैरल (केवल 20 दिन के लिए पर्याप्त)

20 दिनों तक ही पूरा कर पाएंगे IEA के आपातकालीन भंडार

चैनवाला ने आगे कहा कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी द्वारा जारी किए गए 400 मिलियन बैरल सहित आपातकालीन भंडार, आपूर्ति में आई कमी को केवल लगभग 20 दिनों तक ही पूरा कर पाएंगे, जो बाधा के लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में अपर्याप्त होगा.

महंगाई और ब्याज दरों पर असर

उन्होंने कहा, ट्रेड में किसी भी प्रकार का दीर्घकालिक व्यवधान कच्चे तेल के लिए पॉजिटिव और अन्य कमोडिटीज के लिए निगेटिव होगा, क्योंकि इससे महंगाई की चिंताएं बढ़ेंगी और ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तनाव कम होता है, तो कीमतों में भारी गिरावट भी आ सकती है. ऐसी स्थिति में कच्चा तेल 55 - 65 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है, क्योंकि संकट से पहले बाजार में पहले से ही सप्लाई जरूरत से ज्यादा थी.

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सीजनल डिमांड पर हो सकता है असर

मई और जून के यात्रा वाले महीनों में सीजनल डिमांड का कुछ असर हो सकता है, लेकिन अन्य कारकों से कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना कम है.

MCX पर 20-30% तक बढ़ सकता है कच्चा तेल

घरेलू बाजार के बारे में बात करते हुए चैनवाला ने कहा कि MCX पर, कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर लगभग 8,300 रुपये से 20-30% तक बढ़ सकती हैं और यह 10,500-11,000 रुपये तक पहुंच सकती हैं. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह रुकावट कितने समय तक जारी रहता है.

उन्होंने अंत में यह चेतावनी भी दी कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है या स्थिति में कोई बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं, लेकिन यदि बातचीत जारी रहती है या बिना किसी बड़े व्यवधान के केवल छोटे-मोटे हमले होते रहते हैं, तो कच्चे तेल का बाजार अस्थिर रहने के बावजूद 85-120 डॉलर प्रति बैरल के भीतर ही रहने की उम्मीद है.

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