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चिंताजनक घटनाओं के बीच, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के इलाकों में हुई मौतों की जांच लगातार जारी है. जांच में अब तक कई राज्यों से दवाओं के नमूने एकत्रित किए गए हैं और उनके परीक्षण जारी हैं. अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच में कुछ दवाओं में खतरनाक केमिकल डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया है, जबकि अन्य दवाएं सुरक्षित पाई गई हैं.
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कुल 6 नमूने लिए और सभी 6 नमूने DEG और ईथिलीन ग्लाइकॉल (EG) से मुक्त पाए गए. इसी समय, मध्य प्रदेश औषधि नियंत्रक (MPFDA) ने 13 नमूने लिए, जिनमें से 3 का परीक्षण किया गया और ये भी DEG/EG से मुक्त पाए गए. इससे पता चलता है कि सभी दवाओं में समस्या नहीं है, लेकिन कुछ विशेष दवाओं में खतरनाक तत्व मौजूद हैं.
मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर, तमिलनाडु FDA ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट M/s Sresan Pharma, कांचीपुरम, तमिलनाडु से Coldrif Cough Syrup के नमूने लिए. परीक्षण के परिणाम 3 सितंबर 2025 की देर शाम को साझा किए गए. जांच में पाया गया कि ये सैंपल DEG की अनुमत सीमा से अधिक मात्रा में पाए गए. यह गंभीर स्थिति को दिखाता है, क्योंकि इस दवा का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है.
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 3 अक्टूबर 2025 से Risk Based Inspection शुरू किया गया है. यह निरीक्षण उन सभी 19 दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर किया जा रहा है, जिनके नमूने 6 राज्यों से लिए गए हैं. इस निरीक्षण का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया में किसी भी तरह की कमी को पहचानना और दवाओं की गुणवत्ता सुधारने के उपाय सुझाना है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के निरीक्षण से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और दवा निर्माताओं को अपने उत्पादन मानकों में सुधार करने का अवसर मिलेगा.
इस जांच में कई विशेषज्ञ संस्थाओं की multidisciplinary टीम शामिल है, जिसमें NIV, ICMR, NEERI, CDSCO और AIIMS नागपुर के विशेषज्ञ शामिल हैं. यह टीम विभिन्न नमूनों और अन्य कारकों का विश्लेषण कर रही है, ताकि छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में हुई मौतों के कारणों का पता लगाया जा सके.
विशेषज्ञों का कहना है कि जांच का मकसद केवल दोषी दवा का पता लगाना ही नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि उत्पादन और वितरण प्रक्रिया में कहां कमी रही, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सके.
अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित स्रोत से दवाएं ही खरीदें. किसी भी तरह के सर्दी, खांसी या अन्य लक्षणों के लिए केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का सेवन करें. लोगों को शक होने पर दवा का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए और अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या FDA कार्यालय से संपर्क करना चाहिए.
जांच जारी है और आगामी हफ्तों में सभी नमूनों के विस्तृत परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी. Risk Based Inspection और विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट के आधार पर दोषी दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटा दिया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल घटना की जांच करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
1. छिंदवाड़ा में मौतों की जांच क्यों हो रही है?
जांच इस लिए हो रही है कि कुछ दवाओं में खतरनाक केमिकल DEG पाया गया और यह मौतों से जुड़ा हो सकता है.
2. Coldrif Cough Syrup में क्या समस्या मिली?
इस दवा के सैंपल में DEG की अनुमत सीमा से अधिक मात्रा मिली, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है.
3. अन्य दवाओं की स्थिति क्या है?
CDSCO और MPFDA के अन्य नमूने DEG/EG से मुक्त पाए गए, यानी कई दवाएं सुरक्षित हैं.
4. Risk Based Inspection क्यों किया जा रहा है?
यह निरीक्षण उत्पादन प्रक्रिया में खामियों को पहचानने और भविष्य में गुणवत्ता समस्याओं को रोकने के लिए किया जा रहा है.
5. जनता को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
सिर्फ प्रमाणित और सुरक्षित स्रोत से दवाएं लें. संदेह होने पर दवा का इस्तेमाल बंद करें और स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.
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