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Costly Medicine: महंगी दवाओं और अस्पताल के महंगे खर्चे से लोगों को राहत देने के लिए जल्द ही कुछ दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप को लागू कर दिया जाएगा. ये ट्रेड मार्जिन कैप चरणबद्ध तरीके से लागू किया जएगा. बता दें कि दवाओं के मार्जिन पर कंसल्टेशन और इंटर डेप्ट की चर्चा पूरी हो गई है और अब जल्द ही ट्रेड मार्जिन कैप को लागू करने की कवायद शुरू हो जाएगी. इससे ये होगा कि ये जो दवाएं लंबे समय के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, उनकी कीमत के मार्जिन पर कैप लगेगी, जिससे महंगी दवाएं और लंबे समय के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं सस्ती हो सकती हैं और ये आम लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत हो सकती है.
बता दें कि दवाओं के ट्रेड मार्जिन कैपिंग को लेकर डिस्ट्रीब्यूटर ने दाम पर मार्जिन कैपिंग की सलाह दी है. ऐसा बताया जा रहा है कि पहले चरण में लगभग 150 फॉर्मूलेशन रखे जाएंगे और ट्रेड मार्जिन में 30-50 फीसदी तक रोक लगाने की सुझाव दिया गया है. इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द फैसला ले सकता है.
बता दें कि NPPA, CDSCO, AIIMS, DGHS ने लिस्ट तैयार कर ली है और लिस्ट में लंबे समय के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं को शामिल किया गया है. इसमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, BP और कैंसर की दवाएं शामिल हैं. इसके अलावा Remdesivir जैसी दवा भी शामिल होगी. कुछ पेटेन्ट वाली दवा को भी इसके दायरे में रखा गया है
बता दें कि सरकार महंगी दवाओं को सस्ता करने पर फोकस कर रही है. चरणबद्ध तरीके से दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण लगाया जाएगा. इसके अलावा पहले चरण में हृदय रोग और शुगर की दवाओं पर फैसला हो सकता है. हार्ट, किडनी, कैंसर, शुगर, टीबी और अन्य जीवन रक्षक दवाओं के मार्जिन पर कंट्रोल किया जा सकता है.
इसके अलावा नॉन शेड्यूल्ड दवाओं के दाम पर नियंत्रण किया जा सकता है और National List Of Essential Medicines पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है. इसके अलावा मार्जिन पर NPPA का प्रेजेंटेशन होगा. बता दें कि रेगुलेटर कई महीनों से मार्जिन, रीटेल कीमतों पर अध्ययन कर रहा है.
NPPA के डाटा की माने तो 100 रुपये से अधिक कीमत वाली दवाओं पर 8-9% मामले में मार्जिन 200-500% होता है. वहीं 3% मामलों में मार्जिन 500-1000% और 2% मामलों में ये 1000% से भी ज्यादा हो सकता है.