बायबैक, मर्जर के नियमों में सरकार की बड़े बदलाव की तैयारी, आज लोकसभा में पेश हो सकता है Corporate Law Amendment Bill

कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल 2026 में कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी है.बायबैक, मर्जर, ऑडिट, पेनल्टी और AGM नियमों में बदलाव किए गए हैं. NFRA और IBBI की ताकत बढ़ेगी, वहीं कंपनियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है.
बायबैक, मर्जर के नियमों में सरकार की बड़े बदलाव की तैयारी, आज लोकसभा में पेश हो सकता है Corporate Law Amendment Bill


देश में कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल आज लोकसभा में पेश किया जा सकता है. अगर यह बिल पास होता है, तो कंपनियों के कामकाज, नियमों और अनुपालन (compliance) में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. असल में इस पर सरकार का फोकस साफ है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना और कंपनियों पर अनावश्यक बोझ कम करना.

बायबैक और मर्जर नियमों में बड़ा बदलाव

  • नए बिल में कंपनियों के लिए बायबैक (Buyback) से जुड़े नियम आसान किए गए हैं.
  • अब कंपनियां साल में दो बार बायबैक ला सकेंगी
  • पहले यह प्रक्रिया ज्यादा सीमित थी
  • मर्जर (Merger) के नियमों में भी रूल किए गए हैं
  • इससे कंपनियों को अपने कैपिटल मैनेजमेंट में ज्यादा लचीलापन मिलेगा
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कैपिटल और रिजर्व नियमों में ढील

बिल में कुछ कंपनियों को राहत देते हुए पेड-अप कैपिटल और रिजर्व के 25% नियम में ढील दी गई है
इससे छोटी और मध्यम कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है

NFRA और IBBI को मिली ज्यादा ताकत

  • नए संशोधन में रेगुलेटर्स की ताकत भी बढ़ाई गई है
  • NFRA (National Financial Reporting Authority)
  • IBBI (Insolvency and Bankruptcy Board of India)
  • अब इन संस्थाओं को रिकवरी की ज्यादा पावर मिलेगी, जिससे नियमों का पालन और सख्त होगा.loksabaha bill

ESOP और LLP नियमों में भी बदलाव

  • ESOP (Employee Stock Option Plan) से जुड़े नियमों को साफ किया गया है
  • IFSCA के ट्रस्ट अब LLP में बदल सकेंगे
  • इससे फाइलिंग प्रक्रिया आसान होगी
  • पहले जहां हर महीने फाइलिंग करनी पड़ती थी, अब साल में सिर्फ एक बार फाइलिंग करनी होगी.

ऑडिट और पेनल्टी नियमों में राहत और सख्ती दोनों

नए बिल में बैलेंस बनाने की कोशिश की गई है,इससे कुछ कंपनियों को ऑडिट से छूट दी गई है . लेकिन लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के लिए अलग पेनल्टी नियम हैं, इसमें लिस्टेड कंपनियों पर ज्यादा जुर्माना और पेनल्टी को चैलेंज करने के लिए 10% राशि जमा करना जरूरी है.

वैसे आपको बता दें कि CSR करने वाली कंपनी का भी थ्रेशोल्ड 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने का प्लान नए कॉरपोरेट लॉ संशोधन बिल में किया गया है.

AGM (Annual General Meeting) में बड़ा चेंज

  • कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए अब हर साल फिजिकल AGM जरूरी नहीं
  • कंपनियां तीन साल में एक बार फिजिकल AGM कर सकती हैं
  • बाकी AGM वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हो सकती हैं
  • इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी

सेटलमेंट से केस निपटाने की सुविधा

  • MCA (Ministry of Corporate Affairs) ने अन्य रेगुलेटर्स की तरह
  • अब सेटलमेंट के जरिए केस निपटाने का विकल्प दिया है
  • इससे कंपनियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी

आज लोकसभा में दो बड़े बिल संभव

फाइनेंस बिल आज लोकसभा में पेश हो सकता है

साथ ही कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल भी पेश होने की संभावना

कंपनियों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है बिल

अगर यह बिल पास होता है, तो कंपनियों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा,अनुपालन आसान होगा,डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलेगा और रेगुलेटरी सिस्टम और मजबूत होगा.यानी कि कुल मिलाकर, यह बिल कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है.

FAQs

1. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल क्या है?
यह एक प्रस्तावित कानून है जिसमें कंपनियों के कामकाज, नियमों और अनुपालन को आसान बनाने के लिए बदलाव किए गए हैं

2. इस बिल में बायबैक को लेकर क्या बदलाव है?
अब कंपनियां साल में दो बार बायबैक ला सकेंगी, जिससे उन्हें ज्यादा लचीलापन मिलेगा

3. क्या ऑडिट नियमों में भी बदलाव हुआ है?
हाँ, कुछ कंपनियों को ऑडिटिंग से छूट दी गई है ताकि अनुपालन बोझ कम हो सके

4. AGM को लेकर क्या नया नियम है?
कंपनियां अब हर साल फिजिकल AGM की जगह तीन साल में एक बार ही फिजिकल मीटिंग करेंगी, बाकी ऑनलाइन हो सकती हैं

5. पेनल्टी नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के लिए अलग पेनल्टी नियम बनाए गए हैं, साथ ही अपील के लिए 10% राशि जमा करनी होगी

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