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देश में कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल आज लोकसभा में पेश किया जा सकता है. अगर यह बिल पास होता है, तो कंपनियों के कामकाज, नियमों और अनुपालन (compliance) में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. असल में इस पर सरकार का फोकस साफ है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना और कंपनियों पर अनावश्यक बोझ कम करना.
बिल में कुछ कंपनियों को राहत देते हुए पेड-अप कैपिटल और रिजर्व के 25% नियम में ढील दी गई है
इससे छोटी और मध्यम कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है
नए बिल में बैलेंस बनाने की कोशिश की गई है,इससे कुछ कंपनियों को ऑडिट से छूट दी गई है . लेकिन लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के लिए अलग पेनल्टी नियम हैं, इसमें लिस्टेड कंपनियों पर ज्यादा जुर्माना और पेनल्टी को चैलेंज करने के लिए 10% राशि जमा करना जरूरी है.
वैसे आपको बता दें कि CSR करने वाली कंपनी का भी थ्रेशोल्ड 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने का प्लान नए कॉरपोरेट लॉ संशोधन बिल में किया गया है.
फाइनेंस बिल आज लोकसभा में पेश हो सकता है
साथ ही कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल भी पेश होने की संभावना
अगर यह बिल पास होता है, तो कंपनियों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा,अनुपालन आसान होगा,डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलेगा और रेगुलेटरी सिस्टम और मजबूत होगा.यानी कि कुल मिलाकर, यह बिल कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है.
1. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल क्या है?
यह एक प्रस्तावित कानून है जिसमें कंपनियों के कामकाज, नियमों और अनुपालन को आसान बनाने के लिए बदलाव किए गए हैं
2. इस बिल में बायबैक को लेकर क्या बदलाव है?
अब कंपनियां साल में दो बार बायबैक ला सकेंगी, जिससे उन्हें ज्यादा लचीलापन मिलेगा
3. क्या ऑडिट नियमों में भी बदलाव हुआ है?
हाँ, कुछ कंपनियों को ऑडिटिंग से छूट दी गई है ताकि अनुपालन बोझ कम हो सके
4. AGM को लेकर क्या नया नियम है?
कंपनियां अब हर साल फिजिकल AGM की जगह तीन साल में एक बार ही फिजिकल मीटिंग करेंगी, बाकी ऑनलाइन हो सकती हैं
5. पेनल्टी नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के लिए अलग पेनल्टी नियम बनाए गए हैं, साथ ही अपील के लिए 10% राशि जमा करनी होगी
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