Constitution Day 2025: भारतीय संविधान में कितनी बार हो चुका है बदलाव? दुनिया के सबसे लंबे कॉन्स्टीट्यूशन का ये फैक्ट जानते हैं आप

आज के दिन देश संविधान दिवस (National Constitution Day) मना रहा है. 75 साल पहले आज ही के दिन यानी 26 नवम्बर को भारत का संविधान (Constitution of India) बनकर तैयार हो गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 75 सालों में हमारा संविधान कितनी बार बदला जा चुका है? 
Constitution Day 2025: भारतीय संविधान में कितनी बार हो चुका है बदलाव? दुनिया के सबसे लंबे कॉन्स्टीट्यूशन का ये फैक्ट जानते हैं आप

Constitution Day 2025: आज के दिन देश संविधान दिवस (National Constitution Day) मना रहा है. 75 साल पहले आज ही के दिन यानी 26 नवम्बर को भारत का संविधान (Constitution of India) बनकर तैयार हो गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 75 सालों में हमारा संविधान कितनी बार बदला जा चुका है?

कैसा था संविधान का मूल ढांचा?

भारत का संविधान दुनिया का सबसे लम्बा संवधान है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे बहुत बारीकी से लिखा गया है. यही कारण है कि इतने सालों बाद भी हमारे संविधान का मूल ढांचा वैसे का वैसा है. भारत के मूल संविधान की 8 अनुसूचियों में 395 अनुच्छेदों को जगह दी गई थी. हमारे संविधान की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके मूल ढांचे को बिना बदले, समय और जरूरतों को देखते हुए इसमें संशोधन किये जा सकते हैं. ये इसे और देश को समय के साथ ढलने में मदद करता है.

कुल 106 संशोधन

संविधान के 75 सालों के इतिहास में अब तक कुल 106 संशोधन किए गए हैं. जहां पहला संविधान संशोधन 18 जून 1951 को किया गया था. यह संशोधन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वाजिब प्रतिबंध लगाने, जमींदारी हटाने वाले कानूनों को मान्यता देने और कमजोर वर्गों के लिए खास कानून बनाने के लिए किया गया था। आखिरी यानी 106वां संविधान संशोधन 28 सितंबर 2023 को किया गया था, जब लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई रिजर्वेशन का प्रावधान रखा गया.

10 सबसे महत्वपूर्ण संशोधन

1. 1950 में संविधान लागु होने के एक साल बाद ही इसमें संशोधन की जरुरत महसूस हुई. यह जरुरत थी जमीनदारी को हमेशा के लिए खत्म करने की. इसलिए 1951 में पहले संविधान संशोधन के तहत इसमें नौवीं अनुसूची जोड़ी गई. राज्य को पिछड़े वर्गों के विकास के लिए खास कानून बनाने का अधिकार दिया गया. साथ ही यह संशोधन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वाजिब प्रतिबंध लगाने और जमींदारी को खत्म करने के लिए भी किया गया था.

2. साल 1956 में सातवां संविधान संशोधन किया गया. इसके जरिए भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया. राज्यों के A, B, C, D वर्गों को खत्म कर दिया गया. इसके बाद देश को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया. इसके तहत दो या दो से ज्यादा राज्यों के लिए एक ही राज्यपाल नियुक्त करने और एक ही उच्च न्यायालय स्थापित करने जैसे प्रावधान लाए गए.

3. साल 1971 में 25वें संशोधन के तहत संपत्ति के मौलिक अधिकार को सीमित किया गया. इससे सरकार को सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए संपत्ति के कब्जे पर खुद मुआवजा तय करने अधिकार मिल गया.

4. 1975 में 36वें संशोधन अधिनियम के तहत सिक्किम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया.

5. फिर 1976 में, इमरजेंसी के दौरान, 42वां संविधान संशोधन किया गया. इसके द्वारा संविधान में कई सारे बदलाव एक साथ किए गए जिसके कारण इसे 'लघु-संविधान' या 'मिनी कॉन्स्टिट्यूशन' भी कहा जाता है. इसी संशोधन ने प्रिएम्बल (Preamble of India) में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े. साथ ही नागरिकों के लिए 10 मौलिक कर्तव्य भी स्थापित किए. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियों को सीमित भी किया. इसके अलावा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया. इस संशोधन के तहत आपातकाल के दौरान राज्यों की सहमति के बिना ही राष्ट्रपति को कानून बनाने का अधिकार दे दिया गया. हालांकि इनमें से कई बदलावों को बाद में 43वें और 44वें संशोधनों द्वारा उलट दिया गया था.

6. इमरजेंसी खत्म होने के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो 1978 में 44वां संविधान संशोधन अधिनियम लाया गया. इसका मकसद आपातकाल के दुरुपयोग को रोकना और एग्जीक्यूटिव शक्तियों को सीमित करना था. इसने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया, और लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल फिर से पांच साल कर दिया. साथ ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश को अनिवार्य कर दिया गया. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 के मौलिक अधिकारों के निलंबन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

7. 1985 में राजीव गांधी की सरकार के दौरान, 52वां संशोधन अधिनियम लाया गया. इसके तहत दलबदल विरोधी कानूनों के लिए एक नई दसवीं अनुसूची संविधान में जोड़ी गई. यह संशोधन 1967 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में "आया राम, गया राम" वाली घटना की प्रतिक्रिया के तौर पर लाया गया था. जब वधायक गया लाल ने एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदली थी.

8. 1989 में, 61वां संशोधन अधिनियम लाय गया. इसके तहत लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए मतदान की आयु 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी गई थी.

9. फिर 69वां संशोधन 1991 में किया गया. जब केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' का दर्जा दिया गया. दिल्ली में 70 सदस्यीय विधान सभा और 7 सदस्यीय मंत्रिपरिषद बनाया गया.

10. 2023 के 106वें संशोधन के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान लाया गया. जिनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं.

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