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त्योहारों के सीजन के दौरान सरकार किसी भी तौर पर आम लोगों को एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल की जमाखोरी की मार से बचाने के लिए कमर कस चुकी है. उपभोक्ता मामले का मंत्रालय इस मामले में एक्शन में आ चुका है. मंत्रालय के खाद्य सचिव ने राज्यों से त्योहारी सीजन के दौरान एडिबल ऑयल के दामों को नियंत्रत रखने के लिए निर्देश जारी किए थे. इसकी एक बैठक भी बुलाई गई थी. जिसमें आज खाद्य सचिव ने राज्यों के प्रतिनिधियों और तेल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मुलाकात के बाद उम्मीद जतायी कि अक्टूबर से खाने के तेल को दाम कम होने लगेंगे.
दलहन की तरह ही खाद्य तेल और तिलहनों के मौजूदा स्टॉक को सार्वजनिक करने के लिए सरकार जल्द एक पोर्टल लाने वाली है. जो अगले हफ्ते चालू हो जाएगा. व्यापारी और इंडस्ट्री इसके जरिए अपने स्टॉक का डिस्क्लोजर दे सकते हैं जिसको की राज्य सरकार मोनिटर करेगी.
सरकार का कहना है कि खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क दरों को कम करने के बावजूद कीमतों में कमी नहीं हो रही है और उसकी एक वजह जमाखोरी हो सकती है. इसलिए जमाखोरी पर लगाम के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत कारोबारियों, व्यापारियों, प्रोसेस करने वाली इकाइयों को अपने स्टॉक की जानकारी सरकार के साथ साझा करनी होगी. यह काम राज्य सरकारें करेंगी और उनको आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह अधिकार दे दिया गया है.
सरकार ने बताया कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश के बावजूद सोयाबीन की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. राज्यों की माने तो ये उत्पादन पिछले साल के मुकाबले ज्यादा बढ़िया होगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी पाम और सोयाबीन तेल की कीमतों में गिरावट आयी है, इससे देश में खाने के तेल की कीमतों में कमी आएगी.