कैबिनेट ने दी 'ऋण गारंटी योजना' को मंजूरी, जानिए अब किसे मिलेगा 100 फीसदी लोन गारंटी कवरेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने बुधवार को क्रेडिट गारंटी योजना फॉर एक्सपोर्टर्स (CGS-Exporters) को मंजूरी दे दी. इस योजना से MSME और गैर-MSME निर्यातकों (Exporters) को 100% ऋण गारंटी (Loan Guarantee) मिलेगी. इसके तहत 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा दी जाएगी, जिससे भारत के $1 ट्रिलियन एक्सपोर्ट लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
कैबिनेट ने दी 'ऋण गारंटी योजना' को मंजूरी, जानिए अब किसे मिलेगा 100 फीसदी लोन गारंटी कवरेज

भारत के निर्यातकों (Exporters) के लिए बुधवार का दिन बड़ा रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया. सरकार ने क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर एक्सपोर्टर्स (Credit Guarantee Scheme for Exporters-CGS-E) को मंजूरी दे दी है.

इस नई योजना के तहत अब राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (National Credit Guarantee Trustee Company-NCGTC) को अधिकार मिलेगा कि वह सदस्य ऋण संस्थानों (Member Lending Institutions-MLI) को 100% गारंटी कवरेज दे सके. इससे पात्र निर्यातकों को, जिनमें MSME Exporters भी शामिल हैं, उन्हें ₹20,000 करोड़ तक की अतिरिक्त लोन सुविधा (Additional Loan Facility) मिलेगी.

क्या है CGS-E योजना और कौन करेगा इसका संचालन?

सरकार की यह नई योजना वित्तीय सेवाएं विभाग (Department of Financial Services-DFS) के जरिए लागू की जाएगी. इसका संचालन NCGTC द्वारा किया जाएगा ताकि बैंक और वित्तीय संस्थान निर्यातकों को बिना अतिरिक्त जोखिम के क्रेडिट दे सकें. एक प्रबंधन समिति (Management Committee) का गठन भी किया गया है, जिसकी अध्यक्षता DFS सचिव करेंगे. यह समिति इस योजना की प्रगति, कार्यान्वयन और प्रभाव की निगरानी करेगी.

कैसे मिलेगा MSME और Exporters को फायदा?

इस योजना का मुख्य लक्ष्य है निर्यातकों को Collateral-Free Loans यानी बिना किसी संपार्श्विक (Guarantee or Security) के ऋण उपलब्ध कराना. इससे छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) को अपने निर्यात कारोबार को विस्तार देने में आसानी होगी. इससे कई फायदे होंगे, जैसे-

  • 100% क्रेडिट गारंटी कवरेज
  • 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा
  • आसान और तेजी से लोन अप्रूवल प्रोसेस
  • जोखिम मुक्त बैंकिंग के कारण MSMEs के लिए आसान लोन
  • नए मार्केट्स और प्रोडक्ट्स में एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन

भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को क्यों चाहिए यह बढ़ावा?

भारत का निर्यात (Export) आर्थिक विकास की रीढ़ है. वित्त वर्ष 2024-25 में एक्सपोर्ट का योगदान GDP में करीब 21% रहा. वर्तमान में MSMEs कुल निर्यात में 45% हिस्सेदारी रखते हैं और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं.

निर्यात क्षेत्र में स्थिरता से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूती मिलती है और चालू खाता संतुलन (Current Account Balance) स्थिर रहता है.

कैसे बढ़ेगी भारत की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा?

CGS-E योजना से भारत के निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी. कई देशों में जहां सरकारें निर्यातकों को भारी सब्सिडी और गारंटी सपोर्ट देती हैं, अब भारत भी उसी दिशा में कदम रख रहा है. इसका असर होगा-

  • भारतीय कंपनियां अब विदेशी बाजारों में बेहतर दामों पर कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर सकेंगी.
  • Exporters को ऑर्डर के लिए फाइनेंस जुटाने में देरी नहीं होगी.
  • MSMEs को नए देशों और क्षेत्रों में प्रवेश आसान होगा.
  • भारत की ब्रांड वैल्यू और क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी.

1 ट्रिलियन डॉलर एक्सपोर्ट लक्ष्य की ओर कॉदम

भारत ने 2030 तक $1 ट्रिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है. CGS-E योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह योजना निर्यातकों को पर्याप्त तरलता (Liquidity) और वित्तीय सुरक्षा (Financial Security) प्रदान करेगी. सरकार का मानना है कि यदि MSME और गैर-MSME दोनों सेक्टर को वित्तीय सहयोग मिलता रहे, तो भारत की एक्सपोर्ट क्षमता में तेजी से इजाफा होगा.

आत्मनिर्भर भारत और ‘मेड इन इंडिया’ को मिलेगी नई रफ्तार

CGS-E योजना का सीधा असर भारत के ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Aatmanirbhar Bharat) मिशन पर पड़ेगा. अब MSMEs को न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार करने का मौका मिलेगा. “भारत अब सिर्फ ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल सप्लाई चेन लीडर’ बनने की दिशा में बढ़ रहा है.”

DFS सचिव ने क्या कहा

वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव ने कहा,“CGS-E योजना से छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए वित्त जुटाना आसान होगा. यह योजना भारत के निर्यात को विविध बनाएगी और भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता को और बढ़ाएगी.” उन्होंने यह भी बताया कि NCGTC के माध्यम से पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया (Transparent & Fast Approval) के जरिए बैंक अब बिना किसी जोखिम के MSMEs को सपोर्ट कर सकेंगे.

Conclusion

भारत की नई CGS-E योजना सिर्फ एक वित्तीय स्कीम नहीं, बल्कि ग्लोबल ट्रेड रणनीति (Global Trade Strategy) का हिस्सा है. यह MSMEs और बड़े निर्यातकों दोनों के लिए नई संभावनाओं का दरवाजा खोलेगी. आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए यह योजना एक मजबूत वित्तीय ढांचा (Robust Financial Backbone) साबित होगी.“भारत के निर्यातक अब बिना डर के, बिना गारंटी के, वैश्विक बाजार में आत्मविश्वास से आगे बढ़ सकेंगे.”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. CGS-E क्या है?

यह सरकार द्वारा शुरू की गई क्रेडिट गारंटी योजना है, जो निर्यातकों को 100% ऋण गारंटी प्रदान करती है.

2. इस योजना का संचालन कौन करेगा?

राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC).

3. क्या MSME निर्यातक भी लाभ उठा सकते हैं?

हां, MSME और गैर-MSME दोनों इस योजना के तहत पात्र हैं.

4. योजना की निगरानी कौन करेगा?

वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) की प्रबंधन समिति.

5. यह योजना कब से लागू होगी?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे तुरंत लागू किया जाएगा.

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